भोपाल-इंदौर में फर्जी केवाईसी से की धोखाधड़ी, 58 करोड़ की हेराफेरी उजागर
News in Short
- ईडी ने 70 करोड़ के बैंक फ्रॉड केस में जब्त की 7.76 करोड़ की संपत्ति।
- सीबीआई और ईओडब्ल्यू की एफआईआर के आधार पर जारी है जांच।
- फर्जी केवाईसी से बैंक को धोखा देकर पहुंचाया गया 58 करोड़ का नुकसान।
- समूह से जुड़ी कंपनियों में रुपए ट्रांसफर कर रची गई हेराफेरी की साजिश।
- अब तक दो बार में ईडी द्वारा कंपनी की 18 करोड़ की संपत्ति की गई हैं जब्त।
News in Detail
सीबीआई और ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज केस में ईडी ने रुचि स्टीलटेक रिसोर्सेज पर शिकंजा कसा है। प्रवर्तन निदेशालय ने भोपाल और इंदौर में कंपनी द्वारा फर्जी दस्तावेजों के सहारे बैंक खाते खोलने की जांच तेज कर दी है।
वहीं, करोड़ों रुपए हवाला के जरिए ट्रांसफर करने और बैंक को 58 करोड़ का चूना लगाने पर 7.76 करोड़ की संपत्ति अटैच की है। ईडी इससे पहले भी मनी लॉड्रिंग केस में कंपनी की 10.15 करोड़ की संपत्ति जब्त कर चुकी है।
प्रवर्तन निदेशालय के इंदौर सब डिवीजन कार्यालय ने मनी लॉड्रिंग केस में मेसर्स रुचि एक्वनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर कार्रवाई की है। कंपनी की नई पहचान स्टीलटेक रिसोर्सेज लिमिटेड के रूप में हो गई है।
ईडी ने दूसरी बार पड़ताल के बाद कंपनी की 7.76 करोड़ रुपए कीमत संपत्तियां अटैच की हैं। इससे पहले भी ईडी 10.15 करोड़ की संपत्ति जब्त कर चुका है। जिन संपत्तियां को जब्त किया गया है वे रजिस्टर्ड प्लॉट और मकान के रूप में है।
सीबीआई- ईओडब्ल्यू ने दर्ज किया था केस
ईडी ने स्टीलटेक रिसोर्सेज पर यह कार्रवाई सीबीआई और ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज मामले के आधार पर की है। कंपनी पर कंपनी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता, 1860 के तहत मामला दर्ज किया गया था। जिसमें कंपनी पर यूको बैंक को 58 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के आरोप हैं। जब बैंक से धोखाधड़ी की गई तब कंपनी मेसर्स रुचि एक्वनी के रूप में काम कर रही थी। अब उसकी पहचान स्टीलटेक रिसोर्सेज के रूप में बदली जा चुकी है।
लेटर ऑफ क्रेडिट से लगाया बैंक को चूना
ईडी कार्रवाईकी जांच में सामने आया था कि कंपनी ने यूको बैंक को फर्जीवाड़े के सहारे आर्थिक नुकसान पहुंचाया। फर्जी लेटर ऑफ क्रेडिट थमाकर बैंक से क्रेडिट सुविधा ली गई जबकि दर्शाया गया कारोबार था ही नहीं।
बैंक से लिए गए 58 करोड़ रुपए दूसरे खातों ट्रांसफर किए गए। कंपनी से जुड़ी दूसरी फर्मों और संस्थाओं में अलग- अलग माध्यमों से राशि ट्रांसफर की गई। इसके लिए हवाला का भी उपयोग कर झांसा देने की कोशिश की गई।
धोखाधड़ी के धन से खरीदी गई संपत्ति
कंपनी ने बैंक को झांसा देकर जो राशि ली थी उसको पहले दूसरी फर्म, संस्थाओं के नाम पर कई बैंक खातों में जमा कराया गया। इसी राशि का उपयोग बाद में संपत्तियां खरीदने में किया गया।
जांच में खुलासा होने के बाद बैंक धोखाधड़ी से लिए धन से खरीदी गई संपत्तियां जब्त करने का सिलसिला फिलहाल जारी है। प्रवर्तन निदेशालय ने इसी के तहत संपत्ति जब्त करने की यह दूसरी कार्रवाई की है। सीबीआई और ईओडब्ल्यू की एफआईआर के बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल जोड़ा है।
ये खबरें भी पढ़ें...
राजा रघुवंशी हत्याकांड: सोनम रघुवंशी को मिली जमानत, राजा के बड़े भाई विपिन ने की पुष्टि
दिग्विजय ने सिंधिया के 'प्याज' वाले टिप्स पर कसा तंज, कहा- AC कार छोड़, जेब में रखो प्याज
मोहन कैबिनेट ने छात्रवृत्ति राशि में की बढ़ोतरी, ओबीसी के छात्रों को अब मिलेंगे 10 हजार प्रति माह