ग्वालियर में अवैध खनन पर हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन, 16 खदानों पर तत्काल रोक
समझें क्या है पूरा मामला
- हाईकोर्ट ने ग्वालियर की 16 खदानों पर रोक लगाई है।
- मामला 2017 से लंबित अवैध खनन प्रकरणों से जुड़ा है।
- कोर्ट ने एसडीओ की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
- कलेक्टर को अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी दी गई है।
- अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 को होगी।
16 खदानों पर लगी रोक
ग्वालियर जिले में अवैध खनन मामले पर बड़ा फैसला आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 16 खदानों पर रोक लगाई है। कोर्ट ने तत्काल खनन गतिविधियां बंद करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला लंबे समय से चल रहे अवैध खनन विवाद से जुड़ा है। कोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कई अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि वर्ष 2017 से मामले लंबित हैं। इसके बाद भी कई मामलों में कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना है। जिन खदानों पर रोक लगी है, उनमें बच्चन सिंह सहित कई पट्टाधारक शामिल हैं। इनमें एके जैन और जेजे ग्रेनाइट भी शामिल हैं। इसके अलावा पीताम्बरा ग्रिट इंडस्ट्रीज, कल्लू उर्फ दीनदयाल का नाम भी है। रामनिवास शर्मा, राजेश नीखरा और अन्य खदान संचालक भी शामिल हैं।
पुराने मामलों पर कोर्ट नाराज
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुराने रिकॉर्ड देखे। अदालत के सामने वर्ष 2017 के नोटिस का मुद्दा आया। इन खदानों पर अवैध खनन के आरोप लगे थे। कुछ मामलों में स्वीकृत क्षेत्र से बाहर खनन की बात सामने आई थी। प्रशासन ने रॉयल्टी और जुर्माने की वसूली के लिए नोटिस जारी किए थे। इसके बाद भी कई मामलों का समाधान नहीं हुआ।
कोर्ट ने पूछा कि इतने वर्षों तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अदालत ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी जिम्मेदारी निभाने में देरी गंभीर विषय है। अवैध गतिविधियों को रोकना प्रशासन का दायित्व है।
एसडीओ पर अवमानना कार्रवाई
डबरा के अनुविभागीय अधिकारी रुपेश रतन सिंघई कोर्ट में उपस्थित हुए। कोर्ट ने उनके जवाब और रिपोर्ट पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि अनुपालन रिपोर्ट में महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए गए। कोर्ट ने इसे गंभीर मामला माना। मामले में बच्चन सिंह की खदान का उदाहरण सामने आया। कोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 में पट्टा नवीनीकरण हुआ था।
उस समय बिना अनापत्ति प्रमाणपत्र के प्रक्रिया पूरी होने का आरोप है। वहीं, बड़ी राशि की रॉयल्टी और जुर्माना लंबित था। कोर्ट के अनुसार 21 करोड़ रुपए से ज्यादा रॉयल्टी लंबित थी। इसके अलावा 17.53 करोड़ रुपए से ज्यादा जुर्माना भी बताया गया। हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए। एसडीओ को 15 दिनों में जवाब देने को कहा गया है।
कलेक्टर की तय हुई जिम्मेदारी
सुनवाई में ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान भी मौजूद रहीं। कोर्ट ने जिले में अवैध खनन रोकने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि अब इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी कलेक्टर की होगी। अवैध परिवहन रोकने पर भी ध्यान देने को कहा गया है। कोर्ट ने ई-चेक पोस्ट व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी को लेकर नाराजगी जताई गई।
अदालत ने सभी डीवीआर और फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश दिए। इन्हें सीलबंद लिफाफे में पेश करने को कहा गया है। कोर्ट ने कहा कि फुटेज गायब मिली तो कार्रवाई होगी। इसे साक्ष्य मिटाने की कोशिश माना जा सकता है।
नए सीमांकन पर रोक
हाईकोर्ट ने नए सीमांकन की प्रक्रिया पर भी रोक लगाई है। प्रशासन द्वारा कराए जा रहे नए सीमांकन पर सवाल उठे थे। अदालत ने कहा कि बिना अनुमति नया सीमांकन नहीं होगा। आगे की कार्रवाई वर्ष 2017 की रिपोर्ट के आधार पर होगी। कोर्ट ने पुराने रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण माना है। अब प्रशासन को उसी आधार पर कदम उठाने होंगे।
इस मामले में अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 को होगी। उस दिन संबंधित रिपोर्ट भी पेश की जाएगी। मामला केवल खनन तक सीमित नहीं है। इसमें प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा भी जुड़ा है। हाईकोर्ट का आदेश अवैध खनन रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे जिले में खनन गतिविधियों पर सीधा असर पड़ेगा।
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