HC में बोला शासन, पूर्व पार्षद के कहने पर आश्रम को दिया भवन, संचालिका पर FIR क्यों नहीं
इंदौर के महाराणा प्रताप नगर स्थित प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ मारपीट मामले में सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें शासकीय अधिवक्ता ने स्टेटस रिपोर्ट पेश की और बताया कि 31 बुजुर्गों को अन्य आश्रम में शिफ्ट कर दिया। लेकिन दो मामलों में शासन घिर गया।
मौखिक कैसे काम हो जाता है
शासकीय अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि यहां दो भवन नगर निगम के थे। इन्हें पूर्व पार्षद (संतोष गौर) के मौखिक कहने के आधार पर आश्रम संचालिका नीलम दुबे को दे दिया गया था।
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यह निगम में मौखिक कैसे काम हो जाता है। इसके पहले गैस लाइन विस्फोट में भी यही हुआ था। उल्लेखनीय है कि वार्ड 31 में अवंतिका गैस लाइन पर ही बोरिंग मशीन चला दी थी, जिससे विस्फोट में चार लोग घायल हुए। इसमें पार्षद बालमुकुंद सोनी का नाम आया और फिर उन पर केस हुआ।
संचालिक पर एफआईआर का क्या हुआ
वहीं हाईकोर्ट जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने यह भी पूछा कि इस मामले में संचालिक नीलम दुबे पर क्या हुआ, क्या एफआईआर हुई। इस पर अधिवक्ता ने बताया कि उन पर एफआईआर नहीं हुई है। हालांकि आश्रम को सील कर दिया है। निगम ने उन पर कब्जा ले लिया है।
हाईकोर्ट ने मांगी यह सभी जानकारी
हाईकोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट के 18 अगस्त की अगली सुनवाई में जानकारी मांगी है कि इंदौर और आसपास के जिलों में कितने वृद्धाश्रम संचालित हो रहे हैं। यह भी पूछा कि जहां पर इस आश्रम के वृद्द को शिफ्ट किया है, उनकी स्थिति कैसी है, उन आश्रम में पहले से कितने बुजुर्ग है, इन सभी की जानकारी भी शासन उपलब्ध कराए।
उधर निगम ने अपना ही भवन तोड़ा
उधर निगम ने हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अपना ही भवन तोड़ दिया। सुबह ही निगम की टीम मौके पर पहुंची और आश्रम खाली करने के बाद बुलडोजर चलवा दिया।
29 जुलाई को आया था वीडियो सामने
इंदौर में 29 जुलाई की रात को एक वीडियो सामने आया इसमें एक 13 साल का बालक वृद्दों को डंडे से पीट रहा है। यह वीडियो बाणगंगा थाना एरिया में वार्ड 12 में स्थित महाराण प्रताप नगर आश्रम का था।
इसमें जिला प्रशासन ने सख्ती करते हुए 30 जुलाई को टीम भेजकर जांच की और आश्रम को बिना मान्यता के संचालन पर सील कर दिया था। इसमें हाईकोर्ट इंदौर ने भी संज्ञान लिया। प्रशासन से स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई। इस पर सोमवार को सुनवाई हुई।
स्टेटस रिपोर्ट में खुलासा, भवन तो निगम का है
इस स्टेटस रिपोर्ट में जिला प्रशासन ने खुलासा किया है कि जिस भवन में यह आश्रम संचालित हो रहा है वह तो नगर निगम का सामुदायिक भवन है। यह निगम की संपत्ति है।
इस पर आश्रम संचालिक नीलम दुबे द्वारा अवैध कब्जा किया गया या फिर निगम ने इसे दिया यह स्थिति अभी साफ नहीं है और इसकी जांच की जा रही है।
बताया जा रहा है कि पूर्व पार्षद संतोष गौर के करीबी संबंधों का लाभ आश्रम संचालिका नीलम दुबे को मिला और उन्हें यह भवन ऐसे ही आश्रम संचालन के लिए दे दिया गया।
केवल फर्म एंड सोसायटी में रजिस्टर्ड
जांच में आया है कि आश्रम के पास केवल फर्म एंड सोसायटी का रजिस्ट्रेशन है, जो 27 नंवबर 2024 में हुआ था। लेकिन इसके बाद आश्रम ने कोई रिकार्ड सोसायटी को भी नहीं दिया है। वहीं नियम से सामाजिक न्याय विभाग से आश्रम संचालन की मंजूरी लेना होती है जो नहीं ली गई और बिना मंजूरी के ही आश्रम संचालित किया गया।
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