अस्पताल में झाड़-फूंक का वीडियो आया सामने, अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल
News in Short
- रीवा अस्पताल के सीएमओ कार्यालय के बाहर झाड़-फूंक इलाज हुआ।
- पांच साल से कमर दर्द से परेशान युवक का वीडियो वायरल हुआ।
- अस्पताल प्रशासन और व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए।
- परिवार ने वैज्ञानिक इलाज विफल होने पर पारंपरिक उपाय अपनाया।
- प्रशासन ने घटना की जांच शुरू की, स्वास्थ्य सुरक्षा पर असर।
News in Detail
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में युवक का झाड़-फूंक इलाज सामने आया। सीएमओ कार्यालय के गेट के बाहर यह घटना हुई। पांच साल से कमर दर्द से परेशान युवक का यह वीडियो और तस्वीरें वायरल हो गई हैं। अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय के गेट के बाहर एक युवक का झाड़-फूंक इलाज किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुछ लोग युवक पर मंत्र पढ़ते और झाड़-फूंक करते दिखाई दिए। इस दौरान अस्पताल परिसर में लोगों की भीड़ भी जमा हो गई।
अस्पताल परिसर में खुलेआम झाड़-फूंक
अस्पताल परिसर में खुलेआम झाड़-फूंक होने के बाद प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि मरीज वैज्ञानिक इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल आते हैं, वहां इस तरह की गतिविधियां होना गंभीर मामला है। वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रबंधन को भी जवाब देना पड़ा।
अस्पताल प्रशासन की निगरानी
अस्पताल प्रशासन ने फिलहाल इस घटना की जांच शुरू की है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से अस्पताल की निगरानी और विश्वास पर असर पड़ता है। मरीजों और उनके परिजनों को सुरक्षित और वैज्ञानिक इलाज की उम्मीद होती है।
अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर उठे सवाल
इस घटना ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि अस्पताल परिसर में धार्मिक या पारंपरिक इलाज कैसे होते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे इलाज से मरीजों की स्वास्थ्य सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
कमर दर्द से परेशान था मरीज
अग्रसेन साकेत, जो कोलूडीह गांव के निवासी हैं, पिछले पांच वर्षों से कमर दर्द से परेशान हैं। उनके परिजनों ने बताया कि युवक को कई जगह इलाज और दवाइयां लेने के बाद भी आराम नहीं मिला। इसी वजह से परिवार ने झाड़-फूंक का सहारा लिया।
क्या बोल रहे मरीज के परिजन?
अग्रसेन के परिजनों ने कहा कि युवक लंबे समय से दर्द से परेशान है। कई डॉक्टरों को दिखाने और दवाइयां लेने के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ। इस वजह से परिवार ने झाड़-फूंक को अंतिम विकल्प माना।
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