IAS विवेक पोरवाल और संदीप जीआर के गिरफ्तारी वारंट HC ने लिए वापस
समझें क्या है पूरा मामला...
- शीला सेन ने नियमितीकरण और वेतनमान को लेकर हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी।
- पुराने आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर हुई थी।
- 10 सितंबर को कोर्ट ने दोनों IAS अधिकारियों के खिलाफ वारंट जारी किया था।
- बाद में अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश का पर्याप्त पालन कर दिया।
- अब हाई कोर्ट ने वारंट वापस लेकर अवमानना याचिका खत्म कर दी है।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने दो IAS अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट वापस ले लिए हैं। मामला सिविल अवमानना याचिका क्रमांक 4449/2025 से जुड़ा है।
इस मामले में आईएएस विवेक पोरवाल और आईएएस संदीप जीआर के खिलाफ वारंट जारी हुए थे। वारंट 10 सितंबर 2026 के आदेश से जारी किए गए थे। ताजा आदेश में कोर्ट ने इन्हें वापस लेने का फैसला किया है।
आदेश का पालन हुआ तो गिरफ्तारी वारंट वापस
जस्टिस विवेक जैन की बेंच में मामले की सुनवाई हुई। वारंट वापस लेने के लिए आवेदन आईए क्रमांक 20784/2026 पेश हुआ। कोर्ट ने आवेदन में बताए कारणों को स्वीकार किया।
कोर्ट ने माना कि पुराने आदेश का पर्याप्त पालन हो चुका है। इसके बाद 10 सितंबर का गिरफ्तारी वारंट वापस ले लिया गया। इस फैसले से दोनों अधिकारियों को तत्काल राहत मिल गई।
15 सितंबर को जारी हुआ नया आदेश
सुनवाई के दौरान अधिकारियों के वकील ने नई जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 15 सितंबर को एक आदेश जारी किया गया है। इस आदेश में शीला सेन का वेतन फिर से तय किया गया है।
वेतन का निर्धारण 1 सितंबर 2016 से किया गया है। यह वेतन तय नियमों के अनुसार तय किया गया है। अब केवल पुराने बकाये का भुगतान होना बाकी है।
अब 30 दिन में देना होगा बकाया पैसा
हाई कोर्ट ने बकाया राशि के भुगतान की समय सीमा तय की है। कोर्ट ने 30 दिन के भीतर पूरा बकाया देने को कहा है। अधिकारियों की ओर से 15 दिन में भुगतान की बात कही गई थी।
हालांकि, कोर्ट ने 30 दिन की समय सीमा तय की है। इस अवधि में भुगतान नहीं हुआ तो मामला फिर खुल सकता है। शीला सेन को दोबारा आवेदन देने की छूट दी गई है।
भुगतान नहीं हुआ तो फिर शुरू हो सकती है सुनवाई
हाई कोर्ट ने शीला सेन को खास राहत दी है। 30 दिन में बकाया नहीं मिलने पर वह फिर कोर्ट जा सकती हैं। इसके लिए उन्हें अवमानना याचिका फिर शुरू करने का आवेदन देना होगा। यानी मामला पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। भुगतान की शर्त पूरी होने पर ही विवाद पूरी तरह खत्म होगा।
हाई कोर्ट ने शर्त के साथ अवमानना याचिका खत्म की
कोर्ट ने तय शर्तों के साथ अवमानना याचिका का निपटारा कर दिया। आदेश में वेतन निर्धारण और बकाया भुगतान की स्थिति दर्ज की गई है। फिलहाल गिरफ्तारी वारंट वापस लिए जा चुके हैं। अब मुख्य मुद्दा बकाया राशि के भुगतान का रह गया है। शासन के द्वारा दिए गए जवाब के बाद याचिका का निपटारा कर दिया गया है।
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