जीवायएमसी जमीन विवाद: हाईकोर्ट ने पुराने आदेश किए रद्द, अब नए सिरे से होगी सुनवाई
समझें क्या है पूरा मामला
- ग्वालियर यंग मेन्स क्लब ने जमीन को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी।
- क्लब ने राजस्व अधिकारियों के पुराने आदेशों को चुनौती दी थी।
- विवाद ललितपुर की 1 लाख 42 हजार 875 वर्ग फीट जमीन से जुड़ा है।
- कोर्ट ने पुराने आदेशों को रद्द करने का फैसला सुनाया।
- अब एसडीओ दोनों पक्षों को सुनकर नया फैसला करेंगे।
एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अहम फैसला दिया है। मामला ग्वालियर यंग मेन्स क्लब की जमीन से जुड़ा है। जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकल पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने जमीन से जुड़े पुराने आदेशों पर सवाल उठाते हुए उन्हें रद्द कर दिया है। अब इस मामले में नए सिरे से फैसला होगा।
19 साल पुरानी याचिका पर आया फैसला
ग्वालियर यंग मेन्स क्लब ने वर्ष 2007 में याचिका लगाई थी। क्लब ने कई राजस्व आदेशों को ग्वालियर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इन आदेशों का संबंध जमीन पर लगाए गए कर से था। मामला करीब 19 साल से अदालत में लंबित था। अब हाईकोर्ट ने इस विवाद पर अपना फैसला दिया है।
किस जमीन को लेकर था विवाद
यह विवाद ललितपुर क्षेत्र की जमीन से जुड़ा हुआ है। क्लब ने सात खसरा नंबरों की जमीन पर दावा किया। इनमें खसरा नंबर 67, 68, 69, 70 शामिल हैं। इसके अलावा 72, 73 और 74 भी शामिल हैं। इन सभी जमीनों का कुल क्षेत्रफल 1 लाख 42 हजार 875 वर्ग फीट है।
क्लब ने पुराने जमीन रिकॉर्ड का दिया हवाला
क्लब के वकील समीर कुमार श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। उन्होंने पुराने जमीन रिकॉर्ड का हवाला दिया। उनके अनुसार जमीन पहले ही क्लब को दी गई थी। यह रिकॉर्ड मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता से पहले का बताया गया। क्लब ने इसी आधार पर कर लगाने पर सवाल उठाया।
कर लगाने की कानूनी वजह पर विवाद
मामले में जमीन के इस्तेमाल को लेकर भी विवाद हुआ। क्लब ने कहा कि संबंधित कानून यहां लागू नहीं होता। इसी आधार पर कर का आकलन गलत बताया गया। क्लब ने हाईकोर्ट से पुराने आदेश रद्द करने की मांग की।
सरकार की ओर से क्या तर्क दिया गया
सरकारी वकील शीराज कुरैशी ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह बात पहली बार उठाई गई है। सरकार ने जमीन के खाली रहने की बात भी रखी। उसके अनुसार जमीन दो साल तक इस्तेमाल नहीं हुई। इसी आधार पर जमीन का उपयोग अलग माना गया था।
हाईकोर्ट ने कानूनी सवाल को अहम माना
कोर्ट ने मामले के मुख्य कानूनी सवाल पर ध्यान दिया। अदालत ने कानून लागू होने की स्थिति पर विचार किया। यदि कानून लागू नहीं होता, तो कर भी नहीं बनता। इसी वजह से पुराने आदेशों को कायम रखना उचित नहीं था। कोर्ट ने सभी विवादित आदेश रद्द कर दिए।
अब एसडीओ को फिर से सुनवाई करनी होगी
हाईकोर्ट ने मामले को नए सिरे से देखने का आदेश दिया। एसडीओ को दोनों पक्षों को सुनने का मौका देना होगा। इसके बाद मामले पर नया फैसला लिया जाएगा। इस प्रक्रिया में पुराने आदेश अब प्रभावी नहीं रहेंगे। अदालत ने दोनों पक्षों की बात सुनने पर जोर दिया।
फैसले का जमीन विवाद पर क्या असर होगा
इस आदेश से विवाद का अंतिम समाधान अभी नहीं हुआ है। अब एसडीओ को नए सिरे से फैसला करना होगा। इस फैसले में पुराने रिकॉर्ड पर भी विचार होगा। दोनों पक्ष अपनी बात प्रशासन के सामने रख सकेंगे। इसके बाद ही जमीन से जुड़े कर पर स्थिति साफ होगी।
क्या है इस मामले का सबसे अहम बिंदु
मामले का मुख्य सवाल जमीन पर कानून लागू होना है। इसी सवाल पर पुराने कर आदेशों को चुनौती मिली थी। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर कानूनी सवाल माना। इसी कारण पुराने आदेशों को रद्द किया गया। अब आगे की प्रक्रिया एसडीओ के स्तर पर होगी।
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