जिस पर भागीरथपुरा कांड में थे लापरवाही के आरोप, उस आईएएस रोहित सिसोनिया को बनाया रायसेन कलेक्टर, कांग्रेस हमलावर

CHAKRESH | Oct 14, 2026, 14:09 IST
MP में लापरवाही के आरोपों पर कार्रवाई की जगह मलाईदार पोस्टिंग।
मोहन सरकार ने 13 अक्टूबर 2026 की रात आईएएस रोहित सिसोनिया को रायसेन कलेक्टर बनाया है। सिसोनिया भागीरथपुरा कांड के समय इंदौर नगर निगम में अपर आयुक्त थे। भागीरथपुरा जांच रिपोर्ट में उनके नाम पर बड़ी लापरवाही दर्ज है। लेकिन यह अकेला मामला नहीं है, जब अफसर कांड करने के बाद भी पुरस्कृत होते रहे हैं।
From a 72-day file delay to Raisen collector: a timeline of Rohit Sisonia's role in the Bhagirathpura case and the latest MP IAS transfer.

thesootr Explainer में जानिए कैसे बड़ी-बड़ी लापरवाहियों के बाद भी अफसरों को मलाईदार पोस्टिंग दी गईं…



रायसेन कलेक्टर बने आईएएस रोहित सिसोनिया

इंदौर के भागीरथपुरा कांड से जुड़े आईएएस अफसर रोहित सिसोनिया अब रायसेन कलेक्टर होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने 13 अक्टूबर 2026 की रात यह आदेश जारी किया है। पहली नजर में यह एक सामान्य फेरबदल लगता है, लेकिन रायसेन वाली पोस्टिंग ने इंदौर से भोपाल तक बहस छेड़ दी है। कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना लिया है। वजह साफ है, भागीरथपुरा जांच रिपोर्ट में उनके स्तर पर देरी करने के आरोप दर्ज हैं।



तो सवाल सीधा है, जवाबदेही आखिर कहां गई?



कांग्रेस हमलावर

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले पर उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी उठाए सवाल

भागीरथपुरा कांड में क्या हुआ था

इंदौर के वार्ड 11 भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 के आखिर में दूषित पानी पहुंचा था। उल्टी-दस्त से लोग बीमार पड़ने लगे और मौतें होने लगी थीं। प्रशासन के मुताबिक 36 लोगों की मौत हुई थी। जांच आयोग ने दूषित पानी से 22 मौतों की पुष्टि की, जबकि याचिकाकर्ता 39 से ज्यादा मौतों का दावा करते हैं।



30 और 31 दिसंबर को 73 सैंपल लिए गए थे। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के मुताबिक इनमें 55 फेल हुए थे। 39 सैंपल में फीकल कोलीफॉर्म (मल से आने वाला बैक्टीरिया) मिला था। यह मामला Bhagirathpura case के नाम से चर्चित है।



आयोग ने कहां पाई चूक

हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने 27 जनवरी 2026 को एक सदस्यीय आयोग बनाया था। इसकी अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता ने की थी। आयोग ने करीब 600 पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी थी। बाद में कोर्ट के आदेश पर इसे वेबसाइट पर अपलोड किया गया था।



रिपोर्ट के मुताबिक पानी और सीवर की लाइनें पास-पास चल रही थीं। लीकेज से सीवर का पानी पेयजल में मिलता रहा। आयोग ने माना कि यह घटना टाली जा सकती थी।



जांच रिपोर्ट में है आईएएस सिसोनिया का जिक्र

उस समय रोहित सिसोनिया इंदौर नगर निगम में अपर आयुक्त (जल प्रदाय) थे। रिपोर्ट के मुताबिक 15 अक्टूबर 2025 को दो करोड़ 40 लाख रुपए के पाइपलाइन टेंडर की फाइल उनके पास आई थी। उन्होंने फाइल पर Discuss लिखकर संबंधित अफसर से चर्चा करने को कहा था।



( thesootr ने सबसे पहले उजागर की थी रिपोर्ट- भागीरथपुरा कांड पर कमेटी के सामने IAS, महापौर यह बोले, सिसोनिया बोले- अंतरात्मा कुछ और कहती है)



चर्चा 18 दिसंबर को हुई थी। फाइल 26 दिसंबर को वित्तीय बोली खोलने के लिए आगे बढ़ी थी। इसमें करीब 72 दिन लग गए थे। महापौर के मुताबिक उन्हें 29 दिसंबर की सुबह घटना की जानकारी मिली थी।



आयोग ने देरी को कैसे देखा

आयोग ने इस देरी को असामान्य और अनुचित माना था। फाइल अटकाने में मुख्य भूमिका कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव की बताई गई है। आईएएस रोहित सिसोनिया की भूमिका मंजूरी और निगरानी के स्तर पर देखी गई है। रिपोर्ट ने पाइपलाइन बदलने में देरी को संकट की प्रमुख वजहों में गिना गया है।



2 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्ती दिखाई थी। उन्होंने सिसोनिया को इंदौर से हटाने के निर्देश दिए थे। अब वही अफसर एक जिले की कमान संभालेंगे।



केके मिश्रा ने उठाए सवाल

इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने भी आपत्ति जताई है। उनके मुताबिक सरकार ने निलंबन की बात कही थी, पर आदेश जारी नहीं हुआ था।



बड़ा सवाल तो यह है कि रोहित सिसोनिया अकेले नहीं हैं…

रोहित सिसोनिया अकेले उदाहरण नहीं हैं। द सूत्र की मार्च 2026 में की गई पड़ताल के मुताबिक, सवा दो साल में 18 आईएएस (IAS - Indian Administrative Service) और आईपीएस अफसरों पर लापरवाही में कार्रवाई हुई थी। इनमें कई को कुछ ही समय बाद अहम पद मिल गए थे। अब जरा ऐसे अफसरों की सूची देखिए।



आईएएस दिलीप यादव: 16 दिन में नया पद

कांड: भागीरथपुरा कांड, इंदौर
भूमिका:
वे तब इंदौर नगर निगम आयुक्त थे और सरकार ने उन्हें हटाया था। हालांकि आयोग ने बाद में उन्हें क्लीन चिट दे दी।
नई पोस्टिंग:
16 दिन में भोपाल में उप सचिव बने थे। फिर मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के एमडी (MD- Managing Director) बनाए गए।



आईएएस ऋषि गर्ग: हरदा के बाद बिजली कंपनी

कांड: फरवरी 2024 में हरदा की अवैध पटाखा फैक्ट्री में धमाका हुआ था। इसमें 13 लोगों की मौत हुई और 75 से ज्यादा घायल हुए थे।
लापरवाही:
एसीएस (ACS - Additional Chief Secretary) संजय दुबे की जांच ने कलेक्टर और एसपी की बराबर जवाबदेही तय की। GAD ने उन्हें आरोप पत्र दिया। हालांकि गर्ग ने 2022 में यह फैक्ट्री बंद कराई थी, जिसे तत्कालीन संभागायुक्त ने फिर चालू कराया।
नई पोस्टिंग:
पहले मंत्रालय में उप सचिव, फिर मध्य क्षेत्र बिजली कंपनी के एमडी बने।



आईएएस क्षितिज सिंघल: सिवनी से इंदौर निगम तक

कांड: सिवनी में 50 से ज्यादा गोवंश की हत्या का मामला सामने आया था। जिले में तनाव और बंद जैसे हालात बने थे।
भूमिका:
वे तब सिवनी कलेक्टर थे और सरकार ने उन्हें हटाया था।
नई पोस्टिंग:
पहले मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी बने थे। फिर इंदौर नगर निगम आयुक्त बनाए गए।



आईएएस दीपक आर्य: सात दिन में नई जिम्मेदारी

कांड: सागर में हुए हादसे में नौ बच्चों की मौत हुई थी।
भूमिका:
तत्कालीन सागर कलेक्टर के तौर पर उन्हें हटाया गया था।
नई पोस्टिंग:
सिर्फ सात दिन में मप्र ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के सीईओ बन गए।



आईएएस तरुण राठी: बस हादसे के बाद आयुक्त

कांड: गुना में बस हादसे में 13 लोगों की मौत हुई थी।
भूमिका:
तत्कालीन गुना कलेक्टर के तौर पर उन्हें हटाया गया था।
नई पोस्टिंग:
एक महीने बाद वाल्मी के संचालक बने। फिर स्वास्थ्य आयुक्त और बाद में जनजातीय विकास आयुक्त बने।



आईएएस आदित्य सिंह बालाघाट कलेक्टर बने

मामला: जनवरी 2026 में आनंदपुर धाम ट्रस्ट ने उन पर तीन करोड़ रुपए मांगने का आरोप लगाया था।
आरोप:
मामला ट्रस्ट की संपत्ति के नामांतरण से जुड़ा बताया गया। शिकायत पीएमओ (PMO - Prime Minister's Office) और मुख्य सचिव तक पहुंची। यह आरोप किसी जांच में साबित होने की जानकारी सामने नहीं आई।
नई पोस्टिंग:
21 जनवरी 2026 को अशोकनगर कलेक्टर पद से हटाकर उप सचिव बनाए गए थे। 13 अक्टूबर की सूची में आदित्य सिंह बालाघाट कलेक्टर बनाए गए।



ड्रग इंस्पेक्टर: 11 महीने में बहाली

कांड: छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में 26 बच्चों की मौत हुई थी।
लापरवाही:
ड्रग इंस्पेक्टर गौरव शर्मा और शरद कुमार जैन 6 अक्टूबर 2025 को निलंबित हुए थे। एसटीएफ (STF - Special Task Force) और विभागीय जांच अब भी जारी है।
नई पोस्टिंग:
23 सितंबर 2026 को दोनों बहाल हुए। शर्मा गुना और जैन जबलपुर में उप संचालक बने। स्वास्थ्य राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने शासन की सहमति के बिना बहाली पर जांच के निर्देश दिए।



सवाल किसी एक अफसर का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है, जहां हटाना और फिर बड़ा पद देना साथ चलता दिखता है। क्या जांच रिपोर्ट के बाद विभागीय कार्रवाई होगी? इस पर सरकार की ओर से अभी कोई जवाब नहीं आया है।



यह खबर क्यों जरूरी है:

संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीवन का अधिकार देता है। साफ पानी इसी अधिकार का हिस्सा माना जाता है। भागीरथपुरा में यह अधिकार टूटा और कई परिवारों ने अपने लोग खो दिए थे। ऐसे में जांच रिपोर्ट के बाद जवाबदेही तय होना लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है। यदि हादसों के बाद हटाए गए अफसर जल्द बड़े पद पाते रहें, तो कार्रवाई का डर कमजोर पड़ता है। यह खबर उसी जवाबदेही पर सवाल उठाती है।



FAQs

  1. आईएएस रोहित सिसोनिया को कहां का कलेक्टर बनाया गया है?
    रोहित सिसोनिया को रायसेन का कलेक्टर बनाया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 13 अक्टूबर 2026 की रात यह आदेश जारी किया। इससे पहले वे किसान कल्याण विभाग में उप सचिव थे।
  2. भागीरथपुरा कांड क्या है?
    इंदौर के भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हुई। प्रशासन ने 36 मौतें मानीं, जबकि आयोग ने 22 मौतों की पुष्टि की। सीवर और पेयजल लाइनों के लीकेज को वजह बताया गया।
  3. जांच रिपोर्ट में आईएएस रोहित सिसोनिया पर क्या कहा गया?
    रिपोर्ट के मुताबिक पाइपलाइन टेंडर फाइल उनके स्तर पर करीब 72 दिन आगे नहीं बढ़ी। आयोग ने मुख्य भूमिका कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव की मानी। सिसोनिया की भूमिका निगरानी के स्तर पर देखी गई।
Tags:
  • भागीरथपुरा कांड
  • आईएएस रोहित सिसोनिया
  • इंदौर नगर निगम
  • मोहन सरकार
  • आईएएस दिलीप यादव
  • आईएएस ऋषि गर्ग
  • आईएएस क्षितिज सिंघल
  • आईएएस दीपक आर्य
  • आईएएस आदित्य सिंह
  • आईएएस तरुण राठी