महिला IAS फार्महाउस जुआकांड में घिरी पुलिस, हाईकोर्ट ने पूछा IAS के बयान क्यों नहीं हुए, TI के दबाव वाले आरोप गंभीर

Sanjay Gupta | Apr 27, 2026, 17:34 IST
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ias gambling case
Photograph: (thesootr)

INDORE. इंदौर हाईकोर्ट ने महिला आईएएस के फार्महाउस पर जुआकांड मामले में पुलिस पर सख्त सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा कि आईएएस के बयान क्यों नहीं लिए गए। टीआई के दबाव के आरोपों को भी गंभीर बताया गया है।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला...

  • मानपुर में आईएएस फार्महाउस पर जुआकांड पकड़ा गया।
  • कार्रवाई के बाद टीआई समेत कई पुलिसकर्मी सस्पेंड।
  • हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
  • आईएएस के बयान नहीं लेने पर कोर्ट नाराज।
  • टीआई के दबाव के आरोप को बताया गंभीर।
मानपुर में महिला आईएएस के फार्महाउस से 10 मार्च की रात को पकड़े गए जुआकांड पर हाईकोर्ट इंदौर ने तल्ख टिप्पणियां की हैं। इसी केस के कारण मानपुर टीआई लोकेंद्र सिंह हिहोरे को एसपी ने सस्पेंड किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि आईएएस के बयान क्यों नहीं हुए, इस मामले में टीआई के आरोप गंभीर हैं कि उन्हें दबाव में हटाया गया है।

इंदौर में मप्र वित्त निगम की एमडी व 2009 बैच की आईएएस वंदना वैद्य के फार्महाउस पर 10-11 मार्च की दरमियानी रात जुआकांड पकड़ा गया। इसके बाद 11 मार्च को टीआई मानपुर लोकेंद्र सिंह हिहोरे के साथ ही एसआई मिथुन ओसारी और एएसआई रेशम गिरवाल को एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया ने सस्पेंड कर दिया। इस पर टीआई हिहोरे ने हाईकोर्ट में याचिका की है। इस पर सोमवार को लंबी सुनवाई हुई। इसमें हाईकोर्ट ने पुलिस उच्च अधिकारियों की पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर दिया।

टीआई ने क्या लगाए आरोप, क्या है मामला

टीआई हिहोरे को 11 मार्च को सस्पेंड कर दिया गया। साथ ही एसआई ओसारी और एएसआई गिरवाल को भी। हालांकि, 16 मार्च को ओसारी को बहाल कर दिया और गिरवाल को भी, क्योंकि गिरवाल पहले से छुट्टी पर थी। बाद में इसमें एसआई त्रिलोक बोरासी, एएसआई निलेश यादव व सुरेश भदौरिया को लाइन अटैच किया गया। उधर टीआई ने जब सस्पेंशन के खिलाफ याचिका दायर की तो 18 मार्च की शाम उन्हें बुरहानपुर अटैच करने का आदेश हो गया।

टीआई के आरोप हैं कि जुआकांड पकड़ने के बाद जब वह थाने पहुंचे तो दबाव आया कि आईएएस का नाम नहीं बताना है और घटनाक्रम अन्य जगह का एफआईआर में दिखा दो। जब मैंने यह मना कर दिया और एफआईआर में सभी सच लिखा तो मुझे उसी दिन सस्पेंड कर दिया गया। बाद में जब 18 मार्च को याचिका दायर की तो इसके बदले में इंदौर से बुरहानपुर अटैच कर दिया।

पूरी कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

इस पूरे मामले में इंदौर हाईकोर्ट बेंच ने सोमवार को करीब दो घंटे तक सुनवाई की। इसमें गंभीर सवाल उठाया गया कि जब इसकी प्राथमिक जांच हुई तो आईएएस के बयान क्यों नहीं लिए गए। मौके के सीसीटीवी व जानकारी कहां है, क्या इस फार्महाउस पर पहले से ही जुआ चल रहा था या फिर उसी घटना वाले दिन ही यह हुआ और पकड़ा गया।

शासन पक्ष ने बताया कि आईएएस के फार्महाउस पर सीसीटीवी नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने हैरानी जताई कि आजकल छोटे-छोटे घरों में यह होते हैं और आईएएस के फार्महाउस पर सीसीटीवी नहीं है।

आईएएस के दबाव वाले बयान पर जवाब कहां है

हाईकोर्ट ने बार-बार कहा कि टीआई ने जो याचिका लगाई, इसमें गंभीर आरोप लगाए हैं कि उच्च अधिकारियों ने आईएएस के दबाव में यह कार्रवाई की, क्योंकि मैंने एफआईआर में घटना स्थल नहीं बदला। यह आरोप बेहद गंभीर है और इस पर कोई साफ जवाब शासन की ओर से नहीं है।

फिर सिमरोल टीआई को क्यों नहीं हटाया

टीआई मानपुर हिहोरे ने यह भी आरोप लगाए कि 15 मार्च को सिमरोल में बड़ा जुआ पकड़ा, लेकिन उन टीआई पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर भी हाईकोर्ट ने तल्ख सवाल किया कि यदि उच्च अधिकारियों के आदेश थे तो सभी टीआई के लिए थे, फिर सिमरोल मामले में आपके द्वारा क्या कार्रवाई की गई, इस पर भी शासन पक्ष से कोई साफ जवाब नहीं दिया गया।

क्या संदेश देना चाहते हैं उच्च पुलिस अधिकारी

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि उच्च अधिकारी कुछ बोले वह नहीं करें या उनके बोलने पर जुआ पकड़े तो अलग बात थी। टीआई पेट्रोलिंग पर था, सूचना मिली, उच्च अधिकारी से वारंट लिया और वह छापा मारने गया और जुआ पकड़ा। फिर सस्पेंड क्यों किया, क्या एफआईआर में जगह नहीं बदली इसलिए।

इस घटना से तो यही संदेश जाता है कि उच्च अधिकारी की बात नहीं मानी, इसलिए उसी दिन सस्पेंड कर दिया। ऐसे तो कोई पुलिस वाला ड्यूटी ही नहीं करेगा, जुआ पकड़ने पर उसे सस्पेंड किया गया।

टीआई ने लगाई है दो याचिकाएं

इस मामले में टीआई ने दो याचिकाएं दायर की हैं। पहली में सस्पेंशन को चुनौती दी है और दूसरी में विभागीय जांच के तहत जारी की गई चार्जशीट को लेकर भी चुनौती दी गई है। अभी चार्जशीट मामले में सुनवाई होना बाकी है।

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