भागीरथपुरा कांड पर कमेटी के सामने IAS, महापौर यह बोले, सिसोनिया बोले- अंतरात्मा कुछ और कहती है
Sanjay Gupta | Oct 01, 2026, 13:44 IST
भागीरथपुरा कांड की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक।
इंदौर के वार्ड 11 भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 में सामने आए दूषित पानी कांड में रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की रिपोर्ट सार्वजनिक हो गई है। इसमें कुछ अधिकारियों को क्लीन चिट मिली तो कुछ को लापरवाही के लिए जिम्मेदार बताया गया। खासतौर से माना गया कि यह घटना टाली जा सकती थी यदि सरकारी सिस्टम, प्रशासनिक तंत्र काम में तेजी लाता।
किसने कमेटी के सामने कैसे रखी अपनी बात
आईएएस मनीष सिंह , पूर्व निगमायुक्त
आईएएस आशीष सिंह , पूर्व निगमायुक्त
कमेटी ने उनसे पूछा कि क्या भागीरथपुरा की घटना में ऊपर से नीचे तक सभी की सामूहिक जिम्मेदारी बनती है। इस पर सिंह ने कहा कि उन्हें घटना से जुड़े पूरे तथ्य पता नहीं हैं, इसलिए वह इस बारे में कुछ नहीं कह सकते।
आईएएस प्रतिभा पाल , पूर्व निगमायुक्त
पाल ने यह भी कहा कि भागीरथपुरा की घटना उनके कार्यकाल की नहीं है, इसलिए उन्हें इसके पूरे तथ्य मालूम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में व्यवस्थाओं को बेहतर करने की कोशिश की थी।
आईएएस क्षितिज सिंघल , निगमायुक्त इंदौर
उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित काम पूरा करने में देरी हुई। ठेकेदार को एक साल में काम पूरा करना था, लेकिन समय पर काम नहीं हुआ। इसके बावजूद ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। देरी क्यों हुई, इसका कारण भी स्पष्ट नहीं है।
सिंघल ने माना कि सीवर और पानी की लाइन पास-पास होना गलत है। उन्होंने यह भी बताया कि 30 और 31 दिसंबर को 73 सैंपल लिए गए थे। इनमें से 55 सैंपल फेल हुए और 39 में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए।
आईएएस हर्षिका सिंह , पूर्व निगमायुक्त
बिना सत्यापन टैंकरों को भुगतान किए जाने की बात पर उन्होंने इसे गलत बताया। कमेटी ने पूछा कि क्या इस घटना से नगर निगम की छवि धूमिल हुई है। इस पर सिंह ने कहा कि यह बात सही है।
उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक परिस्थितियां कठिन होने के बावजूद पेयजल से जुड़े भुगतान किए गए और जरूरी काम पूरे कराने की कोशिश की गई।
आईएएस शिवम वर्मा , पूर्व निगमायुक्त
आईएएस दिलीप यादव , पूर्व निगमायुक्त
उन्होंने कहा कि संबंधित काम अपर आयुक्त को सौंपे गए थे, इसलिए इसकी फाइल उनके पास नहीं आई। घटना के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई। जोनल अधिकारी और सहायक यंत्री को सस्पेंड किया गया, जबकि उपयंत्री को हटा दिया गया।
यादव ने कहा कि निगमायुक्त के रूप में उनका कार्यकाल काफी कम रहा। उन्होंने अपने कार्यकाल में पूरी निष्ठा के साथ काम करने की बात कही।
आईएएस रोहित सिसोनिया , पूर्व अपर आयुक्त
सिसोनिया ने कहा कि उनकी अंतरात्मा मानती है कि दूषित पानी के पीछे कोई दूसरा कारण भी हो सकता है। उन्होंने आसपास मौजूद उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट की संभावना भी जताई। उनके मुताबिक इस पहलू की भी जांच होनी चाहिए।
आईएएस परीक्षित झाड़े, सीईओ आईडीए
आईएएस सिद्धार्थ जैन- पूर्व अपर आयुक्त
दोबारा पेश होने पर जैन ने कहा कि उनके पास वाटर सप्लाई का काम नहीं था, इसलिए भागीरथपुरा से जुड़े मामले की जानकारी उन्हें नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।
आईएएस अभिषेक गेहलोत, पूर्व अपर आयुक्त
उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा में मेंटेनेंस के लिए कोई लिखित आदेश जारी नहीं किए गए थे। निर्देश मौखिक रूप से दिए गए थे। उनके कार्यकाल में किसी अधिकारी, कर्मचारी या ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं हुई।
गेहलोत ने यह भी माना कि अगर समय रहते लाइन की मरम्मत और सुधार हो जाता, तो घटना को रोका जा सकता था।
आईएएस भव्या मित्तल, पूर्व निगमायुक्त
आईएएस अभिलाष मिश्रा, पूर्व अपर आयुक्त
उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने की बात सही नहीं है। उनके मुताबिक वहां जरूरी कार्रवाई की गई थी।
कमेटी ने पूछा कि क्या यह घटना प्रशासनिक लापरवाही, तकनीकी विफलता और विभागों के बीच समन्वय की कमी का नतीजा थी। इस पर मिश्रा ने कहा कि उनके विचार में ऐसा नहीं था।
संजीव श्रीवास्तव, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर
उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के आसपास औद्योगिक इकाइयां मौजूद हैं। ऐसे में हानिकारक केमिकल सीवरेज के जरिए पेयजल में मिलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि आसपास लघु उद्योग भी हैं, जहां से अपशिष्ट निकलता है।
बता दें कि इस मामले में आईएएस संतोष टैगोर और आशीष पाठक के बयान भी दर्ज किए गए हैं। दोनों प्रमोटी आईएएस अधिकारी हैं।
महापौर, पार्षद यह बोले
महापौर पुष्यमित्र भार्गव
उन्होंने बताया कि एमआईसी ने नवंबर 2022 में भागीरथपुरा में काम की मंजूरी दी थी। पार्षद वाघेला ने फरवरी 2024 में भी समस्या बताई थी, जिसके बाद टेंडर मंजूर किए गए।
भार्गव ने कहा कि घटना का उन्हें दुख है। घटना के बाद उन्होंने तत्कालीन निगमायुक्त दिलीप यादव से बात की और उच्च स्तरीय जांच कराने को कहा। संबंधित लोगों पर कार्रवाई भी की गई।
कमेटी ने पूछा कि क्या अधिकारी महापौर की बात सुनते हैं। इस पर भार्गव ने कहा कि हां, अधिकारी उनकी बात सुनते हैं।
पार्षद कमल वाघेला
वाघेला के मुताबिक उन्होंने इस संबंध में पत्र भी लिखे थे। इसके बाद महापौर और अधिकारियों ने इलाके का दौरा किया। फिर पाइपलाइन बदलने के काम के आदेश दिए गए।
वाघेला ने यह भी कहा कि सरकार प्रभावित परिवारों को कम से कम पांच लाख रुपए मुआवजा दे।
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