हाईकोर्ट का आदेश- IAS के फार्महाउस पर छापा मारने वाले TI का सस्पेंशन आदेश मनमाना, बदला लेने वाला
News in Short
- महिला आईएएस के फार्महाउस पर जुआ छापे के बाद टीआई लोकेंद्र हिहोरे सस्पेंड हुए थे।
- हाईकोर्ट ने सस्पेंशन आदेश को मनमाना और बदला लेने वाला बताया।
- कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में घटनास्थल बदलने का दबाव था।
- याचिका के बाद टीआई का ट्रांसफर भी कर दिया गया।
- कोर्ट ने सस्पेंशन सहित पूरी कार्रवाई निरस्त कर दी।
News in Detail
महिला आईएएस वंदना वैद्य के आवलीपुरा (मानपुर) के फार्महाउस पर 10 मार्च की रात को पुलिस ने छापा मारा था। इसमें जुआ खेलते 20 लोग पकड़े गए और 13.67 लाख की राशि जब्त की गई। लेकिन 11 मार्च को ही काम में लापरवाही बरतने पर एसपी ग्रामीण यांगचेन डोलकर भूटिया ने उन्हें सस्पेंड कर दिया। इस पर मानपुर टीआई हिहोरे ने याचिका दायर कर गंभीर आरोप लगाए कि एफआईआर में दबाव के बाद भी उन्होंने आईएएस के फार्महाउस की जगह नहीं बदली, इसके कारण सस्पेंड किया गया। जस्टिस जय कुमार पिल्लई द्वारा आदेश जारी किया गया।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में की गंभीर टिप्पणी
हाईकोर्ट ने इस मामले में साफ लिखा कि यह आदेश पूरी तरह से मनमाना, दिखावटी और प्रतिशोधात्मक है। याचिकाकर्ता हिहोरे द्वारा साफ लिखा है कि आईएएस का घटनास्थल बदलने के लिए दबाव आया। लेकिन जब इसका पालन नहीं किया और सत्यनिष्ठा के साथ एफआईआर में सही लिखा तो सस्पेंड कर दिया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि इन आरोपों का प्रतिवादियों द्वारा ना खंडन किया गया, ना ही समर्थन, पूरे मामले में चुप्पी साधी रखी गई। लेकिन घटना का पूरा क्रम बताता है कि यह आदेश प्रतिशोधात्मक था और उच्च स्तर के आदेश का पालन नहीं करने के कारण किया गया। पुलिस द्वारा की गई जांच में भी कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है और पुराने केस गिनाए गए हैं।
पिक एंड चूज पॉलिसी से एक्शन
हाईकोर्ट ने यह भी लिखा कि इसी तरह का जुआकांड सिमरोल थाने में भी पकड़ा गया, लेकिन इसमें थाना प्रभारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस तरह की पिक एंड चूज पॉलिसी नहीं चल सकती। जबकि मानपुर टीआई द्वारा की गई कार्रवाई अपराध को रोकने वाली थी और दस्तावेज से साफ है कि वह गश्त पर थे और मुखबिर से सूचना मिलने पर मौके पर गए और जुआ पकड़ा। अन्य किसी द्वारा यह सूचना नहीं दी गई थी। ना ही यह कहीं पर आया कि पहले से ही जुआ चल रहा था और टीआई को इसकी खबर थी।
याचिका लगाई तो ट्रांसफर कर दिया
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि घटना से यह साफ दिख रहा है कि जब याचिकाकर्ता द्वारा आदेश के खिलाफ याचिका दायर की गई तो उसे ट्रांसफर कर दिया गया। इसके चलते इस मामले में आदेश देने की स्थिति पैदा हो गई और एसपी द्वारा 11 मार्च को दिया गया सस्पेंशन आदेश निरस्त किया जाता है। इसके चलते हुई सभी कार्रवाई को भी निरस्त किया जाता है। हालांकि शासन पक्ष कानून के अनुसार उपयुक्त कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।
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