सीएम मोहन यादव की घोषणा से पहले इंदौर में दो प्रोजेक्ट में ऐसे दिया 4 गुना मुआवजा
News In Short
- सीएम मोहन यादव ने चार गुना मुआवजा नीति घोषित की है।
- इंदौर में पहले ही दो प्रोजेक्ट में ज्यादा मुआवजा दिया गया है।
- ग्रीन फील्ड कॉरिडोर और वेस्टर्न रिंग रोड में बड़ा भुगतान किया गया है।
- खास नियम से जमीन की कीमत तय की गई है।
- लैंड पूल और अन्य स्कीमों से किसानों को लाभ मिला है।
News In Detail
सीएम डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश को संबोधित करते हुए जमीन अधिग्रहण के लिए चार गुना मुआवजा नीति घोषित की है। इसका प्रावधान केंद्र के 2013 के भू अधिग्रहण एक्ट में ही था।
इंदौर जिले में दो अहम प्रोजेक्ट में पहले ही इस नीति को लागू कर किसानों को चार गुना से भी अधिक मुआवजा दिया गया है।
जिले में बीते सालों में कई अहम प्रोजेक्ट के लिए 10 हजार से ज्यादा किसानों से आठ हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन ली गई है। इंदौर में मप्र में जमीन की कीमत सर्वाधिक मानी जाती है। ऐसे में यहां जमीन अधिग्रहण को लेकर हमेशा विवाद होते हैं। इसे सुलझाने के लिए इंदौर में कई अहम नियम लागू किए गए।
इन प्रोजेक्ट में दिया गया चार गुना से अधिक
इंदौर-उज्जैन के ग्रीन फील्ड कॉरिडोर में 662 करोड़ का मुआवजा दिया गया है। इसके साथ ही इंदौर वेस्टर्न रिंग रोड में भी करीब 800 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया गया है।
इस नियम का पहली बार किया प्रयोग
असल में, इन बड़े प्रोजेक्ट्स में आ रही परेशानियों को हल करने के लिए इंदौर में केंद्र के भू अधिग्रहण नियम 2013 के एक खास नियम का इस्तेमाल किया गया है। यह शायद एमपी में पहली बार किया गया है।
इस नियम के मुताबिक, जहां जमीन ली जा रही है, वहां की गाइडलाइन से ज्यादा कीमत पर जो रजिस्ट्री हुई है, उसका 50 फीसदी रजिस्ट्री को लिया जाता है। जैसे अगर गाइडलाइन 50 लाख प्रति हेक्टेयर है और जमीन 70 से 80 लाख में बिकी है, तो वही रजिस्ट्री ली जाती है। इसमें सबसे ऊंची 50 फीसदी रजिस्ट्री को ही शामिल किया जाता है।
फिर इन रजिस्ट्री का औसत निकाला जाता है और जो कीमत आती है, उसका दोगुना मुआवजा दिया जाता है।
मान लो, अगर औसत कीमत 50 लाख की गाइडलाइन वाली जमीन का 70 लाख है, तो इसका दोगुना यानी 1 करोड़ 40 लाख मुआवजा मिलेगा। जबकि सामान्य नियम से यह सिर्फ 1 करोड़ होता।
लैंड पूलिंग स्कीम भी इंदौर में की लागू
इंदौर एमपीआईडीसी ने एमपी में सबसे पहले पीथमपुर में लैंड पूलिंग स्कीम (Land Pooling Scheme) भी लागू की थी। तत्कालीन एमडी कुमार पुरुषोत्तम द्वारा इसे लागू किया गया था। इससे किसानों को लाभ हुआ और पीथमपुर में निवेश योजना क्षेत्र तैयार हुआ।
इसमें किसान से ली जाने वाली जमीन की कीमत का उसे 20 फीसदी कैश दिया गया और 80 फीसदी मूल्य की डेवलप जमीन उस निवेश योजना में देने का प्रावधान किया गया। इसे वह किसान अपने हिसाब से बाजार में बेच सकता है। जैसे एक हेक्टेयर जमीन कीमत 1 करोड़ है तो किसान को 20 लाख नकद मिलेगा और बाकी 80 लाख की कीमत का डेवलप प्लॉट दिया गया।
इकोनॉमिक कॉरिडोर में यह स्कीम लागू की गई
इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत भी अभी जमीन अधिग्रहण का काम चल रहा है। इसके तहत MP Industrial Development Corporation (MPIDC)ने नियम लागू किया है कि किसान को जमीन के बदले में 60 फीसदी डेवलप प्लॉट दिया जाएगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचे जैसे सड़क आदि में गई जमीन को छोड़कर। जैसे एक किसान से 1 लाख वर्गफीट जमीन ली तो इसमें 20 हजार वर्गफीट करीब सड़क आदि में जाएगी। तो बाकी बची 80 हजार वर्गफीट में से 60 फीसदी यानी 48 हजार वर्गफीट डेवलप प्लॉट मिलेगा, जिसे वह बाजार में बेच सकेगा। इसमें कैश का प्रावधान नहीं है।
सुपर कॉरिडोर में यह स्कीम लागू की गई
इससे पहले सुपर कॉरिडोर के लिए 20 फीसदी डेवलप प्लॉट की नीति बनी थी, जिसे बाद में कोकजे नीति के बाद 24.50 फीसदी कर दिया। इसके तहत किसान से 1 लाख वर्गफीट जमीन ली तो उसे बदले में 24500 वर्गफीट डेवलप प्लॉट दिया गया। इसमें कैश का प्रावधान नहीं है।
इंदौर में हाल के समय में बंटा 2352 करोड़ मुआवजा
इंदौर में हाल के सालों में जमीन अधिग्रहण के 112 प्रस्ताव आए, जिसमें से 91 मंजूर हुए। इसमें 2640 करोड़ मुआवजा राशि मंजूर हुई और अभी तक इसमें से 2352 करोड़ बंट गई। वहीं इंदौर संभाग की बात करें तो 1793 प्रस्ताव आए, इसमें से 1611 मंजूर हो चुके। इसके तहत 4069 करोड़ मुआवजा राशि मंजूर की गई और 3688 करोड़ वितरित हुई।
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