पूर्व विधायक शशांक भार्गव मामले में नया मोड़: हाईकोर्ट के सामने पेश होंगे वीडियो
समझें क्या है पूरा मामला
- पूर्व विधायक शशांक भार्गव की अग्रिम जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।
- बचाव पक्ष ने मामले से जुड़े वीडियो कोर्ट में चलाने की मांग की।
- कोर्ट ने पाया कि चार्जशीट में वीडियो का उल्लेख है लेकिन वीडियो रिकॉर्ड पर नहीं हैं।
- सरकार और विदिशा सिविल लाइन थाना पुलिस को वीडियो पेश करने के निर्देश दिए गए।
- अब 24 जून 2026 को वीडियो देखने के बाद जमानत पर फैसला होगा।
वीडियो साक्ष्यों पर केंद्रित रही सुनवाई
कांग्रेस के पूर्व विधायक और अब बीजेपी नेता शशांक भार्गव की अग्रिम जमानत याचिका पर बुधवार 17 जून को जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान भार्गव की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने कोर्ट से आग्रह किया कि मामले की जांच के दौरान सामने आए वीडियो साक्ष्यों को कोर्ट के समक्ष प्ले कराया जाए। ताकि घटनाक्रम की वास्तविकता और वीडियो की प्रकृति को प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सके।
चार्जशीट में जिक्र
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने केस डायरी और पुलिस द्वारा प्रस्तुत चार्जशीट का अवलोकन किया। कोर्ट ने पाया कि जांच एजेंसी ने चार्जशीट में वीडियो साक्ष्यों का उल्लेख किया है। उनकी ट्रांसक्रिप्ट भी रिकॉर्ड पर रखी गई है। लेकिन मूल वीडियो फाइलें न्यायालय के समक्ष उपलब्ध नहीं हैं। इस स्थिति को महत्वपूर्ण मानते हुए न्यायालय ने वीडियो साक्ष्यों को रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता जताई।
सरकार और पुलिस को दिए गए स्पष्ट निर्देश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य शासन और विदिशा पुलिस को निर्देश दिए हैं कि मामले से जुड़े सभी वीडियो अगली सुनवाई पर कोर्ट में पेश किए जाएं। सिविल लाइन थाना पुलिस को भी पालन करने को कहा गया है। अदालत का कहना है कि वीडियो देखे बिना तथ्यों का सही मूल्यांकन कठिन है। पेश किए जाने वाले वीडियो में गोविंद सिंह गुर्जर का आत्महत्या से पहले का वीडियो भी शामिल है।
आरोपों में घिरे हैं पूर्व विधायक
शशांक भार्गव के खिलाफ विदिशा जिले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण का मामला दर्ज है। आरोप है कि आर्थिक लेन-देन और कथित मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर गोविन्द सिंह गुर्जर ने आत्महत्या की थी। जांच के दौरान पुलिस ने वायरल वीडियो, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और परिजनों के बयानों को महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया है। इनके आधार पर पूर्व विधायक को आरोपी बनाया गया।
जिला अदालत से पहले ही मिल चुका है झटका
इस मामले में शशांक भार्गव को पहले ही जिला अदालत से राहत नहीं मिल सकी थी। विदिशा की द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। अदालत ने जांच की प्रगति और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार किया था। इसके बाद भार्गव ने हाईकोर्ट का रुख किया था।
अब 24 जून की सुनवाई पर टिकी निगाहें
मामले में अब अगली सुनवाई 24 जून 2026 को निर्धारित की गई है। उस दिन राज्य सरकार और पुलिस को विवादित वीडियो न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। वीडियो साक्ष्यों के अवलोकन के बाद ही हाईकोर्ट शशांक भार्गव की अग्रिम जमानत याचिका पर अंतिम निर्णय लेगा। इसलिए कानूनी और राजनीतिक दोनों हलकों की नजरें अब 24 जून की सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
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