International Tiger Day: आखिर क्यों पसंद है जंगल के राजा को मध्य प्रदेश
International Tiger Day: जंगल में जब एक बाघ दहाड़ता है, तो पूरा जंगल कांप उठता है। उसकी ताकत और खूबसूरती हर किसी को हैरान कर देती है। लेकिन एक दौर ऐसा भी आया था, जब इंसानों के लालच ने बाघों को खत्म करने की कगार पर पहुंचा दिया था। उनके सुंदर चमड़े और हड्डियों के लिए बड़े पैमाने पर शिकार होने लगा। जंगलों की अंधाधुंध कटाई से उनका प्राकृतिक घर पूरी तरह उजड़ गया था।
बीसवीं सदी की शुरुआत में दुनिया भर में एक लाख से ज्यादा बाघ मौजूद थे। लेकिन साल 2010 तक यह संख्या घटकर सिर्फ 3200 के करीब रह गई थी। यह पूरी दुनिया के पर्यावरण के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी थी। अगर बाघ खत्म हो जाते, तो पूरे जंगल का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता।
इसी खतरे को देखते हुए साल 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर में एक ऐतिहासिक बैठक बुलाई गई। दुनिया के 13 देशों ने मिलकर संकल्प लिया कि वे बाघों की आबादी को दोगुना करेंगे। इसी दिन से हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने की शुरुआत हुई।
भारत ने इस पूरे मिशन में दुनिया को रास्ता दिखाने का काम किया है। खास तौर पर मध्य प्रदेश ने बाघ संरक्षण में एक अनोखा इतिहास रचा है। आज मध्य प्रदेश को पूरे गर्व के साथ भारत का 'टाइगर स्टेट' कहा जाता है। आइए जानते हैं कि भारत और एमपी ने मिलकर बाघों को बचाने की यह ऐतिहासिक जंग कैसे जीती।
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस का इतिहास क्या है
साल 2010 में रूस में सेंट पीटर्सबर्ग सम्मेलन आयोजित हुआ था। इस सम्मेलन में बाघ वाले 13 देश एक साथ शामिल हुए थे। सभी देशों ने बाघों की संख्या दोगुना करने का वादा किया था। तभी से हर साल 29 जुलाई को बाघ दिवस मनाया जाता है।
इसका मुख्य उद्देश्य बाघों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। जंगलों के अवैध कटान को रोकना भी इसका एक बड़ा लक्ष्य है। बाघों के अवैध शिकार को खत्म करना इसका मुख्य संकल्प है। अब दुनियाभर में इसके बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
भारत में बाघों की स्थिति क्या है
भारत दुनिया में बाघों का सबसे बड़ा सुरक्षित घर बन चुका है। पूरी दुनिया के 75 फीसदी से ज्यादा बाघ भारत में रहते हैं। साल 2022 की गणना के मुताबिक, भारत में 3 हजार 682 बाघ मौजूद हैं। यह संख्या हर चार साल में बाघ जनगणना के जरिए मापी जाती है।
भारत में बाघों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। हमारे देश में कुल 55 से ज्यादा बाघ अभयारण्य मौजूद हैं। ये सभी अभयारण्य देश के विशाल जंगलों में फैले हुए हैं। बाघों का संरक्षण हमारे देश की प्राकृतिक पहचान का हिस्सा है।
एमपी कैसे बना टाइगर स्टेट
मध्य प्रदेश (MP) का टाइगर स्टेट बनने का सफर किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म से कम नहीं है। एक वक्त था जब अवैध शिकार और जंगलों की कटाई की वजह से यहाँ बाघों का वजूद खतरे में आ गया था। लेकिन एमपी ने गजब का कमबैक किया।
साल 2018 की बाघ गणना में एमपी ने 526 बाघों के साथ पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद 2022 की रिपोर्ट में एमपी ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ते हुए 785 बाघों के साथ टाइगर स्टेट के ताज पर फिर से कब्जा जमाया।
कान्हा (Kanha), बांधवगढ़ (Bandhavgarh), पेंच (Pench), सतपुड़ा (Satpura) और पन्ना (Panna) जैसे नेशनल पार्क्स में बाघों के लिए सेफ हैबिटेट तैयार किया गया। कोर एरिया से इंसानी दखल पूरी तरह खत्म कर दिया गया।
पन्ना टाइगर रिजर्व में एक समय बाघ पूरी तरह खत्म हो गए थे। लेकिन फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने टाइगर री-इंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट चलाकर दूसरे पार्क्स से बाघ लाकर बसाए, जो दुनिया भर में मिसाल बना।
जंगल के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों को कंजर्वेशन से जोड़ा गया और गाइड व जिप्सी ड्राइवर बनाकर रोजगार दिया गया। साथ ही स्मार्ट पेट्रॉलिंग और कैमरा ट्रैपिंग से शिकारियों पर नकेल कसी गई।
इसी डेडिकेशन और मैनेजमेंट के दम पर आज मध्य प्रदेश पूरी दुनिया में 'किंग ऑफ जंगल्स' यानी बाघों का सबसे बड़ा और सुरक्षित घर बना हुआ।
प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत कैसे हुई
भारत सरकार ने साल 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर शुरू किया था। इसकी शुरुआत उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान से हुई थी। इसका उद्देश्य बाघों को शिकारियों से पूरी तरह सुरक्षित बचाना था। शुरुआत में देश में केवल नौ बाघ अभयारण्य शामिल किए गए थे।
आज यह दुनिया का सबसे सफल वन्यजीव संरक्षण अभियान बन चुका है। सरकार ने बाघों के रहने के लिए अलग कोर जोन बनाए। इन इलाकों में इंसानी गतिविधियों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई। इससे बाघों को अपना परिवार बढ़ाने का सुरक्षित माहौल मिला।
बाघों की सुरक्षा के सरकारी नियम
सरकार ने बाघों के शिकार पर सख्त कानून बना रखे हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत शिकार करना बड़ा अपराध है। बाघ का शिकार करने पर कई साल की जेल हो सकती है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी NTCA इसकी निगरानी करता है।
जंगलों में गश्त लगाने के लिए विशेष ड्रोन का इस्तेमाल होता है। कैमरा ट्रैपिंग तकनीक से हर बाघ पर नजर रखी जाती है। जंगलों के अंदर स्मार्ट गश्ती दल दिन-रात तैनात रहते हैं। रेडियो कॉलर तकनीक से बाघों की लोकेशन आसानी से मिलती है।
हम बाघों को कैसे बचा सकते हैं
बाघों को बचाने के लिए जंगलों की कटाई रोकना बहुत जरूरी है। हमें अपने प्राकृतिक पर्यावरण और पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। जंगली जानवरों के अंगों से बनी चीजें कभी नहीं खरीदनी चाहिए। पर्यावरण आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना बेहद जरूरी काम है।
जंगल के आसपास रहने वाले लोगों को जागरूक बनाना चाहिए। बाघों के रास्तों यानी वाइल्डलाइफ कॉरिडोर को सुरक्षित रखना होगा। प्लास्टिक का कचरा जंगलों में फेंकने से हमेशा बचना चाहिए। स्थानीय समुदायों को जंगल की सुरक्षा में शामिल करना चाहिए।
बाघ संरक्षण का ऐतिहासिक महत्व
प्राचीन काल से ही बाघ हमारी भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। भगवान शिव और मां दुर्गा के साथ बाघ का गहरा संबंध है। बाघ को शक्ति और साहस का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। बाघ जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र का मुख्य राजा होता है।
अगर बाघ सुरक्षित रहेगा तो पूरा जंगल सुरक्षित बना रहेगा। जंगल सुरक्षित रहेंगे तो हमें शुद्ध हवा और पानी मिलता रहेगा। इसलिए बाघों को बचाना असल में इंसानियत को बचाना ही है। आने वाली पीढ़ियों के लिए बाघों को बचाना बेहद जरूरी है।
Reference:
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) - भारत सरकार
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)
- मध्य प्रदेश वन विभाग (MP Forest Department) आधिकारिक रिपोर्ट
- वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF India)
29 जुलाई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 29 जुलाई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 29 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1996: चीन ने लोपनोर में अपना 45वां भूमिगत परमाणु परीक्षण पूरा किया।
- 2000: अमेरिका ने पैमनसेट-9 संचार उपग्रह को यूक्रेन के रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष में भेजा।
- 2004: डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के तहत बिमस्टेक सम्मेलन के लिए बैंकॉक रवाना हुए।
- 2006: श्रीलंका के माहेला जयवर्धने और कुमार संगकारा ने टेस्ट क्रिकेट में 624 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी का विश्व रिकॉर्ड बनाया।
- 2007: वैज्ञानिकों ने एथेंस में प्रागैतिहासिक काल के एक हाथी के विशाल दांत की खोज की।
- 2008: इजराइल के प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने सीरिया के साथ शांति वार्ता के चौथे दौर के लिए अपने प्रतिनिधि तुर्की भेजे।
- 1894: पुदुचेरी के पहले मुख्यमंत्री एडौर्ड गौबर्ट का जन्म हुआ।
- 1904: आधुनिक भारतीय उद्योग के सिरमौर और टाटा समूह के प्रमुख जे. आर. डी. टाटा का जन्म हुआ।
- 1905: संयुक्त राष्ट्र संघ के दूसरे महासचिव डैग हैमरस्क्जोंल्ड का जन्म हुआ।
- 1922: प्रसिद्ध मराठी साहित्यकार, नाटककार और इतिहासकार बाबासाहेब पुरंदरे का जन्म हुआ।
- 1931: ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित तेलुगु भाषा के प्रख्यात कवि सी. नारायण रेड्डी का जन्म हुआ।
- 1960: लोकसभा के वर्तमान महासचिव उत्पल कुमार सिंह का जन्म हुआ।
- 1890: नीदरलैंड्स के विश्वप्रसिद्ध चित्रकार विन्सेंट वैन गो का निधन हुआ।
- 1891: महान समाज सुधारक, शिक्षाशास्त्री और स्वतंत्रता सेनानी ईश्वर चंद्र विद्यासागर का निधन हुआ।
- 1996: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख वीरांगना अरुणा आसफ़ अली का निधन हुआ।
- 2001: पोलैंड के पूर्व प्रथम सचिव एडवर्ड गिरेक का निधन हुआ।
- 2003: बॉलीवुड के सुप्रसिद्ध हास्य अभिनेता जॉनी वॉकर का निधन हुआ।
- 2009: जयपुर की पूर्व महारानी और अपनी सुंदरता के लिए चर्चित महारानी गायत्री देवी का निधन हुआ।
- 2012: कुचिपुड़ी नृत्य के प्रख्यात गुरु और शास्त्रीय नर्तक वेमपति चिन्ना सत्यम का निधन हुआ।
- 2015: प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय गायिका वसुंधरा कोमकली का निधन हुआ।
- 2017: हिंदी साहित्य की जानी-मानी कवयित्री स्नेहमयी चौधरी का निधन हुआ।
- अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day): दुनिया भर में बाघों के संरक्षण और जागरूकता के लिए यह दिवस मनाया जाता है।
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