चंबल अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ड्राइवरों को नहीं, खनन के बड़े खिलाड़ियों को पकड़ो

Jageshwar prasad | May 21, 2026, 08:51 IST
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Ashish Bhardwaj - 2026-05-21T085041.774
Photograph: (the sootr)

सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में अवैध खनन पर सख्ती दिखाते हुए कहा कि सिर्फ ड्राइवरों को नहीं, बड़े खिलाड़ियों को पकड़ो। राजस्थान सरकार के मॉडल की सराहना करते हुए फॉरेस्ट गार्ड्स की भर्ती तेज करने और जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य करने के निर्देश दिए।

News In Short

  • चंबल अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा - होमगार्डों के भरोसे पूरी व्यवस्था नहीं चल सकती।
  • अदालत ने निर्देश दिया- छोटे चालकों की जगह खनन के बड़े खिलाड़ियों को पकड़ा जाए।
  • राजस्थान का अवैध खनन रोकने का मॉडल बना दूसरे राज्यों के लिए मिसाल।
  • वन विभाग ने 40 संवेदनशील स्थानों की पहचान की, AI सीसीटीवी से होगी निगरानी।
  • 31 जुलाई तक खनन वाहनों में जीपीएस लगाने का काम पूरा करने के निर्देश।

News In Detail

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकारों को साफ निर्देश दिया है कि सिर्फ अवैध वाहनों के चालकों को पकड़ने से काम नहीं चलेगा। अदालत ने कहा कि खनन के बड़े खिलाड़ियों को पकड़ना होगा। वहीं, होमगार्डों के भरोसे पूरी व्यवस्था कैसे चल सकती है, इस पर भी अदालत ने नाराजगी जताई।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि अदालत केवल सरकार की योजनाओं और शपथ पत्रों से संतुष्ट नहीं होगी, बल्कि जमीन पर वास्तविक और प्रभावी प्रगति दिखाई देनी चाहिए।

राजस्थान मॉडल की सराहना

हालांकि, अदालत ने राजस्थान सरकार द्वारा अवैध खनन रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की। पीठ ने कहा कि राजस्थान ने जो मॉडल विकसित किया है, वह भविष्य में दूसरे प्रदेशों के लिए रोल मॉडल बन सकता है।

अदालत ने राज्य सरकार को वन रक्षकों (फॉरेस्ट गार्ड्स), रेंजर्स और फील्ड स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया तेज करने के भी निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि जंगलों और वन्यजीवों की प्रभावी सुरक्षा के लिए कर्मियों की संख्या बढ़ाना जरूरी है।

40 संवेदनशील स्थानों की पहचान

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध खनन से प्रभावित 40 स्थानों की पहचान कर ली गई है। वन विभाग ने कहा कि अब इन क्षेत्रों में AI आधारित हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी निगरानी प्रणाली शुरू की जाएगी। इसे रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए कंट्रोल रूम और कमांड सेंटर से जोड़ा जाएगा।

विभाग ने यह भी बताया कि अवैध खनन में उपयोग होने वाले ट्रैक्टर, डंपर, एक्सकेवेटर और अन्य वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

31 जुलाई तक पूरा होगा GPS इंस्टालेशन

खनन विभाग ने अदालत को अवगत कराया कि धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, बूंदी और कोटा जिलों में जीपीएस लगाने का कार्य जारी है। विभाग ने आश्वासन दिया कि यह काम 31 जुलाई 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।

परिवहन विभाग ने बताया कि धौलपुर जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तहत सभी खनन वाहनों में जीपीएस अनिवार्य कर दिया गया है। निर्देशों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।

सरकार ने बताई प्रगति

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और एएजी शिव मंगल शर्मा ने पक्ष रखते हुए बताया कि 14 मई 2026 को दिए गए आदेश के पालन में मुख्य सचिव ने सभी विभागों में समन्वय के निर्देश दे दिए हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत में एसीएस होम, एसीएस वन एवं पर्यावरण, एसीएस खान एवं पेट्रोलियम, प्रमुख परिवहन सचिव, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, पीसीसीएफ और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक उपस्थित रहे।

कोर्ट की अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले की बारीकी से निगरानी करेगा। अदालत ने राज्य सरकार से अगली सुनवाई में इन निर्देशों के पालन की रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि उसे यह देखना है कि क्या सिर्फ कागजों पर ही कार्रवाई हो रही है या जमीन पर भी असर दिख रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

चंबल अवैध खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को मुख्य रूप से क्या निर्देश दिया है?

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि पुलिस सिर्फ अवैध बजरी- पत्थर ले जा रहे वाहनों के ड्राइवरों को पकड़कर खानापूर्ति न करे, बल्कि खनन सिंडिकेट को चलाने वाले मुख्य सरगनाओं (बड़े खिलाड़ियों) को गिरफ्तार करे।

अवैध खनन पर लगाम कसने के लिए किन 5 जिलों में वाहनों पर जीपीएस लगाना अनिवार्य किया गया है?

राजस्थान के धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, बूंदी और कोटा जिलों में खनन गतिविधियों में शामिल सभी वाहनों में जीपीएस लगाना अनिवार्य किया गया है।

सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए कोर्ट ने सरकार को क्या सलाह दी है?

कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा को केवल होमगार्ड के भरोसे नहीं रखा जा सकता। सरकार वन रक्षकों, रेंजर्स और फील्ड स्टाफ की नियमित भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाए ताकि वन्यजीवों की प्रभावी सुरक्षा हो सके।

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