खुद थाने पहुंचे युवक को थर्ड डिग्री देने का आरोप, TI बोले - चल सकता है, सब ठीक
समझें क्या है पूरा मामला
- गोरखपुर थाने में पुलिस प्रताड़ना के गंभीर आरोप।
- जमानती मामले में खुद थाने पहुंचे युवक से कथित थर्ड डिग्री।
- दो आरक्षकों पर पैसों की मांग और बेरहमी से मारपीट करने का आरोप।
- VIDEO में युवक के खुद थाने आने की बात, TI के बयान से विरोधाभास।
- निष्पक्ष जांच और वरिष्ठ अधिकारियों की कार्रवाई की मांग तेज।
जमानती मामले में थाने पहुंचना पड़ा भारी
जबलपुर के गोरखपुर थाने से सामने आया यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। रामपुर निवासी 40 वर्षीय सतीश सोनकर ने आरोप लगाया है कि उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत जमानती अपराध दर्ज था। कानून का पालन करते हुए वह स्वयं थाने पहुंचा ताकि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी हो सके।
थाने पहुंचने के बाद उसके साथ कानून के अनुरूप व्यवहार करने के बजाय कथित रूप से थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया गया। पीड़ित का आरोप है कि थाने में पदस्थ आरक्षक रोहित द्विवेदी और आरक्षक अनूप उससे पैसों की मांग कर रहे थे। जब उसने पैसे देने से इनकार किया तो दोनों आरक्षकों ने उसे थाने के अंदर ले जाकर बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।
पैरों पर बरसाए डंडे, चलने लायक भी नहीं बचा
सतीश सोनकर का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसके शरीर के बजाय खासतौर पर दोनों पैरों पर लगातार डंडों से वार किए ताकि चोट बाहर से कम दिखाई दे, लेकिन दर्द अधिक हो। उसके अनुसार मारपीट इतनी निर्ममता से की गई कि दोनों पैर बुरी तरह सूज गए और अब वह सामान्य रूप से चलने-फिरने की स्थिति में नहीं है।
उसने यह भी दावा किया कि उसके पैर की हड्डी में फ्रैक्चर हुआ है। थाने में मौजूद उसके सूजे हुए पैरों और चोट के निशानों की तस्वीरें और वीडियो अब पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े कर रहे हैं। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल मारपीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हिरासत में कथित पुलिस प्रताड़ना और मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला भी बन सकता है।
पुलिस के ही बयान आमने-सामने
मामले में नया मोड़ उस समय आया जब एक वीडियो सामने आया। वीडियो में फरियादी के परिजन पुलिसकर्मियों से यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि सतीश सोनकर खुद थाने आया था। बातचीत के दौरान मौजूद पुलिसकर्मी भी इस बात का स्पष्ट खंडन करते हुए नजर नहीं आते।
दूसरी ओर गोरखपुर थाना प्रभारी नितिन कमल का दावा है कि युवक को इलाके में भ्रमण के दौरान पकड़कर थाने लाया गया था। दोनों दावों में यह स्पष्ट विरोधाभास अब पूरे मामले की जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है। यदि युवक वास्तव में स्वयं थाने पहुंचा था तो फिर उसे पकड़कर लाने की बात क्यों कही गई, यह सवाल अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
'चल सकता है, कोई दिक्कत नहीं'
थाना प्रभारी नितिन कमल ने मारपीट से इनकार किया। उन्होंने कहा कि युवक का मेडिकल परीक्षण हुआ है। उनके अनुसार युवक चल-फिर सकता है। इसलिए गंभीर समस्या जैसी बात नहीं है। थाना प्रभारी ने डॉक्टर की रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने रिपोर्ट के आधार पर जांच की बात कही। इस बयान पर अब सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगा रहा है। उसके पैरों में सूजन भी दिखाई दे रही है। पुलिस के अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। ऐसे में स्वतंत्र जांच की मांग उठ रही है। जांच वरिष्ठ अधिकारी से कराने की मांग है।
वरिष्ठ अधिकारियों की जांच पर टिकी हैं निगाहें
यह मामला अब केवल एक व्यक्ति की शिकायत भर नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस की जवाबदेही और पारदर्शिता का विषय बनता जा रहा है। एक ओर पीड़ित थाने के भीतर थर्ड डिग्री और मारपीट के गंभीर आरोप लगा रहा है, दूसरी ओर पुलिस इन आरोपों को खारिज कर रही है।
सामने आए वीडियो और दोनों पक्षों के विरोधाभासी दावों ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस मामले में किस प्रकार की जांच कराते हैं और क्या जांच के जरिए पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ पाती है।
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