पदोन्नति का सरकारी डेटा भगवान भरोसे! GAD की खुली स्प्रेडशीट पर कोई भी कर सकता है छेड़छाड़
समझें क्या है पूरा मामला
- GAD ने सभी विभागों से ऑनलाइन पदोन्नति का डेटा मांगा।
- मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए तैयार किए जा रहे हैं प्रमोशन के आंकड़े।
- स्प्रेडशीट में बिना किसी सुरक्षा के कोई भी कर सकता है एडिट।
- परीक्षण में मामूली बदलाव कर देखा, परिवर्तन तुरंत सेव हो गया।
- डेटा सुरक्षा में बड़ी लापरवाही पर विभाग की आईटी टीम पर सवाल।
जुटाया जा रहा प्रमोशन का डेटा
मध्यप्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने 8 जुलाई को जारी आदेश के जरिए सभी विभागों को निर्देश दिए कि अब तक की गई पदोन्नतियों की जानकारी एक ऑनलाइन लिंक पर तत्काल दर्ज की जाए।
आदेश में साफ लिखा गया कि यह जानकारी उसी दिन मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध करानी है। हालांकि लगातार अब तक विभाग इसमें पदोन्नति के आंकड़े दर्ज करते जा रहे हैं।यानी पूरे प्रदेश में हुई पदोन्नतियों का आधिकारिक रिकॉर्ड इसी डेटा के आधार पर तैयार किया जा रहा है।
खुली छोड़ दी पूरी स्प्रेडशीट
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस स्प्रेडशीट में प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े भरे जा रहे हैं, उसमें सुरक्षा का कोई इंतजाम नजर नहीं आता।
जिस किसी के पास यह लिंक पहुंच जाए, वह सीधे स्प्रेडशीट खोलकर किसी भी विभाग का डेटा बदल सकता है, नई एंट्री कर सकता है या पूरी जानकारी मिटा भी सकता है।
सामान्य तौर पर ऐसे सरकारी रिकॉर्ड केवल अधिकृत लॉगिन या सीमित अनुमति वाले यूजर ही एडिट कर सकते हैं, लेकिन यहां ऐसा कोई नियंत्रण दिखाई नहीं देता।
परीक्षण में सामने आई गंभीर चूक
डेटा सुरक्षा की स्थिति समझने के लिए स्प्रेडशीट में केवल परीक्षण स्वरूप एक सेल में छोटा-सा चिन्ह डालकर और टेक्स्ट का रंग बदलकर देखा गया। यह बदलाव तुरंत सेव हो गया।
आंकड़ों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई, लेकिन इस परीक्षण ने यह साबित कर दिया कि यदि कोई शरारती तत्व चाहे तो पूरे प्रदेश के प्रमोशन रिकॉर्ड में मनमाना बदलाव कर सकता है और विभागों को इसकी जानकारी तक नहीं होगी।
HC में लंबित मामलों पर भी पड़ सकता है असर
प्रदेश में पदोन्नति से जुड़े कई मामले जबलपुर हाईकोर्ट में लंबित हैं। मुमकिन है कि भविष्य में सरकार इन्हीं आंकड़ों के आधार पर अपना पक्ष रख सकती है। यदि रिकॉर्ड की सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं है तो ऐसे डेटा की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठेंगे। गलत या बदले हुए आंकड़े सरकारी निर्णयों और न्यायिक प्रक्रिया दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।
लापरवाही या जिम्मेदारों की अनदेखी?
सरकारी डेटा संग्रहण जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में इतनी बड़ी तकनीकी चूक कई सवाल खड़े करती है। आखिर स्प्रेडशीट को बिना किसी एडिट नियंत्रण के क्यों छोड़ा गया?
क्या विभाग के आईटी कर्मचारियों ने बेसिक डेटा सुरक्षा मानकों का भी पालन नहीं किया, या बिना परीक्षण के ही व्यवस्था लागू कर दी गई?
अब जरूरत इस बात की है कि सामान्य प्रशासन विभाग तत्काल इस लिंक की सुरक्षा सुनिश्चित करे, एडिट अनुमति सीमित करे और अब तक दर्ज किए गए पूरे डेटा का ऑडिट कराए, ताकि सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।
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