MP में फर्जी पासपोर्ट कांड: जड़ें पाकिस्तान बॉर्डर तक, 15 पुलिसकर्मियों की पहचान

Jitendra Shrivastava | Sept 13, 2026, 20:18 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. एमपी के डबरा से शुरू फर्जी पासपोर्ट कांड की जड़ें अब पाकिस्तान सीमा तक पहुंचीं। एसटीएफ ने मुख्य आरोपी जॉय चौधरी से पूछताछ में 200 संदिग्ध पासपोर्ट का खुलासा किया, जांच में धर्म की आड़ का इस्तेमाल भी सामने आया।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • फर्जी पासपोर्ट कांड की जड़ें पाकिस्तान तक पहुंचीं।
  • धर्म की आड़ में फर्जी पासपोर्ट का खेल चलता था।
  • बांग्लादेशी घुसपैठिया भंते बनकर सिंडिकेट चलाता था।
  • अब तक 200 संदिग्ध पासपोर्ट एसटीएफ के रडार पर आए।
  • 15 पुलिसकर्मियों को एसटीएफ का नोटिस मिलेगा।

एमपी के डबरा से शुरू फर्जी पासपोर्ट कांड की जड़ें पांच जिलों में फैली मिलीं। नेटवर्क धर्म की आड़ में बौद्ध भिक्षु बनकर चलाया जा रहा था। अब जांच में इसकी कड़ियां पाकिस्तान सीमा तक जुड़ती दिखीं।



एसटीएफ ने मुख्य आरोपी जॉय चौधरी से पूछताछ में 200 संदिग्ध पासपोर्ट का खुलासा किया। मामले में अब तक तीन आरोपी गिरफ्तार होकर ग्वालियर जेल भेजे जा चुके हैं।



खुलासा हुआ है कि इस नेटवर्क के पीछे मुख्य सूत्रधार कुछ स्थानीय व्यक्ति और दलाल थे। जांच के मुताबिक चीनोर, पुरा बनवार का एक व्यक्ति पहले बहुजन विचारधारा से जुड़ा सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता था। बाद में उसने अपनी पहचान बदलकर बौद्ध भिक्षु की उपाधि धारण कर ली।



इसी तरह जनकगंज, माधौनगर के एक अन्य व्यक्ति ने भी भेष बदलकर बौद्ध भिक्षु की एक और उपाधि अपना ली। भिक्षु के रूप में स्थापित होने से सिमरिया स्थित बुद्ध विहार और अंबेडकर पार्क में इनका आना-जाना सामान्य और संदेह से परे हो गया था।



जांच के मुताबिक इसी का फायदा उठाकर इन दोनों ने एक बांग्लादेशी घुसपैठिए और पूरे मामले के मास्टरमाइंड के साथ मिलकर डबरा के पते पर फर्जी पासपोर्ट तैयार करवाने का जिम्मा ले लिया।



अब तक इतने आरोपी गिरफ्तार

इस मामले में मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर ग्वालियर जेल भेजा जा चुका है। महाराष्ट्र से पकड़े गए एक अन्य आरोपी को एसटीएफ ने रिमांड पर लिया है। उससे पूरे नेटवर्क और फर्जी पासपोर्ट बनाने के तरीके को लेकर पूछताछ जारी है।



fake passport


जांच में किन बातों पर फोकस

एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और मार्कशीट बनाने में किन लोगों ने मदद की। यह भी जांच हो रही है कि संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को बिना पहचान के पनाह क्यों दी गई।



यह भी पता लगाया जा रहा है कि किन संस्थाओं के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इन पासपोर्ट के जरिए आरोपी किन-किन देशों की यात्रा कर चुके हैं।



दस्तावेजों का सत्यापन करने वाले पुलिसकर्मियों को भी नोटिस देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। एसटीएफ भोपाल एसपी राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि सिंडिकेट के फरार मददगारों, संदिग्ध शिक्षकों और सह-साजिशकर्ताओं की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।



बौद्ध अनुयायी बनकर की विदेश यात्राएं

जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी पासपोर्ट हासिल करने वाले कुछ लोग खुद को बौद्ध अनुयायी बताते थे। इसी पहचान के आधार पर उन्होंने कई देशों की यात्रा की। जांच एजेंसी को इनके थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान जाने के सुराग मिले हैं।



एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन विदेश यात्राओं के पीछे सिर्फ फर्जी पहचान का इस्तेमाल था, या इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क भी काम कर रहा था।



सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल

एक ही पते से दर्जनों पासपोर्ट जारी होना गंभीर सवाल खड़े करता है। सामान्य तौर पर पुलिस सत्यापन में ऐसी गड़बड़ी पकड़ में आनी चाहिए थी, लेकिन यह मामला सालों तक दबा रहा।



एसटीएफ अब जांच कर रही है कि सत्यापन प्रक्रिया में चूक कहां हुई। इसमें शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। लापरवाही या मिलीभगत साबित होने पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।



एसटीएफ एसपी राहुल लोढ़ा के मुताबिक आरोपियों से पूछताछ जारी है। पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। असम गई टीम की रिपोर्ट के बाद मामले में और खुलासे हो सकते हैं। यह मामला सिर्फ फर्जी दस्तावेजों तक सीमित नहीं, इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलू भी शामिल हो सकते हैं।



जड़ें पाकिस्तान सीमा तक पहुंचीं

डबरा के सिमरिया से शुरू फर्जी पासपोर्ट कांड की जड़ें अब देश की अंतरराष्ट्रीय सीमा तक जा पहुंची हैं। एसटीएफ की गिरफ्त में आए मुख्य आरोपी जॉय चौधरी से रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में देश की सुरक्षा को हिला देने वाले खुलासे हुए हैं।



जांच एजेंसियों ने 130 नए संदिग्ध पासपोर्ट को अपने रडार पर ले लिया है। इस सिंडिकेट का सबसे खतरनाक पहलू यह उजागर हुआ कि मास्टरमाइंड ने दस्तावेजों में स्थायी पता मध्यप्रदेश के बैतूल का और स्थानीय पता पाकिस्तान सीमा से सटे गुजरात के कच्छ के एक गांव का दर्ज कराया था।



इसके अलावा डबरा के सिमरिया वार्ड-1 का पता भी दर्जनों पासपोर्ट में इस्तेमाल हुआ। अब तक कुल 200 पासपोर्ट संदिग्ध पाए जा चुके हैं। इस अंतरराष्ट्रीय लिंक के सामने आते ही केंद्रीय खुफिया एजेंसी भी सतर्क हो गई हैं।



15 पुलिसकर्मी और नगर निगम कर्मचारियों की पहचान

वहीं आंख मूंदकर सत्यापन करने वाले डबरा, भोपाल और बैतूल के 15 पुलिसकर्मियों और नगर निगम कर्मचारियों की पहचान कर ली गई है। इन्हें सोमवार को एसटीएफ द्वारा नोटिस जारी किए जा रहे हैं।



दस्तावेज सत्यापन, जाली मार्कशीट, आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराने में स्थानीय स्तर पर मदद करने वाले कुछ शिक्षकों के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं।



चंद रुपयों के लालच में इन शिक्षकों ने घुसपैठियों के दस्तावेज तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। एसटीएफ अब कमेटियों के पुराने रिकॉर्ड, संदिग्ध शिक्षकों के बैंक खातों और कच्छ बॉर्डर से जुड़े पतों के बीच की कड़ियों को खंगाल रही है।



सिमरिया के बुद्ध विहार में जुटते थे संदिग्ध, भंते बने थे ढाल

डबरा नगर पालिका के वार्ड-1 स्थित सिमरिया टेकरी, तथागत बुद्ध विहार और अंबेडकर पार्क के पते पर थोक में पासपोर्ट जारी कराने के पीछे सोची-समझी रणनीति थी।



ग्रामीणों के अनुसार धार्मिक आयोजनों के नाम पर यहां अक्सर बाहरी अनुयायी और संदिग्ध भिक्षु आकर ठहरते थे, लेकिन उनकी असल पहचान की तस्दीक किसी के पास नहीं थी।



बुद्ध विहार में रह रहे संघप्रिय भंते ने बताया कि मास्टरमाइंड रियाज सीधे सामने नहीं आता था। पुराबनवार निवासी गयाप्रसाद, जो भंते बनकर सक्रिय था, और माधौनगर निवासी गुलाबराय लगातार इन गतिविधियों में आगे रहते थे। आशंका है कि रियाज इन्हीं चेहरों को मुखौटा बनाकर पूरा सिंडिकेट ऑपरेट कर रहा था।



FAQ

  1. फर्जी पासपोर्ट कांड की शुरुआत कहां से हुई?
    यह मामला मध्यप्रदेश के डबरा स्थित सिमरिया टेकरी से शुरू हुआ। यहां से फर्जी पासपोर्ट का नेटवर्क धीरे-धीरे पांच जिलों में फैल गया। अब इसकी जड़ें पाकिस्तान सीमा तक जुड़ती मिली हैं।
  2. इस मामले में अब तक कितने पासपोर्ट संदिग्ध पाए गए हैं?
    एसटीएफ की जांच में अब तक कुल 200 पासपोर्ट संदिग्ध पाए गए हैं। हाल की पूछताछ में 130 नए संदिग्ध पासपोर्ट सामने आए। जांच अभी जारी है।
  3. नेटवर्क धर्म की आड़ में कैसे चलाया जा रहा था?
    आरोपियों ने अपनी पहचान बदलकर बौद्ध भिक्षु की उपाधि धारण कर ली थी। इससे बुद्ध विहार और अंबेडकर पार्क में उनका आना-जाना संदेह से परे हो गया। इसी आड़ में फर्जी पासपोर्ट तैयार कराए जाते थे।

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