मध्य प्रदेश में रिश्वतकांड: कृषि मंत्री के OSD समेत 3 कर्मचारी सस्पेंड

Sanjay Dhiman | Jul 05, 2026, 19:40 IST
Share
mp-mantralaya-transfer-bribery-case
mp-mantralaya-transfer-bribery-case

मध्यप्रदेश मंत्रालय में ट्रांसफर के बदले रिश्वत मामले में सरकार ने कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना के दफ्तर के 3 कर्मचारी सस्पेंड किए हैं। यह मामला 1 से 16 जून 2026 के बीच हुए तबादलों से जुड़ा है। जांच जारी है, आगे की कार्रवाई रिपोर्ट के बाद होगी।

मध्यप्रदेश मंत्रालय में ट्रांसफर के बदले रिश्वत लेने का मामला सामने आया है। कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना के दफ्तर से जुड़े 3 कर्मचारी सस्पेंड किए गए हैं। इनमें OSD अशोक कुमार बाथम, PA दिनेश भकोरिया और स्टेनो टाइपिस्ट अंकित अवधिया शामिल हैं। तीनों पर तबादलों के बदले पैसे मांगने के आरोप हैं। सरकार ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

मध्यप्रदेश के मंत्रालय से एक बड़ी खबर सामने आई है। ट्रांसफर के बदले रिश्वत मांगने का मामला उजागर हुआ है। इस मामले में सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना के दफ्तर से जुड़े 3 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले की जांच अभी जारी है। यह मामला सामने आते ही मंत्रालय के गलियारों में हलचल मच गई।

किन कर्मचारियों पर कार्रवाई

सस्पेंड होने वालों में तीन नाम शामिल हैं। पहला नाम है OSD अशोक कुमार बाथम का। दूसरा नाम है PA दिनेश भकोरिया का। तीसरा नाम है स्टेनो टाइपिस्ट अंकित अवधिया का। तीनों कृषि मंत्री के कार्यालय में तैनात थे। इन पर तबादलों के बदले पैसे मांगने के आरोप लगे हैं। तीनों की जिम्मेदारी अलग-अलग थी, लेकिन आरोप एक जैसे हैं।

OSD अशोक बाथम पर कार्रवाई

किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने अलग से आदेश जारी किया। इस आदेश में OSD अशोक कुमार बाथम को निलंबित किया गया। विभाग का कहना है कि उनके खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह आरोप प्रकाशित खबरों और मौजूद तथ्यों पर आधारित हैं। मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत यह कार्रवाई हुई है। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय सीधी जिले में रहेगा। यानी जांच पूरी होने तक वे मंत्रालय से दूर रहेंगे।

दो और कर्मचारी सस्पेंड

सामान्य प्रशासन विभाग ने भी दो अलग आदेश जारी किए। इनमें अंकित अवधिया और दिनेश भकोरिया का नाम है। दोनों पर तबादले के बदले रकम मांगने का आरोप है। विभाग ने दोनों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया। अब दोनों का मुख्यालय मंत्रालय भोपाल में GAD पूल रहेगा। यानी दोनों फिलहाल किसी विभाग में सीधे काम नहीं करेंगे।

जून में हुए थे तबादले

मध्यप्रदेश में तबादलों पर लंबे समय से रोक लगी थी। सरकारी कर्मचारियों के तबादले साल में सीमित समय के लिए ही खोले जाते हैं। 1 जून से 16 जून 2026 तक यह रोक हटाई गई थी। इसी दौरान बड़ी संख्या में तबादले हुए। तबादला सीजन में ऐसी शिकायतें अक्सर सामने आती हैं।

इसी अवधि में गड़बड़ी और रिश्वतखोरी की शिकायतें मिलीं। शिकायतों के बाद विभागों ने पूरे मामले की समीक्षा की। समीक्षा के बाद तीनों कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई। यह कदम बताता है कि सरकार शिकायतों को गंभीरता से ले रही है।

आगे क्या होगी कार्रवाई

सरकार ने साफ किया है कि यह शुरुआती कार्रवाई है। अभी मामले की विस्तृत जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद अगला कदम तय होगा। विभागीय प्रक्रिया के आधार पर आगे फैसला लिया जाएगा। सरकार का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है।

अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। निलंबन का मतलब यह नहीं कि दोष साबित हो गया है। जांच में दोषी पाए जाने पर ही आगे की सख्त कार्रवाई होगी।

क्यों अहम है यह मामला

मंत्रालय जैसी जगहों पर पारदर्शिता बेहद जरूरी मानी जाती है। तबादले जैसे रोजमर्रा के काम में भी रिश्वत की शिकायत गंभीर संकेत है। इससे आम कर्मचारियों और अफसरों पर भरोसा कमजोर होता है। सरकार का यह कदम भरोसा बहाल करने की कोशिश जैसा दिखता है। मंत्री कार्यालय जैसे संवेदनशील पदों पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत भी सामने आई है।

आम लोगों के लिए क्या मायने

आम सरकारी कर्मचारी भी तबादलों के दौरान परेशानी झेलते हैं। कई बार सही तबादले के लिए भी अनुचित मांगें होने की शिकायतें आती हैं। ऐसे मामलों में कार्रवाई से कर्मचारियों में सही संदेश जाता है। साथ ही यह भी साफ होता है कि पद कोई भी हो, नियम सबके लिए बराबर हैं। जांच की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता से चलनी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके।

मंत्री दफ्तर में निलंबन

किसी मंत्री के दफ्तर में OSD, PA और स्टेनो जैसे पद अहम माने जाते हैं। ये कर्मचारी मंत्री और आम फाइलों के बीच सीधा संपर्क रखते हैं। यही वजह है कि इन पदों पर आरोप ज्यादा गंभीरता से लिए जाते हैं।

निलंबन आदेश में विभाग नियमों का हवाला देकर कार्रवाई करता है। मुख्यालय बदलने का मतलब है कि कर्मचारी फिलहाल मूल दफ्तर में नहीं जा सकते। यह सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, जो जांच के दौरान अपनाई जाती है।

इस मामले ने सरकारी दफ्तरों में तबादला प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। कर्मचारियों के आचरण से जुड़े नियम एक बार फिर चर्चा में हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से नई जानकारी सामने आ सकती है। तब तक तीनों कर्मचारी सस्पेंड ही रहेंगे और मंत्रालय से दूर रखे जाएंगे। पाठकों को आगे की अपडेट के लिए इस खबर से जुड़े रहना चाहिए।

FAQ

  1. मप्र मंत्रालय ट्रांसफर घोटाला क्या है और इसमें क्या कार्रवाई हुई है?
    मप्र मंत्रालय ट्रांसफर घोटाला जून 2026 में तबादलों पर से रोक हटने के दौरान सामने आया। इसमें सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर के बदले रिश्वत मांगने के आरोप लगे। सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कृषि मंत्री के ओएसडी (OSD), पीए (PA) और एक स्टेनो टाइपिस्ट को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
  2. कृषि मंत्री के OSD समेत किन-किन कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है?
    इस मामले में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना के कार्यालय के तीन कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। इनमें ओएसडी (OSD) अशोक कुमार बाथम शामिल हैं। उनके साथ ही पर्सनल असिस्टेंट (PA) दिनेश भकोरिया और स्टेनो टाइपिस्ट अंकित अवधिया पर भी निलंबन की गाज गिरी है।
  3. क्या मप्र मंत्रालय ट्रांसफर घोटाला मामले में आगे कोई कानूनी कार्रवाई होगी?
    जी हां, सरकार ने साफ किया है कि यह निलंबन सिर्फ शुरुआती तथ्यों के आधार पर हुआ है। अभी पूरे मामले की विस्तृत और गहन जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी और उन्हें जेल भी भेजा जा सकता है।
यह खबरें भी पढ़ें...

जमीन तय नहीं, अस्पताल बना नहीं, फिर भी हो रही डॉक्टरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग

तबादलों की अवधि 5 दिन बढ़ी, अब 10 जुलाई तक हो सकेंगे ट्रांसफर

जनगणना कर्मियों के ट्रांसफर पर HC सख्त: CS तक के आदेश दरकिनार करने पर सवाल, ट्रांसफर आदेश निरस्त

EPF के 64 साल पुराने नियमों में बदलाव, कर्मचारी संगठन नाराज

एमपी मंत्रालय

Tags:
  • सामान्य प्रशासन विभाग
  • OSD
  • एमपी मंत्रालय
  • सस्पेंड
  • रिश्वतखोरी
  • एदल सिंह कंषाना
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज

By Sanjay Dhiman

UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज