IPS बन ठगों ने रिटायर्ड महिला ऑफिसर को 33 दिनों तक किया डिजिटल अरेस्ट, 1.57 करोड़ ठगे

Amresh Kushwaha | Jun 24, 2026, 10:00 IST
डिजिटल अरेस्ट
ग्वालियर की 69 वर्षीय रिटायर्ड लैब टेक्नीशियन मीनाक्षी नाखरे को साइबर ठगों ने 33 दिन डिजिटल अरेस्ट में रखा था। IPS और CBI अफसर बनकर डराया और एक करोड़ 57 लाख 90 हजार रुपए ठग लिए।

समझें क्या है पूरा मामला...

ग्वालियर की रिटायर्ड महिला मीनाक्षी नाखरे को साइबर ठगों ने 33 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया।


ठगों ने IPS अफसर और CBI (Central Bureau of Investigation) अधिकारी बनकर फोन किया था।


मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस का डर दिखाकर एक करोड़ 57 लाख 90 हजार रुपए ट्रांसफर कराए गए हैं।


महिला ने चार एफडी (Fixed Deposit) तोड़कर ये रकम दी, जो पुश्तैनी जमीन बेचकर जमा की गई थी।


ग्वालियर क्राइम ब्रांच में 23 जून 2026 को एफआईआर (First Information Report) दर्ज हुई है।



33 दिन की डिजिटल जेल

10 मई 2026 को सुबह 11:57 बजे मीनाक्षी नाखरे के पास एक अनजान नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली टेलीकॉम डिपार्टमेंट (Telecom Department) का अधिकारी अशोक गुप्ता बताया था।



उसने कहा कि मीनाक्षी के नाम से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से मनी लॉन्ड्रिंग हो रही है। इस नंबर से छह करोड़ 80 लाख रुपए का अवैध लेनदेन हुआ है। दो घंटे में दिल्ली आओ वरना गिरफ्तारी होगी जैसी धमकी दी गई थी।



मीनाक्षी ने खुद को निर्दोष बताया तो ठगों ने उन्हें दिल्ली पुलिस के सीनियर अफसर से वीडियो कॉल पर बात कराने का नाटक किया।



फर्जी IPS का डरावना खेल

दोपहर 12:10 बजे मीनाक्षी के बेटे अनुभव के नंबर पर वीडियो कॉल आई थी। स्क्रीन पर दिल्ली पुलिस का लोगो था और वर्दी में बैठा एक शख्स था। उसने खुद को आईपीएस (Indian Police Service) अधिकारी सुनील कुमार गौतम बताया था।



उसने कहा कि आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) का मैनेजर संदीप कुमार पकड़ा गया है। उसके पास से मीनाक्षी के नाम की फर्जी पासबुक मिली है। इस खाते से छह करोड़ 80 लाख रुपए का लेनदेन हुआ और इसमें उन्हें 68 लाख रुपए कमीशन मिला बताया गया है।



11 मई को सीबीआई अधिकारी बनकर वॉइस कॉल आई थी। उसने कहा कि प्रायोरिटी इन्वेस्टिगेशन (Priority Investigation) के लिए सारा पैसा सुरक्षित खातों में ट्रांसफर करना होगा। जांच के बाद पैसा वापस आएगा, ऐसा भरोसा दिलाया था।



ऐसे कराई चार बार में रकम ट्रांसफर

26 मई 2026 को पहली बार मीनाक्षी बैंक गई और 60 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे। यह रकम केरल के मलप्पुरम जिले के निलंबूर में ओसियन ब्रिज ट्रेडर्स के आईसीआईसीआई बैंक खाते में गई थी।



03 जून को 40 लाख 90 हजार रुपए कोलकाता (पश्चिम बंगाल) के साल्टलेक सिटी स्थित कुरुकनलो इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के बंधन बैंक खाते में ट्रांसफर हुए थे। वहीं, 05 जून को 37 लाख 50 हजार रुपए रायपुर (छत्तीसगढ़) में डिक्का सोल्यूशन पॉइंट ओपीसी प्राइवेट लिमिटेड के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank Of India) खाते में भेजे गए थे।



10 जून को आखिरी बार 19 लाख 50 हजार रुपए महाराष्ट्र के नासिक में गंगापुर रोड स्थित इकोब्राइट ग्रीन कंक्रीट इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के आईसीआईसीआई बैंक खाते में गए थे। इस तरह 33 दिनों में चार राज्यों के 10 से ज्यादा शहरों में कुल एक करोड़ 57 लाख 90 हजार रुपए भेजे गए थे।



एनओसी का झांसा, फिर गायब

11 जून 2026 को ठगों ने कहा कि जांच पूरी हो गई है। क्लीन चिट की एनओसी (No Objection Certificate) 18 जून तक घर पहुंच जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट से अब मुक्त किया जा रहा है।



16 जून की रात साढ़े नौ बजे के बाद ठगों के सभी नंबर बंद हो गए। तय तारीख पर एनओसी नहीं आई तो मीनाक्षी को शक हुआ। वे दिल्ली गईं और बाराखंभा पुलिस स्टेशन पहुंचीं, जहां पता चला कि वे ठगी का शिकार हो चुकी हैं।



इसके बाद, 23 जून 2026 को ग्वालियर क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज हुई है।



पुश्तैनी जमीन की कमाई गई

मीनाक्षी के बेटे अनुभव नाखरे पहले एक प्राइवेट कंपनी में काम करते थे। करीब 15 हजार रुपए महीना तनख्वाह थी। अभी वे नौकरी में नहीं हैं और मां की पेंशन पर गुजारा हो रहा है। मीनाक्षी ने ठगों को देने के लिए जो चार एफडी तोड़ीं, वे पुश्तैनी जमीन बेचकर जमा की गई रकम से बनाई थीं। यह सब उनकी जिंदगी की जमा-पूंजी थी।



ग्वालियर एसएसपी धर्मवीर सिंह ने कहा कि साइबर सेल ने उन सभी बैंक खातों को होल्ड कराने की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी है जिनमें रकम गई थी। साइबर एक्सपर्ट की टीमें जांच में लगी हैं।



डिजिटल अरेस्ट को ऐसे पहचानें

साइबर ठग आमतौर पर तीन तरह के स्कैम करते हैं। पहला है इन्वेस्टमेंट स्कैम, दूसरा डिजिटल अरेस्ट स्कैम और तीसरा बॉस स्कैम। डिजिटल अरेस्ट में ठग सीबीआई, पुलिस या ईडी (Enforcement Directorate) का अधिकारी बनकर फोन करते हैं। नकली कॉल, फर्जी दस्तावेज और झूठे कोर्ट ऑर्डर से डराकर पैसे वसूले जाते हैं।



यदि ऐसा कोई फोन आए तो घरवालों से तुरंत बात करें। नजदीकी पुलिस स्टेशन जाएं। कॉल करने वाले का कहा कोई ऐप डाउनलोड न करें। यदि कर लिया हो तो तुरंत डिलीट करें और फोन फॉर्मेट कराएं। जितना जल्दी शिकायत होगी, पैसा वापस मिलने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।



FAQ

  1. डिजिटल अरेस्ट में फंसकर पैसे ट्रांसफर हो जाएं तो क्या करें?
    जितनी जल्दी हो सके साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जिन खातों में पैसे गए हैं, उनकी जानकारी पुलिस को दें ताकि खाते होल्ड कराए जा सकें। अपने बैंक को भी तुरंत सूचित करें।

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