एमपी बोर्ड की लापरवाही से डिप्रेशन में गई 12वीं की छात्रा, रीटोटलिंग के बाद हुई पास
समझें क्या है पूरा मामला
- ग्वालियर की 12वीं की एक छात्रा को बोर्ड ने अंग्रेजी में फेल कर दिया था।
- रिजल्ट में छात्रा को 71 नंबर की जगह सिर्फ 11 नंबर दिए गए थे।
- फेल होने के सदमे से छात्रा गहरे मानसिक तनाव और डिप्रेशन में चली गई।
- तबीयत ज्यादा बिगड़ने के कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
- करीब डेढ़ महीने बाद रीटोटलिंग में छात्रा के असली नंबर सामने आए।
एमपी बोर्ड की लापरवाही
MP Board 12th Result:मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक बेहद झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहां माध्यमिक शिक्षा मंडल यानी एमपी बोर्ड की एक बड़ी लापरवाही देखने को मिली है। इस लापरवाही ने एक होनहार छात्रा को मेन्टल टॉर्चर के बहुत बुरे दौर में धकेल दिया। बोर्ड की इस बड़ी गलती के कारण छात्रा का पूरा भविष्य दांव पर लग गया था। ग्वालियर के गोल पहाड़िया इलाके में रहने वाली अनामिका रावत ने 12वीं की परीक्षा दी थी। अनामिका पढ़ने में हमेशा से बहुत अच्छी रही है और उसे बेहतर परिणाम की उम्मीद थी।
रिजल्ट के बाद डिप्रेशन में अनामिका
जब एमपी बोर्ड का रिजल्ट (mp board 12th exam) घोषित हुआ तो अनामिका के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे अंग्रेजी विषय में केवल 11 नंबर देकर फेल घोषित कर दिया गया था। अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा होने के बाद भी फेल देखकर अनामिका पूरी तरह टूट गई।
हमेशा अच्छे नंबर लाने वाली छात्रा समझ ही नहीं पा रही थी कि ऐसा कैसे हुआ। इसके बाद अनामिका की मानसिक स्थिति लगातार बहुत ज्यादा खराब होती चली गई। उसने खुद को कमरे में बंद कर लिया और रोने लगी।
हालत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती
अनामिका ने डिप्रेशन के कारण खाना-पीना बिल्कुल छोड़ दिया था और किसी से बात नहीं कर रही थी। वह पूरी तरह से अकेलेपन का शिकार हो गई थी। बेटी की ऐसी हालत देखकर उसका पूरा परिवार बहुत ज्यादा डर गया था।
हालत ज्यादा खराब होने पर परिजनों ने उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया। अनामिका ने बताया कि उस मुश्किल समय में उसके मन में आत्महत्या के ख्याल आ रहे थे। उसका आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की उम्मीद पूरी तरह से खत्म हो चुकी थी।
रीटोटलिंग के बाद बोर्ड की क्या सच्चाई
अनामिका के परिवार ने हिम्मत नहीं हारी और 16 अप्रैल को रीटोटलिंग के लिए अप्लाई किया। हालांकि पहली बार में बोर्ड ने कह दिया कि नंबरों में कोई बदलाव नहीं है। परिजनों के लगातार दबाव के बाद आखिरकार 29 मई को उसकी कॉपी दोबारा जांची गई।
इसके बाद जो सच सामने आया उसने बोर्ड के सिस्टम की पोल खोल दी। जिस अनामिका को 11 नंबर देकर फेल किया गया था, उसके असल में 71 नंबर थे। बोर्ड की इस लापरवाही ने अनामिका के कीमती डेढ़ महीने बर्बाद कर दिए।
लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ एक्शन
अनामिका की मां हेमलता रावत ने बताया कि उनकी बेटी की हालत देखकर वे सहम गए थे। उन्हें हर पल डर सताता था कि उनकी बेटी कोई गलत कदम न उठा ले। अब अनामिका और उसके परिवार ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की जांच की मांग की है। वे दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई चाहते हैं।
अनामिका का कहना है कि आज उसके साथ ऐसा हुआ है, तो न जाने कितने और बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा होगा। ऐसे लापरवाह लोगों को सजा मिलना बहुत जरूरी है।
FAQ
- ग्वालियर में एमपी बोर्ड की लापरवाही का पूरा मामला क्या है?
ग्वालियर की 12वीं की छात्रा अनामिका रावत को एमपी बोर्ड ने अंग्रेजी विषय में सिर्फ 11 नंबर देकर फेल कर दिया था। इसके बाद छात्रा डिप्रेशन में चली गई और अस्पताल पहुंच गई। बाद में जब दोबारा जांच हुई तो पता चला कि उसके असली नंबर 11 नहीं बल्कि 71 थे। - रिजल्ट में फेल होने के बाद छात्रा अनामिका की स्थिति कैसी हो गई थी?
रिजल्ट में खुद को फेल देखकर अनामिका गहरे मानसिक तनाव में चली गई थी। उसने खाना-पीना छोड़ दिया था और खुद को अलग-थलग कर लिया था। उसकी बिगड़ती हालत को देखकर परिजनों को उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां उसने बताया कि उसे आत्महत्या के विचार आ रहे थे। - अनामिका ने इस बड़ी लापरवाही के बाद सरकार से क्या मांग की है?
अनामिका ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की गुहार लगाई है। उसने मांग की है कि रिजल्ट तैयार करने में इतनी बड़ी लापरवाही बरतने वाले सभी दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
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