आईडीए चेयरमैन के लिए नजरें सीएम पर, पूर्व सीएम, मंत्री और संगठन से अलग-अलग नाम
इंदौर विकास प्राधिकरण आईडीए के चेयरमैन को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलता है। यह सबसे ज्यादा पैसे वाला प्राधिकरण है। इसके लिए लॉबिंग भी लंबे समय से चल रही है। अब दावेदारों की दौड़ अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
वहीं सभी की नजरें सीएम डॉ. मोहन यादव की ओर हैं कि वह किस पर हाथ रखते हैं। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान से लेकर विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और संगठन से भी अलग नाम सामने आए हैं।
पूर्व सीएम और विधायकों की पसंद गुप्ता
सूत्रों के अनुसार इंदौर के पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता अपनी छवि और सभी से संबंधों के चलते पहली पसंद बनकर उभरे हैं। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने उनका नाम आगे बढ़ाया है और इसके लिए इंदौर के विधायकों को साथ लिया है।
इसमें विधायक मालिनी गौड़, महेंद्र हार्डिया, मधु वर्मा, मनोज पटेल जैसे विधायक शामिल हैं। चौहान ने शनिवार को सीएम डॉ. मोहन यादव से मुलाकात भी की थी। बताया जाता है कि दोनों दिल्ली भी साथ में गए थे।
मुकेश राजावत का नाम भी उभरा
उधर नगराध्यक्ष पद से चूके मुकेश राजावत का भी दावा आईडीए चेयरमैन के लिए चला है। बताया जाता है कि यह नाम संगठन स्तर से आगे बढ़ाया गया है। संगठन में उनके लंबे समय से कार्य को देखते हुए यह नाम उभरा है।
इधर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अहम भूमिका
आईडीए नगरीय प्रशासन विभाग के तहत आता है, ऐसे में विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की राय खासी अहम होगी। उनके करीबी में हरिनारायण यादव हैं, जो पहले आईडीए बोर्ड में रह चुके हैं, लेकिन चेयरमैन पद तक नहीं पहुंच पाए थे।
वहीं सूत्रों के अनुसार मंत्री गुट से एक नाम कमलेश शर्मा का भी उभरा है, जो पूर्व में इंदौर के बीजेपी नगर मंत्री रह चुके हैं। यह संघ के एक पदाधिकारी के भी करीब माने जाते हैं। ऐसे में यह नाम भी चर्चा में आ गया है। बताया जा रहा है कि मंत्री गुट से जुड़े ब्राह्मण लॉबी के जनप्रतिनिधि इस नाम को समर्थन देने के लिए तैयार हैं।
हालांकि यह भी चर्चा है कि महापौर और नगराध्यक्ष पहले से ब्राह्मण वर्ग से हैं, तो क्या तीसरा अहम पद भी इसी वर्ग को मिलने पर जातिगत विवाद हो सकता है।
या फिर चौंकाने वाला नाम
इन सभी दावेदारों के बीच या किसी अन्य चौंकाने वाले नाम की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। इन सभी में सीएम डॉ. मोहन यादव की राय सबसे अहम होगी। बीजेपी अक्सर ऐसे फैसले लेती है, जिससे लोग चौंक जाते हैं।
ऐसे में इस पद पर किसी नए चेहरे की एंट्री भी संभव है। जैसे पहले सीएम शिवराज सिंह चौहान ने संभागीय संगठन मंत्री जयपाल चावड़ा को यह जिम्मेदारी दी थी। आईडीए बोर्ड के लिए कोई भी नेता ताकत लगाने से नहीं चूकेगा। इससे इंदौर में सत्ता का संतुलन किस ओर है, इसका भी संकेत मिलेगा।
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