ट्विशा केस: जिला अदालत से झटका, अब हाईकोर्ट पहुंचीं गिरिबाला सिंह

Neel Tiwari | Aug 03, 2026, 22:07 IST
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ट्विशा केस
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ट्विशा शर्मा मौत मामले में जिला अदालत से नियमित जमानत खारिज होने के बाद पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह ने अब जबलपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 3 अगस्त को उनकी जमानत याचिका हाईकोर्ट में दाखिल हुई। फिलहाल केस किसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध नहीं हुआ है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई 2026 को भोपाल स्थित ससुराल में हुई थी।
  • मामले में सास गिरिबाला सिंह और अन्य पर दहेज प्रताड़ना के आरोप हैं।
  • हाईकोर्ट पहले उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर चुका है।
  • सीबीआई अब पूरे मामले की जांच कर रही है।
  • जिला अदालत से नियमित जमानत खारिज होने के बाद अब मामला फिर हाईकोर्ट पहुंचा है।

ट्विशा केस में फिर हाईकोर्ट पहुंचीं गिरिबाला सिंह

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह ने नियमित जमानत के लिए जबलपुर हाई कोर्ट की शरण ली है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने 3 अगस्त 2026 को जबलपुर हाईकोर्ट में नई जमानत याचिका दाखिल की है। यह याचिका एमसीआरसी क्रमांक 37723/2026 के रूप में दर्ज हुई है। फिलहाल यह किसी भी न्यायाधीश की कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है।

हाईकोर्ट में कौन रखेगा गिरिबाला सिंह का पक्ष

गिरिबाला सिंह की ओर से इस बार अधिवक्ता अश्वनी कुमार दुबे और अधिवक्ता ओम प्रकाश अग्निहोत्री पैरवी करेंगे। हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में याचिका दाखिल हो चुकी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि मामला किस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होता है और सुनवाई की तारीख कब तय होती है।

ट्विशा शर्मा केस
ट्विशा शर्मा केस


जिला अदालत ने क्यों खारिज की थी जमानत

इससे पहले भोपाल के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश राम प्रताप मिश्र की अदालत ने 25 जुलाई 2026 को गिरिबाला सिंह की पहली नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने माना कि मामला गंभीर है। मृतका की मौत विवाह के सात वर्ष के भीतर हुई है। आरोप भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2) और दहेज प्रतिषेध कानून से जुड़े हैं। ऐसे मामलों में सजा आजीवन कारावास तक हो सकती है।



बचाव पक्ष ने जिला अदालत में क्या कहा

बचाव पक्ष ने अदालत को बताया था कि गिरिबाला सिंह ने 33 वर्षों तक न्यायपालिका में सेवा दी है। उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। उनकी 100 वर्षीय मां गंभीर रूप से बीमार हैं। खुद गिरिबाला सिंह भी स्वास्थ्य समस्याओं से गुजर रही हैं। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मृतका और उसके खाते में लाखों रुपये भेजे गए थे। व्हाट्सएप चैट में भी उनके खिलाफ सीधे आरोप नहीं हैं। इसलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए।

जिला अदालत पर इन आधारों पर किया विरोध

मृतका के पिता नवनिधि शर्मा की ओर से जमानत का कड़ा विरोध किया गया। उनका कहना था कि शादी के बाद से ही दहेज को लेकर प्रताड़ना शुरू हो गई थी। गर्भवती होने पर मृतका के चरित्र पर सवाल उठाए गए। घटना की रात भी परिवार से उसकी बातचीत अचानक टूट गई थी। कुछ देर बाद ससुराल पक्ष की ओर से उसकी मौत की सूचना दी गई। शिकायतकर्ता ने अदालत से कहा कि गिरिबाला सिंह प्रभावशाली रही हैं। उन्हें जमानत मिलने पर गवाह और साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं।

सीबीआई ने जांच में क्या बताया

सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए हैं। एजेंसी के अनुसार मृतका के खाते में भेजी गई राशि का बड़ा हिस्सा बाद में निजी खर्चों में इस्तेमाल हुआ। जांच के दौरान क्राइम सीन रीक्रिएशन में पूरा सहयोग नहीं मिला। आवाज के नमूने देने में भी शुरुआत में इनकार किया गया। बाद में अदालत के आदेश पर सैंपल दिए गए। सीबीआई का कहना था कि यह जांच को प्रभावित करने की कोशिश मानी जा सकती है।

जिला अदालत ने किन बातों को माना था महत्वपूर्ण

जिला अदालत ने केस डायरी, व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और गवाहों के बयान देखे। अदालत ने कहा कि मृतका नवविवाहिता थी। उसकी मौत सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुई। अदालत ने यह भी माना कि गिरिबाला सिंह का प्रभावशाली पद जांच पर असर डाल सकता है। स्वास्थ्य, उम्र और पारिवारिक परिस्थितियां इस मामले में जमानत का पर्याप्त आधार नहीं हैं। इसी कारण अदालत ने नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया।

पहले भी रद्द हो चुकी है अग्रिम जमानत

गिरिबाला सिंह को शुरुआती दौर में अग्रिम जमानत मिली थी। बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वह राहत रद्द कर दी। हाईकोर्ट ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया। इसके बाद जांच सीबीआई को सौंप दी गई। 29 मई 2026 से गिरिबाला सिंह न्यायिक हिरासत में हैं। अब उन्होंने नियमित जमानत के लिए फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

अब आगे क्या होगा

हाईकोर्ट में दाखिल नई जमानत याचिका अभी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है। सुनवाई की तारीख तय होने के बाद दोनों पक्ष अपने तर्क रखेंगे। सीबीआई भी अपना पक्ष अदालत के सामने रखेगी। इस बहुचर्चित मामले पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है। हाईकोर्ट का अगला आदेश इस केस की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है।

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