ग्वालियर-चंबल संभाग की न्यायपालिका में बड़ी हिस्सेदारी, हर चौथा जज यहीं का
News In Short
- मध्यप्रदेश में कुल 727 डीजे-एजीजे जज हैं।
- इनमें से 163 यानी हर चौथा जज ग्वालियर-चंबल संभाग से है।
- जिलेवार आंकड़ों में ग्वालियर 55 जजों के साथ प्रदेश में पहले नंबर पर है।
- सिविल जज वर्ग में भी ग्वालियर 84 जजों के साथ पहले स्थान पर है।
- महिला न्यायाधीशों में भी इस संभाग की भागीदारी उल्लेखनीय है।
News In Detail
ग्वालियर-चंबल का न्यायपालिका में दबदबा
मध्य प्रदेश की निचली अदालत के ताजा आंकड़े चौंकाने वाले हैं। प्रदेश में कुल 727 न्यायाधीश डीजे-एजीजे (District Judge And Additional District Judge) संवर्ग में कार्यरत हैं। इनमें से 163 यानी करीब हर चौथा न्यायाधीश ग्वालियर-चंबल संभाग से आता है। यह आंकड़ा इस संभाग के न्यायिक क्षेत्र में मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
जिलेवार देखें तो ग्वालियर 55 न्यायाधीशों के साथ पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर है। शिवपुरी 43 के साथ दूसरे और भिंड 34 के साथ तीसरे नंबर पर है। इसके बाद इंदौर (33) और धार (26) का स्थान आता है।
सिविल जजों में भी ग्वालियर नंबर एक
सिर्फ डीजे-एजीजे संवर्ग (Cadre) में ही नहीं, सिविल जज वर्ग में भी यही रुझान देखने को मिलता है। प्रदेश में कुल 1039 सिविल जज हैं। इनमें ग्वालियर 84 जजों के साथ पहले पायदान पर है।
शिवपुरी 51 के साथ दूसरे और धार 28 के साथ तीसरे स्थान पर है। इंदौर में 83 और भोपाल में 82 की संख्या भी मजबूत है, लेकिन ग्वालियर का नंबर एक पर होना खास बात है।
महिला न्यायाधीश भी पीछे नहीं
प्रदेश के कुल 727 न्यायाधीशों में 104 महिलाएं हैं। इनमें से 30 महिला न्यायाधीश ग्वालियर-चंबल संभाग से हैं। यह संख्या दर्शाती है कि इस क्षेत्र की भागीदारी सिर्फ संख्या में नहीं, बल्कि महिला प्रतिनिधित्व में भी मजबूत है।
अब इंजीनियर और फार्मासिस्ट भी बन रहे जज
इस रिपोर्ट में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है। न्यायिक सेवाओं में अब सिर्फ कानून के पारंपरिक छात्र ही नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और फार्मेसी के बैकग्राउंड वाले लोग भी आ रहे हैं।
पहली मिसाल इंजीनियरिंग बैकग्राउंड की है। ध्रुव जाखड़ और ललित कुमार जैसे नाम न्यायिक सेवा में तकनीकी समझ लेकर आए हैं।
दूसरी मिसाल फार्मा और मैनेजमेंट की है। अमनदीप सिंह छाबड़ा ने बी फार्मा व शुभम मोदी ने कंपनी सेक्रेटरी की डिग्री के साथ ही ईसीएसआई और डिस्टेंस लर्निंग कोर्स से आईपीआर किया है।
अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर भी है खास
जज नीलिमा देवदत्त के पास यूरोपियन यूनियन लॉ की अंतरराष्ट्रीय योग्यता है। न्यायाधीश सुमन श्रीवास्तव ने डिप्लोमा इन योगा को न्यायिक सेवा में इस्तेमाल किया है। यह नई पीढ़ी के जजों का वैश्विक नजरिया दर्शाता है।
डिग्रियों की विविधता भी जबरदस्त
जज मुकेश मलिक के पास पीएचडी और पत्रकारिता सहित आधा दर्जन से अधिक डिग्रियां हैं। इनमें डिस्टेंस की योग्यताएं भी शामिल हैं। यह दर्शाता है कि न्यायिक सेवा में आने वाले लोग अब सिर्फ एलएलबी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लगातार सीखने की ललक रखते हैं।
ये खबर भी पढ़िए...
MP News: ग्वालियर हाईकोर्ट ने बलात्कार पीड़िता को दी गर्भपात की अनुमति
ग्वालियर की महापौर पर जानलेवा हमला! बदमाशों ने रॉड से कार पर किया वार
चंबल में अवैध खनन रोकने के लिए पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करनी पड़ेगी: सुप्रीम कोर्ट
अग्निवीर भर्ती 2026: चंबल अंचल में दोगुनी हुई वैकेंसी, 1800 पदों पर होगी भर्ती