डिजिटल अरेस्ट के खिलाफ सरकार सख्त, व्हाट्सएप डिवाइस ID को ब्लॉक करने के दिए आदेश
Aman Vaishnav | Mar 22, 2026, 12:59 IST
government orders whatsapp block device id digital arrest scam
डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर भारत सरकार अब सख्त हो गई है। व्हाट्सएप को आदेश दिया गया है कि वह ठगों की डिवाइस ID तुरंत ब्लॉक करे। अब स्कैमर्स के लिए नए अकाउंट बनाकर लोगों को ठगना बहुत मुश्किल होगा।
सरकार ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने व्हाट्सएपको आदेश दिया है कि वह उन डिवाइस IDs को ब्लॉक कर दे जो इस स्कैम में इस्तेमाल हो रही हैं।
इन स्कैम्स में अक्सर व्हाट्सएपका इस्तेमाल किया जाता है। यहां विक्टिम के पास व्हाट्सएपकॉल, वीडियो कॉल और मैसेज भेजे जाते हैं।
![e87c5ca3-752]()
सरकार ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए कुछ बड़े कदम उठाने की योजना बनाई है। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है। ये साइबर विंग गृह मंत्रालय के तहत काम करती है।
इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने साइबर स्कैमर्स के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। बार-बार नए अकाउंट बनाकर धोखाधड़ी करने वाले स्कैमर्स को रोकने की योजना बनाई जा रही है
साथ ही व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर भी सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए Skype जैसे सुरक्षा फीचर्स लागू करने पर विचार हो रहा है। इससे यूजर्स को ज्यादा सुरक्षा मिल सकेगी और स्कैम के मामलों में कमी आएगी।
IT Rules 2021 के तहत डिलीट किए गए अकाउंट का डेटा अब 180 दिन तक सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह है कि जांच एजेंसियों को जांच करने में आसानी हो। साथ ही अपराधियों का पीछा करना सरल हो सके।
इसके आलावा धोखाधड़ी वाले APK, की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करने की भी योजना बनाई जा रही है। व्हाट्सएप की तरह दूसरे मैसेजिंग ऐप्स को भी सुरक्षित बनाने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण हो सकता है।
![2e87fdb8-235]()
WhatsApp एक बहुत ही पॉपुलर मैसेजिंग ऐप है। इसे भारत में करोड़ों लोग इस्तेमाल करते हैं। इसी पॉपुलैरिटी का फायदा उठाकर साइबर ठग लोग WhatsApp पर नए अकाउंट बनाते हैं। इसके बाद भोले-भाले लोगों को शिकार बना लेते हैं। ऐसे में सरकार ने ठगों के जरिए इस्तेमाल होने वाली इन आईडी को ब्लॉक करने की योजना बनाई है।
डिवाइस आईडी दरअसल किसी भी गैजेट की पहचान होती है। ये एक यूनिक नंबर होता है। बिल्कुल उसी तरह जैसे भारत में हर किसी का आधार नंबर होता है। डिवाइस आईडी के कई प्रकार होते हैं जैसे कि IMEI नंबर*, मैक एड्रेस, डिवाइस सीरियल नंबर और एडवर्टाइजिंग नंबर।
![6b9de672-9fc]()
डिजिटल अरेस्ट स्कैम एक नया धोखाधड़ी तरीका है। इसमें ठग खुद को पुलिस या किसी एजेंसी का अफसर बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे निकालते हैं। इसमें WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है। सबसे पहले ये ठग victims को डराने के लिए उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी देते हैं।
इसके बाद उन्हें किसी दूसरे शहर में आकर जांच में शामिल होने को कहते हैं। यदि victim वहां जाने में असमर्थ होता है तो फिर उन्हें डिजिटल जांच के लिए किसी कैमरे के सामने रहने को कहा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल अरेस्ट कहते हैं।
![2b0f68a8-cc4]()
बीते दो सालों से बहुत से लोग डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार हो रहे हैं। इसमें साइबर ठग अलग-अलग तरीके से लोगों को ठगते हैं। इनमें फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल, पार्सल स्कैम, और यहां तक कि फर्जी नोटिस भेजकर डराने-धमकाने की घटनाएं सामने आई हैं। इस स्कैम से बचने के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि किसी अनजान नंबर से आने वाली कॉल पर भरोसा ना करें और घबराएं नहीं।
कोई फर्जी आरोप लगाकर डराने की कोशिश करता है तो उसकी बातों पर ध्यान ना दें। सबसे पहले आप नजदीकी पुलिस स्टेशन या संचार साथी के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके पूरी जानकारी दे सकते हैं। कोई अनजान शख्स फोन या वीडियो कॉल पर गवाही देने के लिए कहे तो समझ लें कि ऐसी कोई ऑनलाइन जांच नहीं होती। इसके लिए आप सीधे अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन जा सकते हैं।
ठग आपकी बैंक डिटेल्स और परिवार के सदस्यों की जानकारी मांग सकते हैं। फिर आपको OTP या जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को कह सकते हैं। ऐसे लोगों से सतर्क रहें और तुरंत उनकी शिकायत संचार साथी (संचार साथी ऐप) पर करें।
ये खबरें भी पढ़िए...
डिजिटल अरेस्ट कर रिटायर्ड वेटनरी डॉक्टर से 1.28 करोड़ की ठगी
इंदौर में रिटायर्ड अफसर से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.15 करोड़ की ठगी
ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड पर मिलोगा 25 हजार तक का मुआवजा, RBI ने जारी की नई गाइडलाइन
भोपाल में साइबर फ्रॉड का आतंक, कुछ दिनों में ही करोड़ों की ठगी, तीन दिन में 45 एफआईआर
इन स्कैम्स में अक्सर व्हाट्सएपका इस्तेमाल किया जाता है। यहां विक्टिम के पास व्हाट्सएपकॉल, वीडियो कॉल और मैसेज भेजे जाते हैं।
e87c5ca3-752
साइबर अपराधों से निपटने के लिए खास योजना
इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने साइबर स्कैमर्स के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। बार-बार नए अकाउंट बनाकर धोखाधड़ी करने वाले स्कैमर्स को रोकने की योजना बनाई जा रही है
साथ ही व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर भी सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए Skype जैसे सुरक्षा फीचर्स लागू करने पर विचार हो रहा है। इससे यूजर्स को ज्यादा सुरक्षा मिल सकेगी और स्कैम के मामलों में कमी आएगी।
IT Rules 2021 के तहत डिलीट किए गए अकाउंट का डेटा अब 180 दिन तक सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह है कि जांच एजेंसियों को जांच करने में आसानी हो। साथ ही अपराधियों का पीछा करना सरल हो सके।
इसके आलावा धोखाधड़ी वाले APK, की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करने की भी योजना बनाई जा रही है। व्हाट्सएप की तरह दूसरे मैसेजिंग ऐप्स को भी सुरक्षित बनाने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण हो सकता है।
2e87fdb8-235
फर्जी आकाउंट बनाकर धोखाधड़ी
डिवाइस आईडी दरअसल किसी भी गैजेट की पहचान होती है। ये एक यूनिक नंबर होता है। बिल्कुल उसी तरह जैसे भारत में हर किसी का आधार नंबर होता है। डिवाइस आईडी के कई प्रकार होते हैं जैसे कि IMEI नंबर*, मैक एड्रेस, डिवाइस सीरियल नंबर और एडवर्टाइजिंग नंबर।
6b9de672-9fc
क्या है डिजिटल अरेस्ट?
इसके बाद उन्हें किसी दूसरे शहर में आकर जांच में शामिल होने को कहते हैं। यदि victim वहां जाने में असमर्थ होता है तो फिर उन्हें डिजिटल जांच के लिए किसी कैमरे के सामने रहने को कहा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल अरेस्ट कहते हैं।
2b0f68a8-cc4
इन बातों का धयान जरूर रखें
कोई फर्जी आरोप लगाकर डराने की कोशिश करता है तो उसकी बातों पर ध्यान ना दें। सबसे पहले आप नजदीकी पुलिस स्टेशन या संचार साथी के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके पूरी जानकारी दे सकते हैं। कोई अनजान शख्स फोन या वीडियो कॉल पर गवाही देने के लिए कहे तो समझ लें कि ऐसी कोई ऑनलाइन जांच नहीं होती। इसके लिए आप सीधे अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन जा सकते हैं।
ठग आपकी बैंक डिटेल्स और परिवार के सदस्यों की जानकारी मांग सकते हैं। फिर आपको OTP या जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को कह सकते हैं। ऐसे लोगों से सतर्क रहें और तुरंत उनकी शिकायत संचार साथी (संचार साथी ऐप) पर करें।
मोबाइल नेटवर्क में फोन को पहचानने के लिए IMEI नंबर का इस्तेमाल होता है। ये सिम से जुड़ा होता है। MAC एड्रेस Wi-Fi या नेटवर्क की पहचान के लिए होता है। डिवाइस का सीरियल नंबर कंपनी द्वारा दिया जाता है। यह एक यूनिक नंबर होता है। वहीं Advertising ID का इस्तेमाल ऐप्स और विज्ञापनों के लिए किया जाता है।
डिजिटल अरेस्ट कर रिटायर्ड वेटनरी डॉक्टर से 1.28 करोड़ की ठगी
इंदौर में रिटायर्ड अफसर से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.15 करोड़ की ठगी
ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड पर मिलोगा 25 हजार तक का मुआवजा, RBI ने जारी की नई गाइडलाइन
भोपाल में साइबर फ्रॉड का आतंक, कुछ दिनों में ही करोड़ों की ठगी, तीन दिन में 45 एफआईआर
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava