मध्यप्रदेश की स्लीपर बसों में अब फायर सेफ्टी कवच, FDSS सिस्टम हुआ अनिवार्य
मध्यप्रदेश समेत देशभर में स्लीपर कोच बसों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सड़क परिवहन मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है। अब स्लीपर कोच बसों (Sleeper Coach Buses) में एफडीएसएस सिस्टम (FDSS System – Fire Detection and Suppression System) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
मध्यप्रदेश परिवहन विभाग ने भी इस निर्देश को सख्ती से लागू करते हुए साफ कर दिया है कि अब प्रदेश में वही स्लीपर कोच बसें रजिस्टर होंगी जिनमें FDSS सिस्टम (Fire Detection and Suppression System) लगा होगा।
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य बसों में आग लगने की घटनाओं को समय रहते पहचानना और तुरंत नियंत्रित करना है ताकि यात्रियों की जान को खतरा न हो। हाल ही में प्रदेश में हुए दो बड़े बस हादसों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी। इन घटनाओं के बाद सुरक्षा उपायों को और सख्त करने की जरूरत महसूस की गई।
परिवहन आयुक्त उमेश जोगा के अनुसार, जो नई स्लीपर कोच बसें सड़कों पर उतरेंगी उनमें एफडीएसएस सिस्टम होना जरूरी होगा, तभी उनका रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। वहीं जो बसें पहले से संचालित हो रही हैं, उनकी भी सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जाएगी। इसके लिए प्रदेश के सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
FDSS सिस्टम क्या है?
एफडीएसएस सिस्टम (FDSS System – Fire Detection and Suppression System) एक आधुनिक तकनीक है, जो वाहनों में आग लगने की स्थिति को तुरंत पहचानकर उसे नियंत्रित करने का काम करती है। यह सिस्टम मुख्य रूप से बस के इंजन, इलेक्ट्रिकल वायरिंग और अन्य संवेदनशील हिस्सों में लगाया जाता है, जहां आग लगने का खतरा ज्यादा होता है।
FDSS सिस्टम कैसे करता है काम?
1. फायर डिटेक्शन (Fire Detection – आग का पता लगाना)
इस सिस्टम में हीट सेंसर और स्मोक सेंसर लगाए जाते हैं। जैसे ही किसी हिस्से का तापमान अचानक बढ़ता है या धुआं बनता है, सेंसर तुरंत इसे पहचान लेते हैं।
2. अलार्म सिस्टम (Alarm System – चेतावनी)
जैसे ही आग का संकेत मिलता है, सिस्टम तुरंत ड्राइवर को अलार्म के जरिए चेतावनी देता है। इससे ड्राइवर समय रहते बस रोककर यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल सकता है।
3. फायर सप्रेशन (Fire Suppression – आग पर नियंत्रण)
FDSS सिस्टम में लगे फायर एक्सटिंग्विशिंग केमिकल या गैस स्वतः सक्रिय होकर आग को बुझाने का काम करते हैं। इससे आग फैलने से पहले ही नियंत्रित हो जाती है।
क्यों जरूरी हुआ FDSS सिस्टम?
पिछले कुछ वर्षों में देशभर में कई स्लीपर बसों में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। इनमें कई बार यात्रियों को गंभीर नुकसान भी हुआ है।स्लीपर कोच बसों में अक्सर लोग सो रहे होते हैं, इसलिए आग लगने की स्थिति में उन्हें समय पर जानकारी नहीं मिल पाती। इसी वजह से फायर डिटेक्शन और सप्रेशन सिस्टम (Fire Detection and Suppression System) को अनिवार्य किया गया है।
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मध्यप्रदेश में दो बड़े हादसे, जिसने बढ़ाई चिंता
अशोकनगर में चलती बस में लगी आग
मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में इसागढ़ रोड पर बामनावर गांव के पास एक चलती स्लीपर बस में अचानक आग लग गई। यह बस पिचौर से इंदौर की ओर जा रही थी और उसमें बड़ी संख्या में यात्री सवार थे। अचानक बस के पिछले हिस्से से धुआं और लपटें उठने लगीं। आग लगते ही बस में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि ड्राइवर की सूझबूझ से बस को तुरंत रोक दिया गया और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।स्थानीय ग्रामीण भी मौके पर पहुंचे और राहत कार्य में मदद की। सूचना मिलने पर दमकल और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जलकर नष्ट हो चुकी थी।
मैहर में भी जलकर राख हुई बस
इसी तरह मैहर जिले के नादन थाना क्षेत्र में कटनी से रीवा जा रही एक बस में अचानक आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में पूरी बस जलकर राख हो गई। बस में मौजूद ड्राइवर और दो हेल्परों ने खिड़की और दरवाजों से कूदकर अपनी जान बचाई। इस घटना ने बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए।
भारत में बस सुरक्षा नियमों पर बढ़ता फोकस
भारत में सड़क हादसों की संख्या को कम करने के लिए सरकार लगातार नए नियम लागू कर रही है। बसों में GPS ट्रैकिंग, स्पीड गवर्नर, इमरजेंसी एग्जिट और अब FDSS सिस्टम (Fire Detection and Suppression System) जैसे नियम यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में बड़े कदम माने जा रहे हैं।
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