फर्जी बैंक खाता गिरोह पकड़ा, 1000 रुपए में अकाउंट खोलकर ओडिशा-बैंगलोर के ठगों को बेचते थे

Jitendra Shrivastava | Apr 19, 2026, 20:45 IST
Photograph: (THESOOTR)
ASHOKNAGAR. अशोकनगर में फर्जी बैंक खाता खुलवाकर ठगों को बेचने वाला गिरोह पकड़ा। चार आरोपी गिरफ्तार। 1000 में खाता खुलवाकर 10 हजार में बेचते थे।

News In Short

  • 1000 रुपए देकर ग्रामीणों के नाम खाते खुलवाए।
  • फर्जी खाते 10 हजार में ठगों को बेचे जाते थे।
  • आरोपी दूसरे का मोबाइल नंबर खाते से जोड़ते थे।
  • गिरोह 3-4 महीने से सक्रिय था, चार गिरफ्तार।
  • IT एक्ट और BNS की धाराओं में मामला दर्ज हुआ।

News In Detail

अशोकनगर में साइबर ठगी (Cyber Fraud) का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक गिरोह ग्रामीणों को मामूली पैसों का लालच देकर उनके नाम पर फर्जी बैंक खाते (Fake Bank Accounts) खुलवाता था। फिर इन खातों को ओडिशा और बैंगलोर के ठगों को 10 हजार रुपए प्रति खाते में बेचा जाता था। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।



साइबर गिरोह का भंडाफोड़

अशोकनगर पुलिस ने एक बड़े साइबर अपराध (Cyber Crime) गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह फर्जी बैंक खाते (Fake Bank Accounts) खुलवाकर ठगों को बेचता था। पुलिस ने रविवार को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।



कोतवाली थाना प्रभारी रवि प्रताप सिंह चौहान ने मामले की जानकारी दी। आरोपी भोले-भाले ग्रामीणों को लालच देकर फंसाते थे। उन्हें खाता खुलवाने के बदले 1000 रुपए दिए जाते थे। फिर इन खातों को झारखंड और कर्नाटक के ठगों को बेचा जाता था। प्रति खाते की कीमत 10 हजार रुपए थी।



गिरोह के चार सदस्यों की भूमिका

गिरोह में चारों आरोपियों की अलग-अलग भूमिका थी। भौंरा काछी गांव निवासी करन अहिरवार लोगों को फंसाकर लाता था। दुबे कॉलोनी निवासी सुयश सिंघई के पास एक कियोस्क सेंटर था। वहीं फर्जी बैंक खाते (Fake Bank Accounts) खोले जाते थे। गुना निवासी जितेंद्र गिरी और प्रवल प्रताप सिंह खातों के QR कोड जनरेट करते थे।



इस पूरे नेटवर्क को बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था। पुलिस ने सभी चारों को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। प्रारंभिक जांच में गिरोह 3 से 4 महीने से सक्रिय था।



पीड़ित रौनक की शिकायत से खुला राज

इस पूरे मामले का खुलासा 20 वर्षीय रौनक यादव की शिकायत से हुआ। रौनक 7 अप्रैल को शंकरपुर-मगरदा चौराहे पर खड़ा था। वहां उसका परिचित अमित यादव मिला और खाता खुलवाने की बात बताई।



आरोपी करन अहिरवार अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा। उन्होंने रौनक का आधार और पैन कार्ड लिया। दस्तावेजों की फोटो खींचकर अपलोड कर दी। रौनक के खाते से उसका अपना मोबाइल नंबर नहीं जोड़ा गया। किसी अन्य व्यक्ति का नंबर खाते से लिंक कर दिया गया।



दस्तावेज और पासबुक भी नहीं दी

रौनक को बदले में केवल 500 रुपए दिए गए। बाकी 500 रुपए बाद में देने का वादा किया गया। उसे खाते से संबंधित कोई दस्तावेज या पासबुक नहीं दी गई। जब उसने पासबुक मांगी तो आरोपियों ने टालमटोल की। उन्होंने बताया कि खाता किसी अन्य व्यक्ति को दे दिया गया है।



यह साइबर ठगी (Cyber Fraud) का एक नया और खतरनाक तरीका है। पीड़ित को तब समझ आया जब उसने जांच की। इसके बाद उसने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई।



ग्रामीणों पर पड़ता है गंभीर असर

फर्जी बैंक खाता (Fake Bank Account) बनवाना ग्रामीणों के लिए बहुत खतरनाक है। जब पुलिस को पता चलता है तो उनके खाते फ्रीज हो जाते हैं। वे कानूनी जांच के दायरे में आ जाते हैं। आधार, पैन और बैंक डिटेल्स गिरोह के पास रह जाती हैं।



भविष्य में भी उनके नाम पर फर्जीवाड़ा हो सकता है। कई बार इन खातों का इस्तेमाल लोन फ्रॉड में होता है। गरीबों के नाम पर लोन लेकर गिरोह पैसा निकाल लेता है। बाद में रिकवरी एजेंट पीड़ित के घर पहुंच जाते हैं।



IT एक्ट में दर्ज हुआ मामला

पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया। भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 316(5) लगाई गई। साथ ही IT Act (आईटी एक्ट) की धारा 66(C) भी लगाई गई है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।



पुलिस को आशंका है कि और भी कई खाते खोले गए होंगे। उन खातों के दुरुपयोग की भी जांच हो रही है। पुलिस ने आम लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है। किसी के कहने पर अपने दस्तावेज न दें और खाता न खुलवाएं।



साइबर ठगी से कैसे बचें

अगर कोई खाता खुलवाने के बदले पैसे देने का ऑफर करे तो सतर्क रहें। यह साइबर अपराध (Cyber Crime) का जाल हो सकता है। अपना आधार, पैन और बैंक विवरण किसी अनजान को न दें। किसी भी संदिग्ध ऑफर की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।



साइबर सेल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। डिजिटल जागरूकता (Digital Awareness) ही सबसे बड़ा बचाव है। ग्रामीण इलाकों में इस तरह के गिरोह सक्रिय रहते हैं। सतर्कता और जागरूकता से इस जाल से बचा जा सकता है।



क्यों खोले जाते हैं ऐसे खाते?

अक्सर ग्रामीण इलाकों के लोग पढ़े-लिखे नहीं होते या डिजिटल दुनिया से अपरिचित होते हैं, और ठग उन्हें कुछ पैसे का लालच देकर आसानी से फंसा लेते हैं।



इन खातों को धोखेबाज लोग पुलिस और बैंक से बचने के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह "मैन-मूल अकाउंट" (फर्जी या बदलने वाले नाम से खोले गए खाते) के रूप में होते हैं, ताकि पैसों का ट्रैक करना मुश्किल हो।



किसलिए होता है खातों का इस्तेमाल?

धोखाधड़ी के जरिए सोशल मीडिया, ऐप्स या ऑनलाइन से धोखेबाज पैसे इन खातों में जमा कराते हैं, और फिर उन्हें जल्दी से दूसरे खातों में ट्रांसफर करके विदेश या अन्य जगह भेज देते हैं।



इन खातों का उपयोग "लोन फ्रॉड" या "माइक्रो-फाइनेंस/चिटफंड" जैसे धोखाधड़ी के लिए भी किया जाता है, जिसमें गरीबों के नाम पर लोन लिया जाता है, और पैसा ठगों द्वारा निकाल लिया जाता है। बाद में लोन की रिकवरी महिलाओं या ग्रामीणों के घर पहुंचती है।



ग्रामीणों पर इसका क्या असर होता है?

जब पुलिस या बैंक को पता चलता है कि उस खाते में धोखाधड़ी का लेन-देन हुआ है, तो उन खातों को फ्रीज कर दिया जाता है, और ग्रामीण कानूनी जांच के दायरे में आ जाते हैं। हालांकि, अक्सर वे खुद भी धोखा खाने वाले होते हैं।



इन ग्रामीणों का आधार, पैन और बैंक डिटेल्स धोखेबाजों के पास रहते हैं, जिससे भविष्य में उनके नाम पर और फर्जीवाड़े या लोन फ्रॉड किए जा सकते हैं।



अगर आप या कोई ग्रामीण "किसी के लिए खाता खुलवा दो, तुम्हें कुछ हजार मिलेंगे" जैसे ऑफर पर विचार कर रहे हैं, तो इसे तुरंत बंद कर दें और नजदीकी बैंक या साइबर सुरक्षा हेल्पलाइन से सलाह लें।



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