एमपी में हर तीसरे दिन एक पति की हत्या, देशभर में 322 पतियों की गई जान
समझें क्या है पूरा मामला...
- छह महीनों में देशभर में पति की हत्या के 322 मामले सामने आए हैं।
- इन मामलों में 60% की वजह अवैध संबंध बताई गई है।
- मध्य प्रदेश में पति की हत्या के 36 मामले सामने आए हैं।
- पुरुष अधिकारों की हेल्पलाइन पर मदद मांगने वाली कॉल्स में तेजी आई है।
- राष्ट्रीय पुरुष आयोग की मांग को लेकर 70 एनजीओ और 10-12 हजार एक्टिविस्ट आंदोलन से जुड़े हैं।
पति की हत्या के मामलों ने बढ़ाई चिंता
इंदौर के सोनम रघुवंशी केस से लेकर हाल में पुणे के सिया गोयल कांड तक, पत्नियों से जुड़े हत्या के मामलों को लेकर पुरुष अधिकार संगठन लगातार आवाज उठा रहे हैं।
इन संगठनों का कहना है कि ऐसे मामले अब सिर्फ सोशल मीडिया पर बनने वाले मीम्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पुरुषों के बीच भी डर और चिंता बढ़ा रहे हैं।
इसी वजह से पुरुष अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं की हेल्पलाइन पर मदद मांगने वाली कॉल्स तेजी से बढ़ी हैं। साथ ही राष्ट्रीय पुरुष आयोग की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन ने भी जोर पकड़ा है।
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छह महीनों में 322 पतियों की हत्या
जानकारी के अनुसार 2026 के पहले छह महीनों में देशभर में पति की हत्या के 322 मामले सामने आए हैं। इसी अवधि में पति की आत्महत्या के 232 मामले भी सामने आए हैं।
इन मामलों में 60 फीसदी की वजह अवैध संबंध बताई गई है। पति की हत्या के मामलों में मध्य प्रदेश देश में दूसरे नंबर पर है।
किस राज्य में कितने मामले सामने आए?
| राज्य | पति की हत्या के मामले |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 93 |
| मध्य प्रदेश | 36 |
उत्तर प्रदेश 93 मामलों के साथ पहले नंबर पर है। मध्य प्रदेश में 36 मामले सामने आए हैं। इसका अर्थ है कि एमपी में हर तीसरे दिन एक पति की हत्या हो रही है।
पुरुष आयोग की मांग को लेकर बढ़ रहा आंदोलन
राष्ट्रीय पुरुष आयोग की मांग को लेकर देशभर में आंदोलन चल रहा है। आंदोलन के कोऑर्डिनेटर पंकज पंत के मुताबिक, इस आंदोलन से 70 एनजीओ और करीब 10-12 हजार मेन्स राइट्स एक्टिविस्ट जुड़े हैं।
आंदोलन से जुड़े लोगों में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील डॉ. एपी सिंह, दीपिका नारायण भारद्वाज, केडी झा, बरखा त्रेहान, पंकज पंत, अतुल केसरी, जहूर खान, सत्य नारायण गुप्ता, भोपाल के जकी अहमद, अशोक दशोरा और मिलिंद अग्रवाल जैसे नाम शामिल हैं।
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ये संस्थाएं आंदोलन से जुड़ी
- पौरुष संस्था जुड़ी है।
- पुरुष आयोग आंदोलन जुड़ा है।
- न्याय संकल्प जुड़ा है।
- भाई संस्था जुड़ी है।
- फाइट फॉर जस्टिस समेत अन्य संस्थाएं जुड़ी हैं।
हेल्पलाइन पर बढ़े मदद मांगने वाले कॉल
पुरुषों के लिए संचालित तीन हेल्पलाइन के टॉप-10 राज्यों के आंकड़ों में भी बड़ी बढ़ोतरी दिखाई गई है।
आंदोलन के कोऑर्डिनेटर पंकज पंत के मुताबिक, साल 2025 में इन हेल्पलाइनों पर 58 हजार 289 कॉल आए थे। वहीं 2026 में जून तक ही कॉल की संख्या बढ़कर 87 हजार 969 हो गई है।
मध्य प्रदेश में भी बढ़े कॉल
मध्य प्रदेश से साल 2025 में हेल्पलाइन पर 8 हजार 108 कॉल आए थे। वहीं 2026 के जून तक यह संख्या बढ़कर 12 हजार 577 हो गई है।
हर पीड़ित का बनाया जा रहा रिकॉर्ड
पौरुष संस्था के अध्यक्ष एडवोकेट अशोक दशोरा के मुताबिक, उनकी संस्था अलग-अलग समाचार माध्यमों में प्रकाशित ऐसे मामलों का लगातार अध्ययन करती है।
संस्था ने हर पीड़ित का नाम, पता, उम्र और मामले से जुड़ी दूसरी जानकारी के साथ विस्तृत फाइल तैयार की है। इसमें हत्या की वजह भी दर्ज की जाती है, जिसमें विवाहेतर संबंध, विवाद और सुपारी किलिंग जैसे कारण शामिल किए गए हैं।
हर केस से जुड़ी खबरों की डिजिटल लिंक भी पीडीएफ फाइल में जोड़ी गई है।
पुरुषों की कानूनी मदद के लिए बनाया SIFONE ऐप
भाई संस्था के फाउंडर मेंबर जकी अहमद के मुताबिक, हेल्पलाइन पर आने वाली कई कॉल्स में लोग यह शिकायत करते हैं कि पत्नी और उसका प्रेमी उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं।
ऐसे मामलों में पुरुषों को अधिकार और कानूनी सहायता देने के लिए SIFONE ऐप बनाया गया है। इसका मकसद पुरुषों को उनके अधिकारों और कानूनी मदद से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराना है।
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