भर्ती के बीच बदला नियम, हाईकोर्ट ने मेरिट लिस्ट और नियुक्तियों पर लगाई रोक
समझें क्या है पूरा मामला...
- 288 पदों पर ओटी टेक्नीशियन की भर्ती को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती।
- भर्ती शुरू होने के बाद 10 अगस्त को पात्रता नियम में बदलाव किया गया।
- सरकारी संस्थान की जगह किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान की योग्यता मान्य हुई।
- कोर्ट ने 31 मार्च की मेरिट लिस्ट और 13 अगस्त की नियुक्ति पर रोक लगाई।
- ESB समेत सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस, अगली सुनवाई 5 सितंबर 2026 को।
भर्ती शुरू होने के बाद बदल दिया पात्रता का नियम
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल यानी ESB की 288 पदों पर ओटी टेक्नीशियन भर्ती अब हाईकोर्ट के आदेश के चलते रुक गई है। मामला पद कोड 05 के तहत ओटी टेक्नीशियन पदों की भर्ती से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जब भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी और मेरिट लिस्ट तक जारी हो गई थी, तब सरकार ने पात्रता का मूल नियम ही बदल दिया।
पहले ओटी टेक्नीशियन का एक वर्षीय प्रमाण-पत्र किसी मान्यता प्राप्त शासकीय संस्थान से होना जरूरी था। बाद में 10 अगस्त 2026 की राजपत्र अधिसूचना से इसे बदलकर किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से योग्यता को मान्य कर दिया गया।
मेरिट लिस्ट के बाद बदला खेल
साल 2025 में ESB के द्वारा भर्ती विज्ञापन जारी किया गया था। संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मध्य प्रदेश ने पैरामेडिकल संपर्क के अंदर कई भर्तियां निकली थी। इस भर्ती में 288 पद ओटी टेक्नीशियन के भी थे। याचिका के मुताबिक भर्ती विज्ञापन के आधार पर अभ्यर्थियों ने आवेदन किया और चयन प्रक्रिया में शामिल हुए। इसी प्रक्रिया के तहत 31 मार्च 2026 को मेरिट लिस्ट भी जारी कर दी गई।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उस समय भर्ती के नियम साफ थे और निजी संस्थान से ओटी टेक्नीशियन का प्रमाण-पत्र रखने वाले अभ्यर्थी पात्र नहीं थे। इसके बावजूद भर्ती पूरी होने के दौरान नियम में बदलाव कर ऐसे अभ्यर्थियों को भी चयन के दायरे में शामिल कर लिया गया। याचिकाकर्ताओं ने इसे भर्ती प्रक्रिया के बीच 'खेल के नियम बदलने' जैसा बताया है।
निजी संस्थान की योग्यता वाले अभ्यर्थी को नियुक्ति
याचिका में इस बदलाव का एक सीधा उदाहरण अतुल कुमार श्रीवास्तव की नियुक्ति को बताया गया है। दस्तावेजों के अनुसार 12 जून 2026 की कार्यवाही में उनके बारे में दर्ज किया गया था कि उन्होंने ओटी टेक्नीशियन का कोर्स निजी संस्थान से किया है। उस समय उनकी योग्यता के सत्यापन की बात भी दर्ज थी।
इसके बाद 10 अगस्त को पात्रता नियम बदला गया और 13 अगस्त 2026 को अतुल कुमार श्रीवास्तव को ओटी टेक्नीशियन पद पर चयनित कर नियुक्ति दे दी गई। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यही घटनाक्रम दिखाता है कि बाद में बदला गया नियम इसी चल रही भर्ती में लागू किया गया।
हाईकोर्ट में 'गेम के रूल बदलने' की दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आर्यन उर्मलिया ने दलील दी कि भर्ती शुरू होने के बाद पात्रता का दायरा बदलना समान अवसर के सिद्धांत को प्रभावित करता है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के तेज प्रकाश पाठक बनाम राजस्थान हाईकोर्ट और परिमल कुमार बनाम झारखंड राज्य के फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया है कि भर्ती शुरू होने के बाद उसके मूल पात्रता नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति निजी संस्थानों की योग्यता को भविष्य में मान्यता देने पर नहीं है, बल्कि चल रही भर्ती में उस बदलाव को लागू करने पर है।
मेरिट लिस्ट और नियुक्ति पर हाईकोर्ट की रोक
जस्टिस विवेक कुमार सिंह की सिंगल बेंच ने सोमवार 17 अगस्त 2026 को मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर विचार करते हुए कोर्ट ने 31 मार्च 2026 की मेरिट लिस्ट और उसके आधार पर हुई नियुक्तियों पर रोक लगा दी। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, ESB समेत अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अंतरिम आदेश के तहत संशोधित पात्रता के आधार पर आगे की नियुक्तियों पर भी रोक का असर रहेगा।
अब 5 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से मांग की है कि 10 अगस्त 2026 के संशोधन को इस भर्ती पर लागू करने की कार्रवाई निरस्त की जाए। साथ ही 31 मार्च की मेरिट लिस्ट पर पुनर्विचार कर मूल भर्ती विज्ञापन में लागू पात्रता शर्तों के आधार पर नई मेरिट और चयन सूची तैयार करने का निर्देश दिया जाए।
कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी। मामले की अगली सुनवाई 5 सितंबर 2026 को होगी। आपको बता दें की याचिका के जरिए पूरी मेरिट लिस्ट को चैलेंज किया गया है और जानकारी के मुताबिक अब स्टे का प्रभाव केवल 288 पदों पर नहीं बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया पर पड़ेगा।
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