ग्वालियर हाईकोर्ट फीस घोटाले पर जबलपुर HC सख्त, अब होगी इंटरनल जांच
समझें क्या है पूरा मामला
- PIL में कोर्ट फीस की कथित फर्जी रसीदों का मुद्दा उठाया गया है।
- याचिका में 2020-2021 से यह गड़बड़ी चलने का दावा है।
- बिना पेमेंट आईडी वाली रसीदों से केस दाखिल करने का आरोप है।
- याचिकाकर्ता ने करोड़ों के राजस्व नुकसान का दावा किया है।
- जांच, ऑडिट और कोर्ट सॉफ्टवेयर सुधारने की मांग की गई है।
ग्वालियर हाईकोर्ट में हुआ कोर्ट फीस घोटाला
ग्वालियर में कोर्ट फीस से जुड़ा मामला जबलपुर हाईकोर्ट पहुंचा है। यह मामला जनहित याचिका के रूप में दाखिल किया गया है। याचिका W.P. संख्या 31568/2026 के तहत पेश हुई है। याचिकाकर्ता मनोज पाल अधिवक्ता लिपिक हैं। उन्होंने खुद यह याचिका जनहित में दायर की है। एक्टिंग चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच ने मामले की जांच का आश्वासन दिया।
कोरोना काल से कथित फर्जी रसीदों का आरोप
याचिका में कोविड काल का घटनाक्रम सामने रखा गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार गड़बड़ी 2020-2021 में शुरू हुई। कुछ अधिवक्ताओं पर प्रोविजनल रसीदें लगाने का आरोप है। इन रसीदों को कोर्ट फीस भुगतान का प्रमाण बताया गया। याचिका में इस प्रक्रिया को नियमों के खिलाफ बताया गया है। दावा है कि यह प्रक्रिया करीब पांच साल चली।
पेमेंट आईडी क्यों जरूरी है
कोर्ट में दया याचिका में पेमेंट आईडी अहम पहचान होती है। दावे के अनुसार असली रसीद सिस्टम से बनती है। उस रसीद पर यूनिक पेमेंट आईडी दर्ज रहती है। कथित फर्जी रसीदों में यह आईडी नहीं मिली। याचिकाकर्ता ने इसे फीस भुगतान नहीं होने का संकेत बताया है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच से ही होगी।
आईटी सिस्टम में डेटा नहीं मिलने का दावा
याचिका में हाईकोर्ट के आईटी अधिकारी का भी जिक्र है। याचिकाकर्ता ने रसीदों की सिस्टम से जांच कराई। दावा है कि कुछ रसीदों का डेटा नहीं मिला। इसी आधार पर रसीदों को फर्जी बताया गया। याचिका में इसे सिस्टम की गंभीर खामी से जोड़ा गया है। साथ ही कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
किन मामलों में कथित गड़बड़ी का आरोप लगा
याचिका में कई तरह के मामलों का उल्लेख है। इनमें मिस अपील और फर्स्ट अपील शामिल हैं। सेकंड अपील और रिट याचिकाओं का भी जिक्र है। याचिकाकर्ता ने ऐसे मामलों की बड़ी संख्या बताई है। इन मामलों में फीस सत्यापन की जांच मांग गई है। इस जांच से वास्तविक नुकसान का पता चल सकता है।
आधी कीमत पर रसीदें बेचने का भी आरोप
याचिका में कथित फर्जी रसीदें बेचने का आरोप है। दावा है कि इन्हें आधी कीमत पर दिया गया। इससे दूसरे वकीलों को भी फायदा पहुंचने का आरोप है। याचिका में इसे योजनाबद्ध तरीके से किया गया बताया गया है। हालांकि आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
डिफॉल्ट हटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल
याचिका में डिफॉल्ट हटाने की प्रक्रिया पर सवाल हैं। दावा है कि फीस जमा नहीं होने पर डिफॉल्ट बनता है। इसके बाद फीस जमा करने के लिए अलग आईडी होती है। याचिकाकर्ता ने महीनों बाद रसीदें स्वीकार होने का दावा किया। कुछ मामलों में डिफॉल्ट हटाने का भी आरोप लगाया गया। याचिका में इसे गंभीर लापरवाही बताया गया है।
फीस जमा करने के दस्तावेजों का दावा
याचिका के साथ कुछ अन्य दस्तावेज भी पेश किए गए है। दावा है कि कुछ वकीलों ने बाद में फीस जमा की। इसके बाद वैध दस्तावेज अदालत में पेश किए गए। याचिकाकर्ता ने इसे शुरुआती भुगतान पर सवाल बताया है। इन दस्तावेजों की जांच से आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी।
अधिकारियों को पहले भी शिकायत दी
याचिकाकर्ता के अनुसार उसने अधिकारियों को पहले जानकारी दी। इस संबंध में अभ्यावेदन भी दिया गया था। याचिका में इसका संलग्नक P/1 बताया गया है। दावा है कि शिकायत के बाद कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई। याचिकाकर्ता ने खुद मुकदमे का खर्च उठाने की बात कही।
करोड़ों के राजस्व नुकसान का दावा
याचिका में करोड़ों रुपए के नुकसान का दावा किया गया है। वास्तविक वित्तीय नुकसान अभी तय नहीं माना जा सकता। इसके लिए सभी संबंधित मामलों का ऑडिट जरूरी होगा। याचिका में वर्ष 2020-2021 से ऑडिट कराने की मांग है। ऑडिट से कथित नुकसान का वास्तविक आंकड़ा सामने आ सकता है।
स्वतंत्र जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
याचिकाकर्ता ने स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की है। जांच निष्पक्ष और तय समय में कराने की मांग है। सभी संबंधित मामलों की जांच कराने की मांग है। दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग की गई है। इसमें अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और अधिकारियों का उल्लेख है। नुकसान होने पर उसकी वसूली की मांग भी है।
कोर्ट ने कहां हम करवाएंगे इंटरनल जांच
इस मामले की सुनवाई सोमवार 24 अगस्त को एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिविजनल बेंच में हुई। कोर्ट ने आरोपों को गंभीर मानते हुए याचिका को सुनवाई के योग्य पाया है। कोर्ट ने अस्वस्थ किया कि हम इस मामले की इंटरनल जांच करवाएंगे। इस मामले का विस्तृत आदेश अभी आना बाकी है लेकिन कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश जारी कर दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2026 को तय की गई है।
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