एथेनॉल के नाम पर चावल घोटाला: 17 ट्रक जब्त, FCI ने दिल्ली भेजी जांच रिपोर्ट
समझें क्या है पूरा मामला...
- बालाघाट में फोर्टिफाइड चावल घोटाले की जांच तेज हो गई है।
- अब तक 17 ट्रक चावल जब्त किए जा चुके हैं।
- 50 से ज्यादा लोगों से पूछताछ हुई है, 13 नामजद हैं।
- एथेनॉल के नाम पर सरकारी चावल बेचकर मुनाफा कमाया जा रहा था।
- एफसीआई ने जांच रिपोर्ट दिल्ली भेजी, नीति उल्लंघन से इनकार किया है।
चावल घोटाले की पूरी कहानी
मध्यप्रदेश के बालाघाट में फोर्टिफाइड चावल घोटाले की जांच अब तेज हो गई है। जांच एजेंसियों ने अब तक 17 ट्रक चावल जब्त किए हैं। 50 से ज्यादा लोगों से पूछताछ भी हो चुकी है। इनमें से 13 से अधिक लोगों को नामजद किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार कई रसूखदार लोग भी शक के दायरे में हैं। यह पूरा मामला एथेनॉल उत्पादन की आड़ में सरकारी चावल बेचने से जुड़ा है। खरीद-बिक्री के इस खेल में करोड़ों रुपए का हिसाब बताया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद से जांच लगातार आगे बढ़ रही है।
कैसे हुआ खुलासा
यह मामला 3 जून को सामने आया था। वारासिवनी में संचेती राइस मिल के पास एक ट्रक पकड़ा गया था। इसमें सरकारी फोर्टिफाइड चावल भरा हुआ था। यह चावल बालाघाट स्थित एफसीआई (Food Corporation of India) के गोदाम से निकला था। यह चावल एथेनॉल प्लांट (एथेनॉल फैक्ट्री) तक बिना डिस्पैच के भेजा जाना था। असल में इसे तय रेट पर आगे बेच दिया गया था।
सरकारी सिस्टम से यह चावल 2320 रुपए प्रति क्विंटल में निकलता था। इसे आगे 2800 रुपए प्रति क्विंटल में बेचा जा रहा था। इस पूरे नेटवर्क में कमाया गया मुनाफा आपस में बांटा जा रहा था। छोटी सी घटना से शुरू हुई जांच अब बड़े घोटाले में बदल गई है।
मंत्री का बयान अहम
इस मामले में खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत का बयान भी सामने आया है। वे नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री भी हैं। मंत्री ने कलेक्टर की जांच के हवाले से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एफसीआई ने एबीजे एग्रो, बोरगांव को चावल आवंटित किया था।
एबीजे एग्रो एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है। यह आवंटन एथेनॉल उत्पादन के लिए किया गया था। कुल 242.55 क्विंटल यानी 490 बोरी चावल दिया गया था। यह चावल संचेती राइस मिल, वारासिवनी परिसर में मिला।
मंत्री के मुताबिक प्रथम दृष्टया चावल में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी। एबीजे एग्रो के अधिकृत प्रतिनिधि के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। संचेती राइस मिल संचालक के खिलाफ भी एफआईआर (First Information Report) हुई है। यह एफआईआर वारासिवनी थाने में दर्ज कराई गई है।
मंत्री ने आगे कहा कि प्रारंभिक जांच में दो पक्षों की भूमिका सामने आई है। इसमें एथेनॉल निर्माता कंपनी और राइस मिलर दोनों शामिल हैं। उन्होंने बताया कि व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की कोशिश हो रही है। इसके लिए केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखा गया है। मंत्री ने साफ कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि कानून से किसी को छूट नहीं मिलेगी।
एफसीआई की सफाई
इस पूरे मामले में एफसीआई का भी पक्ष सामने आया है। एफसीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट पहले ही दिल्ली भेज दी है। संस्था का कहना है कि आवंटन नीति का उल्लंघन नहीं हुआ है। हालांकि एफसीआई ने यह भी माना है कि निगरानी अभी जारी है। इससे साफ है कि जांच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। एफसीआई और राज्य सरकार के बयानों में हल्का फर्क भी नजर आ रहा है। यह फर्क आने वाले दिनों में जांच की दिशा तय कर सकता है।
आगे की कार्रवाई
जांच एजेंसियां अब बाकी संदिग्धों की तलाश में जुटी हैं। पूछताछ का दायरा भी लगातार बढ़ाया जा रहा है। बालाघाट के अलावा आसपास के जिलों में भी पड़ताल हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जांच एजेंसियां हर सबूत को बारीकी से खंगाल रही हैं। इससे पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है।
इस पूरे मामले ने सरकारी अनाज वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फोर्टिफाइड चावल गरीब और जरूरतमंद वर्ग के लिए बनाया जाता है। इसलिए इसकी गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जा रहा है। आम लोगों के हक का अनाज बिचौलियों तक पहुंचना गंभीर लापरवाही है। इसी वजह से इस मामले पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। आने वाले समय में जांच रिपोर्ट से कई और नाम सामने आ सकते हैं। पूरा मामला अब सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि राज्य स्तर का बन गया है।
क्यों खास है यह चावल
फोर्टिफाइड चावल सामान्य चावल से अलग होता है। इसमें अतिरिक्त विटामिन और मिनरल्स मिलाए जाते हैं। यह खासतौर पर कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए बनाया जाता है। सरकार इसे कम दाम पर जरूरतमंदों तक पहुंचाने की कोशिश करती है। ऐसे में यह चावल एथेनॉल के नाम पर बिकना बड़ी चिंता की बात है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे घोटालों से लोगों का भरोसा कमजोर पड़ता है। इसलिए जांच एजेंसियों पर निष्पक्ष और तेज कार्रवाई का दबाव भी बढ़ गया है। आने वाले दिनों में यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है। पूरे प्रदेश की नजर अब इस जांच के अगले कदम पर टिकी है।
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