बिस्किट, साबुन और तेल के जल्द बढ़ेंगे दाम! FMCG कंपनियों ने की तैयारी
समझें क्या है पूरा मामला...
- अब बिस्किट-साबुन खरीदना पड़ेगा महंगा, तैयार रहिए।
- ₹5 और ₹10 के पैकेट में मिलेगा कम सामान।
- FMCG कंपनियों का बड़ा फैसला, बढ़ेंगी कीमतें।
- कच्चा माल महंगा, आपकी जेब पर सीधा असर।
- सितंबर से रोजमर्रा का सामान खरीदना होगा भारी।
देश में एक बार फिर महंगाई की मार पड़ने वाली है। इस बार असर रोजमर्रा के सामान पर होगा। बिस्किट, साबुन और तेल बनाने वाली FMCG कंपनियां दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं।
FMCG कंपनियां सितंबर तिमाही में चुनिंदा उत्पादों के दाम बढ़ाएंगी। कच्चे माल की लागत तेजी से बढ़ी है। चीनी और पाम तेल जैसी चीजें महंगी हुई हैं। ब्रिटानिया अपने ₹5 और ₹10 वाले बिस्किट पैकेट का वजन घटाएगी। इससे आम आदमी को कम दाम में कम सामान मिलेगा।
छोटे पैकेट पर असर
बेकरी उत्पाद बनाने वाली कंपनी ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने साफ कर दिया है। चीनी और पाम तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इस वजह से कंपनी अपने सबसे लोकप्रिय पैकेट का वजन घटाएगी।
कंपनी के प्रबंध निदेशक रक्षित हरगावे के मुताबिक इससे कीमतों में असल में बढ़ोतरी होगी। यह बढ़ोतरी करीब डेढ़ से दो प्रतिशत तक हो सकती है। कंपनी का कहना है कि अगर लागत ऊंची बनी रही तो आगे भी कीमतें बढ़ सकती हैं।
यह तरीका बाजार में 'श्रिंकफ्लेशन' कहलाता है। इसमें दाम वही रहते हैं लेकिन सामान की मात्रा घट जाती है। ग्राहक को इसका पता आसानी से नहीं चलता।
कंपनियों का रुख
सिर्फ ब्रिटानिया कंपनी ही नहीं, बड़ी FMCG (FMCG – Fast Moving Consumer Goods) कंपनियां भी दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं। डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा है कि आगे भी कच्चा माल महंगा रह सकता है। ऐसे में कंपनी चुनिंदा उत्पादों के दाम बढ़ाकर मुनाफा बनाए रखेगी।
हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) का अनुमान है कि इस तिमाही में महंगाई दो से पांच प्रतिशत तक बढ़ सकती है। कंपनी की सीईओ प्रिया नायर ने कहा कि बिक्री पर असर डाले बिना ही कीमतें बढ़ाई जाएंगी। यानी कंपनी संभल-संभलकर कदम उठाएगी।
गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स यानी GCPL (GCPL – Godrej Consumer Products Limited) भी कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनाए हुए है। कंपनी के सीईओ सुधीर सीतापति के अनुसार फिलहाल बड़ी बढ़ोतरी टाली गई है। लेकिन आने वाले समय में जून जैसी बढ़ोतरी फिर देखने को मिल सकती है।
दाम बढ़ने की वजह
कंपनियों ने जून तिमाही में भी दो से पांच प्रतिशत तक दाम बढ़ाए थे। अब मुनाफा बचाने के लिए दो ही रास्ते बचे हैं। पहला, पैक का वजन घटाना। दूसरा, सीधे दाम बढ़ाना।
मानसून की अनिश्चितता भी एक बड़ी वजह है। मौसम से जुड़े जोखिम कंपनियों की चिंता और बढ़ा रहे हैं। कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव भी असर डाल रहा है।
आने वाले महीनों में आम ग्राहक को इसका सीधा असर महसूस होगा। रसोई का बजट बिगड़ सकता है। खासकर छोटे पैकेट खरीदने वाले लोगों पर असर ज्यादा पड़ेगा।
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