फर्जी नियुक्ति पत्र से IFS, बैंक और रेलवे में नौकरी: MP में फैला ठगी का नेटवर्क
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल में प्रमिला तिवारी को अटल आवास ठगी मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
- प्रमिला पर फर्जी नियुक्ति पत्र देकर IFS, बैंक क्लर्क और रेलवे में नौकरी देने की बात साने आई है।
- भोपाल, बैतूल, जबलपुर, रीवा और सतना में सात से ज्यादा पीड़ित सामने आए हैं।
- सरकारी दफ्तरों के बाहर खड़े होकर भरोसा जीतती थी, फिर लाखों रुपए ठगती थी।
- टीटी नगर पुलिस ने फर्जी रसीद और अलॉटमेंट लेटर की जांच के बाद गिरफ्तारी की है।
हर जिले में अलग झांसा, तरीका एक
भोपाल की प्रमिला तिवारी का नाम पहले अटल आवास ठगी में सामने आया था। वहीं, जब पुलिस ने जांच शुरू की तो कई और बड़े खुलासे हुए है। वह सरकारी विभागों के फर्जी नियुक्ति पत्र बनाकर बेरोजगारों को आईएफएस अधिकारी, बैंक क्लर्क और रेलवे कर्मचारी बनाने का झांसा देती थी।
उसका नेटवर्क भोपाल से लेकर रीवा, जबलपुर, बैतूल और सतना तक फैला था। पीड़ित एस, वन विभाग, नगर निगम और रेलवे के नाम पर लाखों रुपए की ठगी के बाद पुलिस के पास पहुंचे हैं।
भोपाल में नवीन और राजीव से ऐसे की ठगी
भोपाल के नवीन सोंधिया को वन विभाग का कथित नियुक्ति पत्र दिया गया था। इसमें उन्हें 1997 बैच का आईएफएस अधिकारी और मुख्य वन संरक्षक पद पर दर्शाया गया था। बाद में रतलाम रेलवे मंडल में नौकरी दिलाने का नया झांसा दिया गया।
एक और पीड़ित राजीव विश्वकर्मा से एसबीआई (State Bank of India) की मुंबई शाखा में बैंक क्लर्क की नौकरी का वादा किया गया था। उनसे दो लाख 50 हजार रुपए लेकर निगम सर्वेयर का फर्जी पत्र थमा दिया गया था। राजीव के मुताबिक एसबीआई मुंबई के नाम से कथित नियुक्ति पत्र सौंपा गया था।
रीवा में पीडब्ल्यूडी मंत्री के फर्जी हस्ताक्षर
रीवा में राकेश दुबे की बेटी को सरकारी नौकरी का भरोसा दिया गया था। उनसे पांच लाख रुपए लिए गए थे। इसके बाद पीडब्ल्यूडी (Public Works Department) मंत्री की हस्ताक्षर वाला एक कथित नियुक्ति पत्र सौंपा गया था।
जबलपुर में हिमांशु और गिरिराज को वन विभाग में नौकरी के नाम पर कथित ज्वाइनिंग लेटर दिए गए थे। बैतूल में राधा को रेलवे में एलडीसी (Lower Division Clerk) पद का नियुक्ति पत्र दिया गया था। उस पत्र पर 07 सितंबर 2025 की तारीख थी।
सतना में वित्त मंत्रालय के नाम पर ठगी
सतना के रविशंकर शर्मा को वित्त मंत्रालय का क्लर्क ट्रेनिंग लेटर दिया गया था। यह पत्र 26 अगस्त 2025 को जारी हुआ दर्शाया गया था। यानी यह गिरोह कई महीनों से सक्रिय था और अलग-अलग राज्य और केंद्रीय विभागों के नाम पर ठगी कर रहा था।
ऐसे बनाती थी शिकार
ठगी का तरीका बेहद शातिर था। पहले फोन पर या सरकारी दफ्तरों के बाहर युवाओं से संपर्क किया जाता था। उनकी शैक्षिक जानकारी लेकर नौकरी का भरोसा दिलाया जाता था। फिर उन्हें डेढ़ महीने तक सरकारी दफ्तरों के बाहर घुमाया जाता था। इससे पीड़ित को लगता था कि काम सच में हो रहा है।
पैसे लेने के बाद फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया जाता था। जब तक पीड़ित को असलियत पता चलती, तब तक लाखों रुपए जा चुके होते थे।
पीड़ित की जुबानी
फार्मेसी के छात्र राहुल विश्वकर्मा ने बताया कि प्रमिला ने फोन कर हमीदिया अस्पताल में नौकरी का भरोसा दिया था। उनसे दो लाख 50 हजार रुपए लिए और बाद में वन विभाग का फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया था।
पुलिस बोली, जांच जारी है
टीटी नगर के आरटीआई गौरव सिंह ने बताया कि सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी की कई शिकायतें मिली थीं। एक आरोपी गिरफ्तार हो चुका है। अन्य की तलाश जारी है और दस्तावेजों की जांच चल रही है।
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