हायर एजुकेशन कमिश्नर प्रबल सिपाहा हाईकोर्ट में तलब, नहीं तो दंडात्मक कार्यवाही

Neel Tiwari | Sept 10, 2026, 17:48 IST
Photograph: (thesootr)
JABALPUR. मप्र हाईकोर्ट ने हायर एजुकेशन कमिश्नर प्रबल सिपाहा को तलब किया है। कोर्ट ने 11 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है। गैरहाजिरी पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। मामला बीएड कॉलेजों की संबद्धता से जुड़ा है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • हाईकोर्ट ने हायर एजुकेशन कमिश्नर प्रबल सिपाहा को तलब किया है।
  • उन्हें 11 सितंबर को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होना है।
  • कोर्ट ने गैरहाजिरी पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
  • मामला दो बीएड कॉलेजों की संबद्धता और प्रवेश से जुड़ा है।
  • कॉलेजों का कहना है कि बार-बार निरीक्षण से सत्र प्रभावित हो रहा है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा आयुक्त आईएएस प्रबल सिपाहा को तलब किया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की पीठ सुनवाई कर रही थी।



मामला रिट याचिका क्रमांक 31783/2026 से जुड़ा है। यह याचिका एसएस कॉलेज ऑफ एजुकेशन और एमए कॉलेज ऑफ एजुकेशन ने लगाई है। दोनों कॉलेज सीहोर में हैं और बीएड की पढ़ाई कराते हैं। दोनों कॉलेज बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं।



कोर्ट को सरकारी वकील से नहीं मिले निर्देश

8 सितंबर को मामले की सुनवाई दूसरी पीठ के सामने हुई थी। उस सुनवाई में उत्तरवादी नंबर तीन यानि हायर एजुकेशन कमिश्नर से निर्देश लेने कहा गया था। 10 सितंबर को सरकारी वकील पीयूष जैन कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने बताया कि अभी निर्देश नहीं मिले हैं। कोर्ट ने पूछा कि निर्देश आखिर किससे लेने हैं। इस पर उच्च शिक्षा आयुक्त का नाम सामने आया।



कोर्ट ने सरकारी रवैये पर जताई नाराजगी

कोर्ट ने इस स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई। पीठ ने राज्य सरकार के रवैये पर सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि वकील को जरूरी निर्देश तक नहीं मिल पाए। इसके बाद भी सरकारी वकील बिना निर्देश के कोर्ट पहुंचे। पीठ ने इसे बेहद गंभीर स्थिति माना।


कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में लापरवाही ठीक नहीं है।



11 सितंबर को व्यक्तिगत पेशी का आदेश

हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा आयुक्त को सीधे तलब किया है। उन्हें 11 सितंबर को कोर्ट में मौजूद रहना होगा। यह मामला उस दिन की कॉज लिस्ट में सबसे पहले रहेगा। कोर्ट ने आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने कहा है। अदालत ने गैरहाजिरी को लेकर भी साफ चेतावनी दी है।



गैरहाजिरी हुई तो दंडात्मक कार्रवाई

कोर्ट ने आदेश में बेहद स्पष्ट चेतावनी दी है। आयुक्त के पेश नहीं होने पर कार्रवाई हो सकती है। अदालत ने कहा कि उचित दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।।इसलिए 11 सितंबर की सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। अब आयुक्त की मौजूदगी और जवाब पर सबकी नजर रहेगी।



विवाद बीएड कॉलेजों की संबद्धता से जुड़ा है

  • मामले की जड़ में दो निजी बीएड कॉलेज हैं।
  • दोनों कॉलेजों ने यूनिवर्सिटी की कार्रवाई को चुनौती दी है।
  • कॉलेजों का आरोप है कि संबद्धता को लेकर देरी हुई।
  • इससे दोनों कॉलेज बीएड काउंसलिंग से बाहर हो गए।
  • कॉलेजों के अनुसार इससे पूरा शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो सकता है।

पहले भी हाईकोर्ट पहुंच चुके हैं दोनों कॉलेज

दोनों कॉलेजों ने इससे पहले भी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पहली याचिका 21921/2026 के रूप में दायर हुई थी। इसे 29 जून 2026 को वापस लिया गया था। उस समय यूनिवर्सिटी ने सशर्त संबद्धता जारी की थी।।बाद में फिर निरीक्षण की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद संबद्धता जारी रखने को लेकर विवाद बढ़ गया।



कॉलेजों का आरोप है कि निरीक्षण बार-बार हुआ

याचिका में यूनिवर्सिटी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। कॉलेजों ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया है। उनका कहना है कि संबद्धता समय पर मिलनी चाहिए थी। इसके बाद गर्मी की छुट्टियों में निरीक्षण कराया गया।।कुछ कमियों को लेकर कॉलेजों को नोटिस दिए गए।


कॉलेजों के अनुसार मामला इसके बाद भी नहीं सुलझा।



9 जुलाई को संबद्धता जारी रखने की सिफारिश हुई

याचिका के अनुसार 9 जुलाई को एक अहम बैठक हुई। एकेडमिक काउंसिल ने निरीक्षण रिपोर्ट पर चर्चा की। इसके बाद संबद्धता जारी रखने की सिफारिश की गई। कॉलेजों का कहना है कि विवाद यहीं खत्म हो सकता था। लेकिन बाद में फिर से निरीक्षण का फैसला लिया गया।



15 जुलाई को फिर पांच सदस्यीय टीम बनी

याचिका के अनुसार 15 जुलाई को नया फैसला हुआ। इसमें पांच सदस्यों की समिति से निरीक्षण कराने की बात हुई। कॉलेजों ने इस फैसले को बार-बार की प्रक्रिया बताया। उनका आरोप है कि इससे प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हुई। बीएड काउंसलिंग में कॉलेजों को जगह नहीं मिल सकी।



कॉलेजों ने कोर्ट से क्या मांग की

कॉलेजों ने हाईकोर्ट से कई राहत मांगी हैं। उन्होंने संबद्धता जारी रखने का आदेश मांगा है। उन्होंने काउंसलिंग में शामिल करने की मांग भी की है।



कॉलेजों ने काउंसलिंग की तारीख बढ़ाने की मांग रखी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और एनसीटीई के नियम लागू करने की मांग की है। अंतिम फैसले तक अंतरिम राहत भी मांगी गई है।



अब 11 सितंबर की सुनवाई अहम

10 सितंबर के आदेश के बाद मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। अब उच्च शिक्षा आयुक्त को खुद कोर्ट पहुंचना होगा। उन्हें कॉलेजों की संबद्धता से जुड़े सवालों पर जवाब देना होगा। कोर्ट पहले ही गैरहाजिरी पर कार्रवाई की चेतावनी दे चुका है। ऐसे में अगली सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी।



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