एमपी में बुजुर्गों के लिए शुरू हुई होप योजना, घर तक पहुंचेगा इलाज

Aman Vaishnav | Feb 06, 2026, 10:50 IST
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मध्यप्रदेश में अब बुजुर्गों को घर बैठे इलाज मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने 'होप योजना' शुरू की है, जिसके तहत नर्सिंग स्टाफ अब बुजुर्गों के घर जाकर उनकी स्वास्थ्य जांच और इलाज करेंगे। यह योजना खासकर उन बुजुर्गों के लिए है जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं।

ऐसी बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष जो कई सालों से बीमार हैं। बिस्तर से उठ तक नहीं सकते हैं। इन्हें अब राहत मिलने वाली है। इस योजना का नाम होप (होम बेस्ड केयर प्रोग्राम फॉर एल्डरली) है।



इसके तहत नर्सिंग स्टाफ अब बुजुर्गों के घर जाकर उनकी स्वास्थ्य जांच और इलाज करेंगे। यह कदम बुजुर्गों की स्वास्थ्य सुविधाओं को उनके घर तक पहुंचाने में मदद करेगा।



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क्या है होप योजना?

होप योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की एक पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य उन बुजुर्गों तक इलाज पहुंचाना है, जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं। इसके अलावा, यह योजना उन बुजुर्गों का इलाज करने के लिए भी है जो गंभीर बीमारियों जैसे लकवा या मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। मध्यप्रदेश में लगभग 1 लाख बुजुर्ग हैं, जिनके लिए अस्पताल जाना बहुत मुश्किल हो जाता है।



अब तक यह योजना प्रदेश के 6 बड़े शहरों - भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और रीवा में लागू की गई है। इसके तहत बुजुर्गों को घर बैठे इलाज की सुविधा मिल रही है। अब तक 1214 बुजुर्गों ने होप एप में रजिस्ट्रेशन कराया है। सबसे बड़ी बात यह है कि सबसे ज्यादा मरीज भोपाल से हैं।



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इस तरह होगी इलाज

हर आशा कार्यकर्ता अब बुजुर्गों का सर्वे करेगी। शहरी स्वास्थ्य केंद्र में काम कर रही नर्सिंग ऑफिसर को एक खास जिम्मेदारी दी जाएगी। उनका काम होगा बुजुर्गों का चयन करके होप एप में उनकी जानकारी डालना। इसके बाद, नर्सिंग ऑफिसर होप किट लेकर बुजुर्ग के घर जाएगी और बीपी, शुगर, वजन जैसी जरूरी जांच करेगी।



साथ ही, एक फॉलोअप प्लान तैयार किया जाएगा। होप किट में ग्लूकोमीटर, बीपी मशीन, वेटिंग मशीन जैसे उपकरण होंगे। सारी जानकारी होप एप में डिजिटल रूप से सेव की जाएगी ताकि इलाज में कोई रुकावट न हो। जरूरत पड़ने पर टेली मानस के जरिए डॉक्टर से भी संपर्क किया जाएगा।



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देखभाल के तरीके बताए जाएंगे

इसमें नर्सिंग की देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, मानसिक सपोर्ट, रिहैबिलिटेशन और फिजियोथेरेपी शामिल हैं। साथ ही, घर के बाकी सदस्य को भी बुजुर्ग की देखभाल करने के तरीके (एमपी स्वास्थ्य विभाग) बताए जाएंगे।



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इसलिए जरूरी है ये योजना..

मध्यप्रदेश में 60 साल से ऊपर की उम्र के लोगों की संख्या 2025 में 57.12 लाख है। 2050 तक यह संख्या बढ़कर 1.82 करोड़ हो सकती है। इसी वजह से यह सुविधा शुरू की गई है।



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डॉ. सलोनी सिदाना, एमडी, एनएचएम ने बताया कि ये योजना बुजुर्गों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। खासकर उन वृद्धजनों के लिए, जो लकवे, ऑपरेशन के बाद की कमजोरी या गंभीर बीमारियों की वजह से चल-फिर नहीं सकते। ऐसे बुजुर्गों की दुनिया अब चार दीवारों तक सीमित हो गई है। उनके लिए यह योजना एक नई आशा की तरह है।



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