कोर्ट में पेशी का आदेश, पर यात्रा का इंतजाम नहीं, छात्रा बोली-कहां से लाऊं 16 हजार

Neel Tiwari | Oct 13, 2026, 11:40 IST
जबलपुर कोर्ट में पेशी को लेकर छात्राओं ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जा रही AISF छात्रा श्रावणी और प्रीति प्रशांत को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने दोनों को जबलपुर कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए। वहीं छात्राओं का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें जबलपुर पहुंचाने का कोई इंतजाम नहीं किया। उन्होंने बताया कि आने-जाने में करीब 16 हजार रुपए खर्च होंगे, जो उनके लिए जुटाना मुश्किल है।

छात्रा को ही करना होगा जबलपुर पहुंचने का इंतजाम

दरअसल जबलपुर कोर्ट ने दोनों छात्राओं को सोमवार 12 अक्टूबर को जबलपुर में पेश करने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि पुलिस ने उन्हें जबलपुर पहुंचाने का कोई इंतजाम नहीं किया। दूसरी ओर हिरासत में लिए जाने के बाद दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। साथ ही उन्होंने कोर्ट से मामले में दखल देने की मांग की है।



आने-जाने का खर्च छात्रा पर छोड़ा!

छात्रा श्रावणी बुवा ने द सूत्र को बताया कि पुलिस ने उन्हें नोटिस दिया है। बाकि जबलपुर पहुंचने का इंतजाम करने की जिम्मेदारी उन्हीं पर छोड़ दी गई है।



श्रावणी के मुताबिक, जबलपुर आने-जाने में लगभग 16 हजार रुपए खर्च होंगे। एक छात्रा होने के नाते उनके लिए इतनी बड़ी रकम खर्च करना मुश्किल है। इसलिए वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में अपनी बात रखना चाहती हैं।



उन्होंने बताया कि वह कोर्ट को अपनी परेशानी बताएंगी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होने की अनुमति मांगेंगी। अब सवाल यह है कि जब हाईकोर्ट ने दोनों छात्राओं को पेश करने के निर्देश दिए हैं, तो पुलिस ने उन्हें जबलपुर पहुंचाने का इंतजाम क्यों नहीं किया?



पेशी के इंतजाम पर सवाल!

इस मामले में अब पुलिस की कार्रवाई और हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली में प्रदर्शन करने जा रहीं महिला कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। अब उन्हें कोर्ट में पेश करने के इंतजाम को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।



श्रावणी का आरोप है कि उन्हें जबलपुर पहुंचने का इंतजाम खुद करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि आने-जाने का खर्च उठाना भी उनके लिए मुश्किल है।



ऐसे में सवाल है कि जब हाईकोर्ट ने दोनों को पेश करने के निर्देश दिए हैं, तो इसकी व्यवस्था कौन करेगा? क्या छात्रा को खुद पैसे खर्च करके जबलपुर जाना होगा? फिलहाल इस मामले में पुलिस का पक्ष सामने नहीं आया है।



बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका क्या होती है?

बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका तब लगाई जाती है, जब किसी व्यक्ति को हिरासत में रखने पर सवाल उठते हैं। इसके जरिए कोर्ट से मामले में दखल देने और जरूरी कार्रवाई करने की मांग की जाती है।



ऐसे मामलों में कोर्ट संबंधित अधिकारियों से जवाब मांग सकता है। साथ ही हिरासत में रखे गए व्यक्ति को अपने सामने पेश करने का आदेश भी दे सकता है।



इस मामले में हाईकोर्ट ने दोनों छात्राओं को पेश करने के निर्देश दिए थे। अब सवाल है कि पुलिस और प्रशासन ने उन्हें कोर्ट तक पहुंचाने के लिए क्या इंतजाम किए? अधिकारियों का जवाब सामने आने के बाद ही इस बारे में स्थिति साफ हो पाएगी।



अब हाईकोर्ट में क्या होगा?

सोमवार की सुनवाई से पहले श्रावणी बुवा का बयान सामने आया है। उन्होंने आर्थिक परेशानी के कारण जबलपुर पहुंचने में असमर्थता जताई है। वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी बात रखना चाहती हैं।



अब सुनवाई में यह देखना अहम होगा कि दोनों महिलाओं की पेशी को लेकर क्या स्थिति सामने आती है। पुलिस इस मामले में क्या जवाब देती है। साथ ही हाईकोर्ट छात्रा की परेशानी पर क्या रुख अपनाता है इस पर भी नजर रहेगी।



फिलहाल पुलिस ने जबलपुर पहुंचने का इंतजाम क्यों नहीं किया और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की अनुमति मिलेगी या नहीं, इन सवालों के जवाब सामने आने बाकी हैं।



दिल्ली में प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई

बता दें कि यह मामला 10 अक्टूबर को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा प्रस्तावित प्रदर्शन (CJP Protest) से पहले सामने आया था। पुलिस ने दिल्ली जा रहे प्रदर्शनकारियों को भोपाल, इटारसी और ग्वालियर में रोकने की कार्रवाई की थी।



जानकारी के अनुसार कम से कम 30 प्रदर्शनकारियों को ट्रेनों से उतारकर हिरासत में लिया गया था।



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