खाद की लाइन खत्म या नया सिस्टम शुरू? ई-विकास पोर्टल पर किसानों की असली परीक्षा

Ramanand Tiwari | Apr 27, 2026, 22:54 IST
fertilizer line
मध्य प्रदेश में ई-विकास पोर्टल लागू किया गया है, जो खाद वितरण में पारदर्शिता लाने का दावा करता है। हालांकि, 50 बोरी की लिमिट और तकनीकी समस्याएं किसान की असली परीक्षा बन सकती हैं।

हर सीजन में खाद के लिए लंबी लाइनें, धक्का-मुक्की और विवाद होते थे। अब सरकार ने इसे खत्म करने का दावा किया है। पूरे मध्यप्रदेश में ई-विकास पोर्टल लागू हो रहा है। सिस्टम शुरू हो गया है, लेकिन असली सवाल यही है क्या इससे खाद की किल्लत खत्म होगी या सिर्फ तरीका बदलेगा?



क्या है ई-विकास पोर्टल?

सरकार ने पहले जबलपुर, शाजापुर और विदिशा में इसका ट्रायल किया था। रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो अब इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। अब किसान को जमीन और फसल के हिसाब से ही खाद मिलेगा यानी मनमानी खरीद पर रोक लगेगी।



कैसे मिलेगा खाद?

  • किसान को ऑनलाइन टोकन जनरेट करना होगा।
  • टोकन की वैधता 72 घंटे (3 दिन) रहेगी।
  • सहकारी समिति के सदस्य को उसी दुकान का टोकन मिलेगा।
  • गैर-सदस्य को दूसरी दुकानों के विकल्प दिए जाएंगे।
  • एक महीने में अधिकतम 50 बोरी खाद ही मिल सकेगी।
  • OTP के जरिए रजिस्ट्रेशन जरूरी।

सिस्टम की खास बातें

लंबी लाइनों और भीड़ से राहत मिलने लगी।


वितरण में पारदर्शिता आई।


स्टॉक की जानकारी ऑनलाइन अपडेट हो रही है।


मांग और सप्लाई का बैलेंस बनाना आसान।


केंद्र सरकार भी इस मॉडल को अपनाने की तैयारी में।



जमीन पर क्या बदला?

पहले जहां खाद केंद्रों पर घंटों इंतजार करना पड़ता था, अब किसान समय स्लॉट के हिसाब से पहुंच रहे हैं। इससे कानून-व्यवस्था की समस्या भी कम हुई है और पुलिस तैनाती की जरूरत घटी है। लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। 50 बोरी की लिमिट बड़े किसानों के लिए चुनौती बन रही है। जिनकी जमीन पोर्टल पर अपडेट नहीं है, उन्हें अब भी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इंटरनेट और तकनीक की समझ हर किसान के पास नहीं है। टोकन खत्म होने या सर्वर स्लो होने पर फिर वही परेशानी शुरू हो जाती है।



क्या सच में खत्म होगी किल्लत?

हर साल खरीफ और रबी सीजन में खाद की कमी की खबरें आती रही हैं। सरकार कह रही है कि इस बार पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन यूरिया की अनियमित सप्लाई अब भी चिंता का कारण बनी हुई है।



स्टॉक की स्थिति (सरकारी आंकड़े)


यूरिया: 5.75 लाख टन


डीएपी: 5.25 लाख टन


सिंगल सुपर फास्फेट: 3.75 लाख टन


कुल भंडारण: करीब 8 लाख टन (लक्ष्य 10 लाख टन)



कुछ राहत के प्रावधान भी

बुजुर्ग, दिव्यांग या बटाईदार किसान किसी और को अधिकृत कर सकते हैं। जमीन रिकॉर्ड में समस्या हो तो SDM के जरिए टोकन बन सकता है।



कमी और कालाबाजारी पर लगाम लगेगी?

ई-विकास पोर्टल ने एक नई शुरुआत जरूर की है और कई जगहों पर राहत भी मिली है। लेकिन असली सफलता तभी मानी जाएगी जब किसान को समय पर, पर्याप्त और बिना झंझट के खाद मिल सके। फिलहाल तस्वीर आधी साफ है। लाइन तो कम हुई है, लेकिन सवाल अभी भी बाकी हैं।



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