'द सूत्र' की खबर का बड़ा असर: नीमच सोलर प्लांट की जांच कराएगी सरकार
सरकारी सोलर परियोजनाओं में भारतीय मॉड्यूल की जगह चीनी मॉड्यूल लगाए जाने के खुलासे के बाद सरकार हरकत में आ गई है। 'द सूत्र' की खबर के बाद अब नीमच सोलर पॉवर प्लांट की जांच कराने की तैयारी शुरू हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, पूरे मामले की जांच के लिए समिति बनाई जाएगी, जो टेंडर से लेकर मॉड्यूल और स्थापना तक सभी दस्तावेजों की पड़ताल करेगी। हालांकि. सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन घटनाक्रम साफ संकेत दे रहा है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
'द सूत्र' ने अपनी पड़ताल में खुलासा किया था कि मध्यप्रदेश की तीन बड़ी सोलर परियोजनाओं में चीनी मॉड्यूल लगाए गए हैं। इनमें टाटा पावर एनर्जी लिमिटेड का 320 मेगावाट का नीमच प्रोजेक्ट, सोलर अराइज का 125 मेगावाट का शाजापुर प्रोजेक्ट और एम्प एनर्जी का 100 मेगावाट का ओंकारेश्वर प्रोजेक्ट शामिल हैं।
आरोप है कि इन कंपनियों ने टेंडर में भारतीय मॉड्यूल लगाने का वादा किया था, लेकिन बाद में अधिकारियों की मिलीभगत से सस्ते चीनी मॉड्यूल लगा दिए गए।
लोकार्पण हुआ, पर पावर परचेज एग्रीमेंट पर लगी रोक
सोमवार, 29 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ नीमच के 500 मेगावाट सोलर पार्क और शाजापुर के 450 मेगावाट सोलर पार्क का लोकार्पण किया।
कार्यक्रम तय होने की वजह से इसे टाला नहीं जा सकता था, इसलिए लोकार्पण तो कर दिया गया, लेकिन नीमच की आगे की प्रक्रिया रोक दी गई है। इस प्रोजेक्ट के लिए तीन पक्षों में पावर परचेज एग्रीमेंट का प्रस्ताव ही नहीं लाया गया।
आगे क्या होगा?
ऊर्जा विभाग ने फिलहाल इस मामले में खुद को पावर परचेज एग्रीमेंट की प्रक्रिया से अलग कर लिया है। नीमच की संदेहास्पद परिस्थिति का असर मुरैना सोलर पॉवर प्लांट पर भी पड़ा है।
दरअसल, मुरैना परियोजना को लेकर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (RUMSL) और टाटा पावर एनर्जी लिमिटेड के बीच एग्रीमेंट की प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, लेकिन ऊर्जा विभाग ने फिलहाल अंतिम निर्णय रोक दिया है।
सूत्रों के अनुसार, यह अड़ंगा भी नीमच प्रोजेक्ट के चलते ही लगा है, यदि नीमच का मामला नहीं आता तो मुरैना का पीपीए पूरा हो जाता। अब पहले मुरैना के पीपीए का प्रस्ताव पॉवर मनेजमेंट देखेगा उसके बाद उसे कैबिनेट में लाया जाएगा। वहां प्रक्रिया को पूरी तरह फुलप्रूफ बनाने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
जांच की तैयारी, दस्तावेजों की होगी पड़ताल
सूत्रों का कहना है कि नीमा पॉवर प्लांट मामले में जांच समिति टेंडर, मॉड्यूल की खरीद, सप्लाई, स्थापना और अनुबंध से जुड़े सभी रिकॉर्ड की जांच कर सकती है।
उल्लेखनीय है कि 28 जून, रविवार को नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, दिल्ली की टीम ने भी नीमच सोलर प्लांट का निरीक्षण किया था। इसे केंद्र सरकार की जांच प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
दस्तावेजों और आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर सामने आया है कि तीन बड़ी सोलर परियोजनाओं में चीनी मॉड्यूल लगाए गए हैं। इनमें टाटा पावर एनर्जी लिमिटेड का 320 मेगावाट का नीमच प्रोजेक्ट, सोलर अराइज का 125 मेगावाट का शाजापुर प्रोजेक्ट और एम्प एनर्जी का 100 मेगावाट का ओंकारेश्वर प्रोजेक्ट शामिल हैं।
आरोप है कि कंपनियों ने टेंडर में भारतीय मॉड्यूल लगाने का वादा किया था, लेकिन बाद में अधिकारियों की मिलीभगत से सस्ते चीनी मॉड्यूल लगा दिए गए।
टेंडर में 'मेड इन इंडिया', प्लांट में चीन के मॉड्यूल!
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने निर्देश दिए थे कि सरकारी सोलर परियोजनाओं में केवल ALMM प्रमाणित भारतीय मॉड्यूल ही लगाए जाएंगे। इसी शर्त के आधार पर रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (RUMSL) ने नीमच, शाजापुर और ओंकारेश्वर परियोजनाओं के टेंडर जारी किए।
कंपनियों ने भारतीय मॉड्यूल की लागत के आधार पर अपनी बोली लगाई और सबसे कम दर देने वाली कंपनियों को काम मिल गया। आरोप है कि टेंडर मिलने के बाद कुछ कंपनियों ने जिम्मेदार अधिकारियों से मिलीभगत कर भारतीय मॉड्यूल की जगह चीन से सस्ते मॉड्यूल मंगाकर परियोजनाओं में लगा दिए।
पहले टालते रहे, फिर माना- गलती हुई
जब इस मामले में संबंधित अधिकारियों से सवाल किए गए तो शुरुआत में उन्होंने जवाब देने से बचने की कोशिश की, लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या टेंडर की शर्तें बदलकर चीनी मॉड्यूल लगाए जा सकते हैं, तब उन्होंने स्वीकार किया कि यदि ऐसा हुआ है तो यह नियमों के खिलाफ होगा।
करोड़ों की बचत, सरकार पर हजारों करोड़ का बोझ!
भारतीय ALMM प्रमाणित मॉड्यूल की कीमत करीब 11.50 रुपए प्रति वाट बताई जाती है, जबकि चीन के गैर-ALMM मॉड्यूल सात से आठ रुपए प्रति वाट में उपलब्ध हैं। यानी प्रति वाट लगभग तीन से चार रुपए का अंतर है।
यदि केवल नीमच (320 मेगावाट) और शाजापुर (125 मेगावाट) परियोजनाओं को ही आधार माना जाए तो कुल क्षमता 445 मेगावाट बनती है। इस हिसाब से कंपनियों को मॉड्यूल खरीद में लगभग 150 से 180 करोड़ तक की बचत होने का अनुमान है। यह अनुमान प्रति वाट कीमत के अंतर पर आधारित है।
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