गिरिबाला सिंह की जमानत पर ट्विशा के पिता ने की आपत्ति दाखिल, आज होगी सुनवाई

Neel Tiwari | Aug 10, 2026, 09:00 IST
Photograph: (THESOOTR)
JABALPUR. ट्विशा शर्मा की मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने हाईकोर्ट से जमानत मांगी है। मृतका के पिता नवनिधि शर्मा ने इसका विरोध किया है। उन्होंने जांच, गवाहों और प्रभाव से जुड़े कई सवाल उठाए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • ट्विशा शर्मा की शादी समर्थ सिंह से दिसंबर 2025 में हुई थी।
  • शादी के पांच महीने बाद ट्विशा की संदिग्ध हालत में मौत हुई।
  • मामले में दहेज और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
  • गिरिबाला सिंह पर सास के रूप में गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
  • अब ट्विशा के पिता ने उनकी जमानत का हाईकोर्ट में विरोध किया है।

ट्विशा शर्मा की मौत का मामला फिर हाईकोर्ट पहुंचा है। पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने नियमित जमानत मांगी है। इस आवेदन पर ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने आपत्ति दी है। उन्होंने मामले की सुनवाई से पहले ही यह आपत्ति हाईकोर्ट में दाखिल की।



जमानत आवेदन एमसीआरसी नंबर 37723/2026 है। इसमें गिरिबाला सिंह आवेदक हैं। मध्य प्रदेश सरकार मामले में प्रतिवादी है। अब अदालत इस आपत्ति और जमानत आवेदन पर सुनवाई करेगी। अदालत की आधिकारिक सूची से तारीख की पुष्टि जरूरी है।



जमानत रोकने बताए जाएंगे कई आधार

नवनिधि शर्मा की ओर ने जमानत का सीधा विरोध किया गया है। उन्होंने जांच पूरी होने तक राहत नहीं देने की मांग की है। उनका कहना है कि सीबीआई की जांच अभी जारी है। उनके अनुसार चार्जशीट भी अभी दाखिल नहीं हुई है। उन्होंने गवाहों पर असर पड़ने की आशंका भी जताई है।



आपत्ति में गिरिबाला सिंह को प्रभावशाली बताया गया है। उनका कहना है कि वह पूर्व जिला जज रही हैं। घटना के समय वह उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष थीं। इसी आधार पर पिता ने जमानत को जोखिम भरा बताया है।



जांच अभी कई अहम सवालों तक पहुंची है: पिता

आपत्ति में कहा गया है कि जांच एजेंसी कई पहलू देख रही है। इसमें घटना के बाद हुई बातचीत भी शामिल है। मृतका के मोबाइल और वित्तीय रिकॉर्ड भी जांचे जा रहे हैं।



ट्विशा शर्मा केस मेंपिता ने इन्हें अहम जांच बिंदु बताया है। उनका कहना है कि कई लोगों से पूछताछ अभी बाकी है। ऐसे समय जमानत से जांच प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर हिरासत में पूछताछ की जरूरत बताई गई है।



पिता ने जताई गवाहों-सबूतों पर असर की आशंका

नवनिधि शर्मा ने गवाहों पर दबाव की आशंका जताई है। उन्होंने मृतका के परिवार को मुख्य गवाहों में बताया है। आपत्ति में प्रभाव और पुराने पद का भी जिक्र है।



पिता के अनुसार इससे जांच पर असर पड़ सकता है। उन्होंने सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका भी बताई है। उनका कहना है कि मामला अभी शुरुआती जांच से गुजर रहा है। इसलिए जमानत देना जल्दबाजी होगी।



पूरी घटना क्या थी, शादी के पांच महीने बाद मौत

ट्विशा शर्मा की शादी समर्थ सिंह से 9 दिसंबर 2025 को हुई थी। शादी नोएडा में हिंदू रीति से हुई थी। पिता ने शादी का खर्च उठाने की बात कही है। आपत्ति में दहेज मांगने के आरोप भी लगाए गए हैं। इसमें दो लाख रुपए देने का दावा किया गया है। शादी के बाद प्रताड़ना बढ़ने का आरोप लगाया गया है।



मई में ट्विशा गर्भवती होने की बात सामने आई थी। आरोप है कि बच्चे के पिता होने पर सवाल उठे। आपत्ति में गर्भपात के लिए दबाव का आरोप है। 22 अप्रैल की घटना का भी इसमें जिक्र है। इसके बाद परिवार के लोग ससुराल पहुंचे थे।



12 मई की रात ट्विशा परिवार से फोन पर बात कर रही थी। तभी फोन अचानक कट गया था। बाद में परिवार को उसकी मौत की सूचना मिली। मौत शादी के करीब पांच महीने बाद हुई थी। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा था। बाद में जांच सीबीआई को सौंपे जाने की बात है।



पहले भी जमानत पर HC में पहुंच चुका है मामला

पिता ने पिछली जमानत कार्रवाई का भी जिक्र किया है। आपत्ति के अनुसार पहले अग्रिम जमानत खारिज हुई थी। इसके लिए 22 मई 2026 के हाईकोर्ट आदेश का हवाला दिया गया है। आपत्ति में दो एमसीआरसी मामलों का उल्लेख है। इनमें एमसीआरसी 24005/2026 भी शामिल है।



दूसरा मामला एमसीआरसी 24475/2026 बताया गया है। इसके बाद निचली अदालत में नियमित जमानत मांगी गई थी। 25 जुलाई 2026 को वह आवेदन खारिज हुआ। निचली अदालत ने केस डायरी देखी थी। उसने प्रभाव और सबूत प्रभावित होने की आशंका दर्ज की थी। अब इसी के बाद हाईकोर्ट में नई जमानत आई है।



निचली अदालत के आदेश को भी बनाया आधार

पिता ने 25 जुलाई के आदेश का हवाला दिया है। उस आदेश में आरोपी के प्रभाव का जिक्र था। अदालत ने उनके पुराने न्यायिक पद को भी देखा था। केस डायरी में कई चैट और कॉल रिकॉर्ड बताए गए थे। मृतका के परिवार के बयान भी जांच में शामिल थे।



निचली अदालत ने जमानत देने से इनकार किया था। उसने जांच जारी होने को भी अहम माना था। गंभीर बीमारी को भी जमानत का आधार नहीं माना गया। पिता ने अब यही बातें हाईकोर्ट के सामने रखी हैं।



सीबीआई जांच पूरी होने तक राहत नहीं देने की मांग

आपत्ति में कहा गया है कि सीबीआई की जांच जारी है। चार्जशीट अभी दाखिल नहीं हुई है। पिता ने पूरी साजिश की जांच की मांग की है। उन्होंने घटनाक्रम की कड़ियों की जांच जरूरी बताई है।



घटना के बाद संपर्क किए लोगों की जांच भी बाकी बताई गई। मोबाइल और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच भी जारी बताई गई। ऐसे में जमानत से जांच प्रभावित होने का डर जताया गया है।



गिरिबाला सिंह की भूमिका पर भी उठाए गए सवाल

पिता ने गिरिबाला सिंह की भूमिका को गंभीर बताया है। आपत्ति में लगातार मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया गया है। शारीरिक प्रताड़ना के आरोप भी दर्ज किए गए हैं।



दहेज मांगने और दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है। गर्भावस्था के दौरान मानसिक दबाव का भी जिक्र है। पिता ने इसे मौत से पहले की अहम कड़ी बताया है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।



पुराने बयानों को भी जमानत न देने का आधार बताया

आपत्ति में सार्वजनिक बयानों का भी जिक्र किया गया है। पिता का दावा है कि ट्विशा की छवि खराब की गई। उन्होंने इसे परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश बताया है। जमानत मिलने पर ऐसी गतिविधियां बढ़ने की आशंका जताई गई। पिता ने अदालत से इसे भी ध्यान में रखने को कहा है।



जमानत पर अब अदालत के रुख पर नजर

गिरिबाला सिंह की जमानत पर अब हाईकोर्ट का रुख अहम होगा। अदालत आरोपों और जांच की स्थिति देख सकती है। गवाहों पर असर की आशंका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।



जांच पूरी नहीं होने की दलील भी सामने है। दूसरी तरफ आरोपी पक्ष अपने जमानत आधार रखेगा। अंतिम फैसला अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा। अभी जमानत मंजूर होने की कोई बात सामने नहीं है।



पिता ने जमानत आवेदन खारिज करने की मांग की

नवनिधि शर्मा ने जमानत आवेदन खारिज करने की मांग की है। उन्होंने अपनी आपत्ति के साथ शपथ पत्र भी दिया है। आपत्ति 7 अगस्त 2026 को दाखिल हुई है। इसमें कुल कई आधारों के जरिए जमानत का विरोध किया गया है। अब इस मामले में अदालत की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। ट्विशा के परिवार की नजर भी इसी सुनवाई पर है।



अब सब की निगाहें सुनवाई पर

इस मामले की सुनवाई आज जस्टिस अजय निरंकारी की सिंगल बेंच में होनी है। मामला 726 नंबर पर लिस्ट हुआ है। ऐसे में यदि अधिवक्ता के द्वारा मेंशन कर समय मांगा जाता है तो इस मामले की सुनवाई संभव है।



क्योंकि दोपहर 2:30 बजे के बाद जबलपुर हाई कोर्ट में नए जज का शपथ ग्रहण समारोह है। तो यदि दोपहर 1:30 बजे के पहले इस मामले का नंबर आ जाता है तो सुनवाई होगी अन्यथा टल जाएगी।



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