पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू गांव की रखी आधारशिला, 15 लाख में देंगे फ्लैट
बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri) ने छतरपुर में एक अनोखी पहल की शुरू की। उन्होंने बागेश्वर धाम परिसर में देश के पहले हिंदू गांव की नींव रख दी है। इसकी नींव बागेश्वर धाम में वैदिक मंत्रोच्चार और कन्या पूजन के साथ रखी गई। इस हिंदू गांव में बनने वाले मकानों के लिए बागेश्वर धाम समिति ने फ्लैट की कीमत भी तय कर दी गईं है। वहीं इस सबके बीच कांग्रेस ने इसको लेकर आपत्ति जताई है।
हिंदू राष्ट्र का सपना साकार करेंगे: धीरेंद्र शास्त्री
बागेश्वर धाम परिसर में बसाएंगे हिंदू गांव: धीरेंद्र शास्त्री
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि यह अनोखा गांव बागेश्वर धाम परिसर में विकसित किया जा रहा है। जिसमें लगभग 1000 हिंदू परिवारों को बसाया जाएगा। इसकी खासियत यह है कि इस गांव की जमीन बेची या खरीदी नहीं जा सकेगी। सभी घर एग्रीमेंट के आधार पर दिए जाएंगे। इस गांव में बसने के लिए सबसे जरूरी शर्त होगी। व्यक्ति की सनातन धर्म (Sanatan Dharma) में आस्था हो। इस गांव में गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूर्णतः वर्जित रहेगा।
तीन कैटगरी में मिलेंगी फ्लैट, 15 लाख से शुरू
पंडित धीरेंद्र शास्त्री के इस गांव में फ्लैट्स धर्म के नाम पर मिलेंगे इसका मतलब है कि गैर हिंदूओं को इस गांव में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बताया जा रहा है कि गांव में तीन प्रकार के फ्लोर होंगे और उनकी कीमतें तय कर दी गई हैं। ग्राउंड फ्लोर जिसकी कीमत 17 लाख रुपए होगी। फर्स्ट फ्लोर जिसकी कीमत 16 लाख रुपए होगी सेकेंड फ्लोर जिसकी कीमत 15 लाख रुपए रखी जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन मकानों की बुकिंग फाइनल होने पर 5 लाख रुपए एडवांस देना अनिवार्य होगा, जबकि बाकी की राशि एक साल के भीतर जमा करनी होगी।
कांग्रेस प्रवक्ता बोले सिख, ईसाई, मुस्लिम गांव भी बनाओवहीं हिंदू गांव को लेकर नया विवाद भी खड़ा हो गया है। कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हफीज ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री के हिंदू ग्राम की परिकल्पना पर सवाल उठाए। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुस्लिम, सिख और ईसाई गांव बनाने की अनुमति मांगी है। उन्होंने कहा कि अगर देश का संविधान धर्म के आधार पर गांव बसाने की अनुमति देता है, तो उन्हें भी मुस्लिम, ईसाई और सिख गांव बनाने की अनुमति दी जानी चाहिए।
क्या कहता है संविधान
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(e) के अनुसार, हर भारतीय नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में रहने और बसने की स्वतंत्रता है। यह प्रावधान देश के भीतर आंतरिक बाधाओं को दूर करने के लिए बनाया गया है। हालांकि, यह अधिकार अनुच्छेद 19(5) में उल्लिखित उचित प्रतिबंधों के अधीन भी है। यानी पंडित धीरेंद्र शास्त्री अधिकारिक रूप से हिंदू गांव जैसी परिवकल्पना को साकार नहीं कर सकते है।
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