ग्वालियर हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से कहा, तीन माह के अंदर वसूल करें राशि

Ratan Kumar Mishra | Jun 25, 2026, 22:17 IST
Photograph: (thesootr)
GWALIOR. ग्वालियर हाईकोर्ट ने रेरा के आदेश लागू न होने पर जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा 3 माह में बिल्डर से 13.81 लाख रुपए ब्याज सहित वसूल करे।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • बिल्डर ने फ्लैट नहीं दिया, हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती।
  • रेरा का आदेश ठंडे बस्ते में, अब हाईकोर्ट का डंडा।
  • ग्वालियर में खरीदार को मिलेगा पैसा वापस, 3 माह की डेडलाइन।
  • राजस्व अधिकारी सोते रहे, हाईकोर्ट ने जगाया।
  • फ्लैट नहीं मिला, ब्याज सहित वापस होगी पूरी रकम।

ग्वालियर के एक फ्लैट खरीदार को बिल्डर ने सेल डीड नहीं दी और रेरा के आदेश के बावजूद राजस्व अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की बेंच ने कड़ा रुख अपनाया।



कोर्ट ने जिला प्रशासन को तीन माह में बकाया राशि वसूलने का आदेश दिया। बिल्डर को 13.81 लाख रुपए मूल राशि पर 18.45 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा खरीदार को मानसिक प्रताड़ना के मुआवजे के रूप में डेढ़ लाख रुपए अलग से मिलेंगे।



क्या है पूरा मामला

ग्वालियर जिले के ग्राम रमौआ में एक आवासीय परियोजना बनाई गई थी, जिसका नाम जैटल विहार है। आशीष किशोर शिवहरे और अन्य खरीदारों ने इस परियोजना में फ्लैट बुक किया था। उन्होंने बिल्डर को किश्तों में कुल 13 लाख 81 हजार 210 रुपए का भुगतान किया।



5 मार्च 2013 को दोनों पक्षों के बीच अनुबंध भी हुआ था। लेकिन परियोजना पूरी होने के बावजूद बिल्डर ने सेल डीड (Sale Deed) नहीं बनाई। खरीदारों को फ्लैट का कानूनी हस्तांतरण नहीं हुआ।



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रेरा में की शिकायत

परेशान होकर खरीदारों ने रेरा (RERA – Real Estate Regulatory Authority) भोपाल में शिकायत दर्ज कराई। रेरा ने मामले की सुनवाई की और 14 नवंबर 2024 को अपना आदेश सुनाया।



आदेश में बिल्डर को निर्देश दिया गया कि वह खरीदारों को 13 लाख 81 हजार रुपए की मूल राशि 18.45 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। इसके साथ ही एक लाख 50 हजार रुपए मानसिक प्रताड़ना का मुआवजा और पांच हजार रुपए वाद व्यय भी देने का आदेश हुआ।



फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

रेरा के आदेश के आधार पर आरआरसी (RRC – Revenue Recovery Certificate) यानी राजस्व वसूली प्रमाण-पत्र जारी किया गया। यह प्रमाण-पत्र जिला प्रशासन और राजस्व अधिकारियों को भेजा गया ताकि वे बिल्डर से रकम वसूल करें।



लेकिन राजस्व अधिकारी इस पर कोई कार्रवाई नहीं किए। आरआरसी जारी होने के बावजूद बिल्डर से एक रुपया भी नहीं वसूला गया। खरीदार फिर से बेबस हो गए।



ग्वालियर हाईकोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी

मामला हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ तक पहुंचा। जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की बेंच ने राजस्व अधिकारियों की निष्क्रियता पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने साफ कहा कि सक्षम प्राधिकारी के आदेशों को लंबित नहीं रखा जा सकता।



कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि आरआरसी के आधार पर तीन माह के भीतर बकाया राशि की वसूली पूरी की जाए। यह निर्देश ग्वालियर जिले के उन तमाम अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो रेरा के आदेशों को अनदेखा करते रहे हैं।



खरीदारों के लिए क्यों अहम है यह फैसला

यह मामला केवल एक फ्लैट खरीदार का नहीं है। पूरे मध्यप्रदेश में ऐसे सैकड़ों मामले हैं जहां रेरा ने बिल्डरों के खिलाफ आदेश पारित किए हैं, लेकिन जमीन पर कार्रवाई नहीं हुई।



हाईकोर्ट का यह फैसला एक नजीर बन सकता है। इससे रेरा के आदेशों को लागू कराने की प्रक्रिया मजबूत होगी। राजस्व अधिकारी अब इस तरह के मामलों में लापरवाही बरतने से पहले सोचेंगे।



FAQ

  1. रेरा क्या होता है और यह खरीदारों की कैसे मदद करता है?
    रेरा यानी रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी एक सरकारी संस्था है जो फ्लैट और प्लॉट खरीदारों की शिकायतें सुनती है। यह बिल्डरों के खिलाफ आदेश पारित कर रकम वापस दिलाने या फ्लैट देने का निर्देश दे सकती है। रेरा का गठन 2016 में रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट के तहत हुआ था।
  2. आरआरसी क्या होता है और यह क्यों जरूरी है?
    आरआरसी यानी रेवेन्यू रिकवरी सर्टिफिकेट एक कानूनी दस्तावेज है जो रेरा के आदेश के आधार पर जारी होता है। इसके जरिए जिला प्रशासन बिल्डर की संपत्ति कुर्क कर या अन्य तरीकों से बकाया राशि वसूल कर सकता है। लेकिन राजस्व अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण यह प्रक्रिया अक्सर लंबित रह जाती है।
  3. अगर बिल्डर फ्लैट न दे तो खरीदार को क्या करना चाहिए?
    सबसे पहले रेरा में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करनी चाहिए। रेरा आदेश पारित होने के बाद यदि बिल्डर पालन न करे तो आरआरसी के लिए आवेदन करें। जरूरत पड़े तो हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।

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