आयुष्मान घोटाले में उलझीं अपर कलेक्टर सपना लोवंशी की संपत्तियों की जानकारी ले रही ईओडब्ल्यू

Sanjay Gupta | Oct 15, 2026, 14:11 IST
अपर कलेक्टर सपना लोवंशी की संपत्तियों पर EOW की नजर।
Indore. मध्य प्रदेश के चर्चित आयुष्मान योजना घोटाले से जुड़े मामले में इंदौर में पदस्थ सपना लोवंशी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) भोपाल में उनके खिलाफ जांच चल रही है। इसी सिलसिले में ईओडब्ल्यू ने इंदौर जिला प्रशासन और संभागायुक्त कार्यालय से कई जानकारियां मांगी हैं। सपना लोवंशी 2007 बैच की राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी हैं।
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इस जांच के चलते उनका आईएएस बनना मुश्किल हो सकता है। फिलहाल वे इंदौर संभागायुक्त कार्यालय में उपायुक्त (राजस्व) के पद पर तैनात हैं।



क्या है पूरा विवाद

मध्य प्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों को भुगतान करने में कांग्रेस ने 500 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया था। इसी बीच दिसंबर 2022 में एक कार का वीडियो वायरल हुआ था। इसमें विमल लोवंशी नाम का व्यक्ति अस्पताल को भुगतान कराने के बदले 9 लाख रुपए की रिश्वत की बात करते दिखाई दिया था। विमल को कथित तौर पर सपना लोवंशी का देवर बताया गया था।



उस समय सपना लोवंशी स्वास्थ्य विभाग में अपर संचालक और आयुष्मान भारत निरामयम् की कार्यपालन अधिकारी थीं। वीडियो सामने आने के बाद योजना के सीईओ अनुराग चौधरी को पद से हटा दिया गया था। वहीं सपना लोवंशी का तबादला इंदौर कलेक्टोरेट में अपर कलेक्टर के पद पर कर दिया गया था।



इसके बाद सितंबर 2024 में सपना लोवंशी का फिर तबादला हुआ था। उन्हें इंदौर कलेक्टोरेट से संभागायुक्त कार्यालय में उपायुक्त के पद पर भेज दिया गया था।



ईओडब्ल्यू ने यह जानकारी मांगी

भोपाल ईओडब्ल्यू में आयुष्मान योजना घोटाले को लेकर शिकायत 418/22 दर्ज है। इसकी जांच चल रही है। इसी जांच के तहत भोपाल ईओडब्ल्यू ने इंदौर जिला प्रशासन और संभागायुक्त कार्यालय, इंदौर से सपना लोवंशी को लेकर जानकारी मांगी है। इसमें जानकारी मांगी गई है कि उन्हें क्या वेतन मिलता है, उनकी क्या चल-अचल संपत्ति है। साथ ही, संपत्ति खरीदी के लिए क्या मंजूरी लोवंशी ने ली है। इन सभी की विस्तृत जानकारी मांगी गई है।



जांच के चलते अटक न जाए आईएएस बनना

मध्यप्रदेश में इस साल 13 आईएएस पदों के लिए डीपीसी होना है। इसमें साल 2007 एवं 2008 बैच के अधिकारियों का नंबर आना है। इसमें सपना लोवंशी भी लिस्ट में आगे ही हैं। वहीं, इस जांच के चलते उनका नाम पदोन्नति में अटकने की आशंका तेज हो गई है।



जांच रिपोर्ट भी गायब

इस मामले में एक और बात सामने आई थी। लेन-देन का वीडियो वायरल होने के बाद जांच के आदेश दिए गए थे। लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट का कुछ पता नहीं चला है। वहीं जब अधिकारी के प्रमोशन के लिए डीपीसी की बारी आई, तो जांच रिपोर्ट नहीं मिलने पर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप लगे कि अधिकारी को बचाने के लिए जांच रिपोर्ट सामने नहीं लाई जा रही है।



विधानसभा में भी उठ चुका मामला

यह मामला मध्य प्रदेश विधानसभा में भी उठ चुका है। कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने भी इस मामले में सवाल उठाए थे। वहीं कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि प्रदेश में 422 निजी अस्पतालों को भुगतान के नाम पर 500 करोड़ रुपए का आयुष्मान घोटाला हुआ है।



दूसरी तरफ मध्य प्रदेश सरकार ने आंकड़े पेश कर बताया था कि मार्च 2020 से दिसंबर 2022 के बीच आयुष्मान योजना के तहत पांच लाख से ज्यादा मरीजों का इलाज हुआ था। इस दौरान मरीजों के इलाज पर कुल 1610 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।

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