5 स्टार होटल, महंगी कार और iPhone का शौक! ऐसे ठाठ से जीती थी फर्जी IAS तृप्ति सिंह
दरअसल कुछ दिनों से फर्जी IAS तृप्ति सिंह का मामला प्रदेश भर में गरमाया हुआ है। तृप्ति ने कई लोगों को खुद को सरकारी अधिकारी बताकर अपना निशाना बनाया।
साथ ही तृप्ति ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं से मोटी रकम वसूल ली। अब जाकर पुलिस जांच में उसका पूरा ठगी साम्राज्य खुलकर सामने आया है।
बता दें कि तृप्ति सिंह खुद को IAS अधिकारी बताती थी। इतना ही नहीं वह टूरिज्म विभाग की एडिशनल डायरेक्टर होने का भी दावा करती थी।
इसी रौब में उसने चंदेरी के चार युवाओं को सरकारी नौकरी का सपना दिखाया। बदले में उसने उनसे कुल 9.80 लाख रुपए ऐंठ लिए।
कैसे खुला तृप्ति का राज
चंदेरी थाना प्रभारी प्रशांत यादव ने इस मामले की पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 23 अगस्त को जयकुमार कोली और उनके साथियों ने शिकायत दर्ज कराई थी।
इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने फर्जी आईएएस अधिकारी तृप्ति सिंह और उसके भाई सुधांशु को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस को अदालत से तीन दिन का रिमांड मिला।
रिमांड मिलते ही जांच टीम आरोपियों को लेकर भोपाल पहुंची। वहां उनके ठिकानों पर गहन तलाशी ली गई। इसी तलाशी में पुलिस को कई चौंकाने वाले सबूत हाथ लगे। इन सबूतों से साफ हुआ कि ठगी के पैसों से आरोपी कितनी शानदार जिंदगी जी रही थी।
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भारत सरकार लिखी कार जब्त
जांच के दौरान पुलिस ने अयोध्या नगर, भोपाल निवासी ड्राइवर भूपेंद्र बैरागी को भी गिरफ्तार किया। उसके पास से वह कार भी बरामद हुई, जिस पर भारत सरकार की नेम प्लेट लगी थी।
आरोपी इसी कार का इस्तेमाल कर लोगों पर रौब जमाती थी। यह कार उसके ठगी के खेल का सबसे बड़ा हथियार बन चुकी थी।
पीड़ितों को यकीन दिलाने के लिए यह सरकारी ठाठ-बाट वाली कार अहम भूमिका निभाती थी। युवा इस कार को देखकर आसानी से भरोसा कर लेते थे। पुलिस अब इस कार और ड्राइवर से जुड़े हर एंगल की जांच कर रही है।
सबूत मिटाने की कोशिश आई सामने
पुलिस ने आरोपियों के घर संत आसाराम नगर, बागमुगलिया से भी दस्तावेज जब्त किए। यहां से फरियादियों के दस्तावेजों की छायाप्रतियां बरामद हुईं। थाना प्रभारी के अनुसार मूल दस्तावेज आरोपियों ने संभवतः नष्ट कर दिए हैं। इसी वजह से मामले में सबूत मिटाने की धारा भी जोड़ी गई है।
पुलिस का मानना है कि आरोपी अपने खिलाफ पुख्ता सबूत मिटाना चाहती थी। लेकिन छायाप्रतियां मिलने से जांच में मदद मिली है। अब पुलिस असली दस्तावेजों का पता लगाने में जुटी है।
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आईफोन, फ्लाइट और फाइव स्टार होटल
रिमांड के दौरान जांच टीम ने आरोपी के मायके बागमुगलिया और ससुराल अलकापुरी, दोनों जगह तलाशी ली। यहीं से आरोपी की आलीशान जीवनशैली के सबूत मिले।
पुलिस को महंगे आईफोन की खरीद रसीदें बरामद हुईं। साथ ही फ्लाइट के टिकट और अन्य दस्तावेज भी मिले।
जांच में सामने आया कि तृप्ति सिंह महंगे फाइव स्टार होटलों में ठहरने की शौकीन थी। ठगी के रुपयों से ही वह देश भर में हवाई यात्राएं करती थी।
पुलिस को उसके बड़े होटलों में ठहरने के भी कई सबूत मिले हैं। यह सारी ऐशो-आराम की जिंदगी चंदेरी के मेहनतकश युवाओं की गाढ़ी कमाई से चल रही थी।
जमानत खारिज, तीनों जेल में
पुलिस को इस मामले में नए सबूत मिलने के बाद प्रकरण और गंभीर हो गया। गुरुवार को रिमांड अवधि खत्म होते ही तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया।
आरोपियों तृप्तिसिंह, सुधांशुसिंह और ड्राइवर भूपेंद्र बैरागी के परिजनों ने जमानत के लिए आवेदन दिया था। लेकिन अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह आवेदन खारिज कर दिया।
तीनों आरोपियों को अब जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी रहेगी और और भी खुलासे हो सकते हैं।
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