इंदौर में छात्र आंदोलन से डरती क्यों है पुलिस, NEYU नेताओं की गिरफ्तारी से उठा सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है। प्रदर्शन या आंदोलन होने के आधार पर पुलिस की बर्बरता या सख्ती को सही नहीं ठहराया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट 20 जुलाई को जंतर-मंतर दिल्ली में हुए लाठीचार्ज की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच मंगलवार को इन सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगा। लेकिन इंदौर में पुलिस का रवैया ही अलग है। यहां दिसंबर 2024 के प्रदर्शन से डरने के बाद पुलिस अब मंजूरी ही नहीं देती है।
क्या हुआ था दिसंबर 2024 में
दिसंबर 2024 में पीएससी के बाहर एनईवाययू के बैनर तले विविध मांगों पर प्रदर्शन हुआ। यह इतना बड़ा हो गया कि चार दिन तक हजारों की तादाद में छात्र आयोग के दफ्तर के बाहर ही डटे रहे, वहीं सोए, वहीं रहे। आश्वासन के बाद यह हटे। सीएम से भी मुलाकात हुई। लेकिन फिर मांगों पर कुछ नहीं हुआ।
इसके बाद जब जनवरी 2025 में आंदोलन की फिर सूचना जारी की, तभी छात्र नेता राधे जाट, रणजीत किसानवंशी व अन्य को घरों से पुलिस सादी वर्दी में उठाकर ले गई। इन्हें दिन भर जीप में घुमाया और फिर थाने ले गए। एसीपी कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया। हाईकोर्ट से जमानत हुई। इसके बाद छात्र नेताओं पर प्रतिबंधात्मक धाराओं में कई केस ठोके गए।
फिर मंजूरी मांगी तो नहीं दी, हाईकोर्ट से मिली
इसके बाद जनवरी 2026 में भी पीएससी के बाहर रैली, प्रदर्शन की मंजूरी मांगी। पुलिस ने नहीं दी। इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका लगी और इसके बाद पुलिस ने हाईकोर्ट आदेश के तहत मंजूरी जारी की।
अब न्याय यात्रा के पहले ही पकड़ लिया
अब नीट पेपर लीक कांड की ही बात करें। इसमें न्याय यात्रा निकालने की घोषणा हुई। इस यात्रा के लिए पुलिस के पास आवेदन लग गया। लेकिन 23 जुलाई की यात्रा के पहले 22 जुलाई को पुलिस ने छात्र नेताओं को चर्चा के लिए बुलाया और फिर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। परिजन, दोस्तों को कोई खबर ही नहीं लगी। इसके बाद और नेताओं को यात्रा के पहले ही धर लिया, वहीं यात्रा स्थल पर भारी पुलिस बल लगा दिया। यात्रा निरस्त हो गई।
छात्र नेताओं ने प्रेस कांफ्रेंस कर लगाए आरोप
इस मामले में एनईवाययू (NEYU) के छात्र नेताओें ने सोमवार को इंदौर में प्रेस कांफ्रेंस की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार छात्र आंदोलनों को पुलिस के माध्यम से कुचलने का प्रयास कर रही है। संगठन के राधे जाट, विजय चौधरी, सुरेंद्र यादव, चंद्रशेखर गुर्जर, गौरव परिहार औऱ रमन गोस्वामी को गिरफ्तार किया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 26 जुलाई को छोड़ा गया। इसमें भी शर्त लगा दी थी सरकारी कर्मचारी जमानत दे, जिसे हाईकोर्ट ने हटाया।
क्या पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाना अपराध है?
छात्र नेताओं ने कहा कि हम मध्यप्रदेश सरकार से पूछना चाहते हैं कि इन छह छात्र नेताओं का अपराध क्या था? क्या पेपर लीक रोकने की मांग करना अपराध है? क्या भर्ती घोटालों की निष्पक्ष जांच की मांग करना अपराध है? मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात करते हैं, लेकिन साल 2023 के पटवारी भर्ती घोटाले की जांच के लिए गठित राजेंद्र वर्मा समिति की रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
व्यापमं से ITI-TO भर्ती तक घोटालों की लंबी सूची
नेताओं ने कहा कि मध्यप्रदेश व्यापमं घोटाले से लेकर अनेक भर्ती घोटालों का गवाह रहा है। राज्य में निम्नलिखित भर्तियां गंभीर सवालों के घेरे में रही हैं-
- व्यापमं घोटाला (2013-14)
- चिकित्सा भर्ती घोटाला
- कृषि भर्ती घोटाला
- टीईटी भर्ती घोटाला
- नर्सिंग भर्ती घोटाला
- वनरक्षक भर्ती घोटाला
- पटवारी भर्ती घोटाला
- ITI-TO भर्ती परीक्षा
ITI-TO भर्ती परीक्षा में सागर परीक्षा केंद्र से एक ही उपनाम वाले अनेक टॉपर सामने आए हैं, जो पूर्व के भर्ती घोटालों की तरह गंभीर संदेह उत्पन्न करते हैं।
MPPSC एवं MPESB में लगातार अनियमितताएं
यह भी आरोप लगाए कि मध्यप्रदेश की दोनों भर्ती संस्थाओं MPPSC एवं MPESB में निरंतर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। छात्रों की समस्याओं को लेकर पूर्व में MPPSC के समक्ष बड़े आंदोलन हुए, जिनमें मुख्यमंत्री द्वारा भर्ती प्रक्रिया में सुधार के वादे किए गए थे, किंतु आज तक वे वादे पूरे नहीं हुए हैं।
MPPSC से संबंधित प्रमुख मांगें...
- वर्ष 2019 से मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं अभ्यर्थियों को दिखाई जाएं।
- 87-13 का फॉर्मूला समाप्त किया जाए।
- साक्षात्कार के अंक अधिकतम 100 किए जाएं।
- वर्ष 2019 से 13 प्रतिशत होल्ड सूची के अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की जाए।
- मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेश लाल मेहरा को पद से हटाया जाए।
- प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न पत्रों में होने वाली त्रुटियों को रोका जाए तथा इन त्रुटियों के लिए छात्रों से लिया जाने वाला शुल्क समाप्त किया जाए।
बेरोजगारी और रिक्त पदों पर सरकार की चुप्पी
नेताओें ने कहा कि इकोनॉमिक सर्वे 2024-25 के अनुसार मध्यप्रदेश में 33 लाख 13 हजार बेरोजगार हैं, जबकि लगभग 4 लाख 87 हजार सरकारी पद रिक्त हैं। इन पदों को भरने के बजाय सरकार उन्हें 'डाइंग कैडर' घोषित कर स्थायी रूप से समाप्त करने का कार्य कर रही है।
मध्यप्रदेश के छात्रों की प्रमुख समस्याएं...
- नियमित भर्तियों का आयोजन नहीं होना।
- भर्ती प्रक्रिया का निश्चित समय सीमा में पूर्ण नहीं होना।
- मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के अंकों में अत्यधिक अंतर के माध्यम से मेरिट सूची को प्रभावित करना।
- बार-बार परीक्षा शुल्क लिया जाना।
- 87-13 के फॉर्मूले के तहत 13 प्रतिशत पदों को होल्ड रखना।
छात्र नेताओें ने रखी प्रमुख मांगे...
- पेपर लीक रोकने के लिए सख्त पेपर लीक कानून बनाया जाए।
- नियमित एवं समयबद्ध भर्ती सुनिश्चित करने के लिए भर्ती कानून बनाया जाए।
- पेपर लीक होने पर बोर्ड एवं आयोग के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अध्यक्षों की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध कार्रवाई का प्रावधान किया जाए।
- परीक्षा घोटालों की जांच निर्धारित समय सीमा में पूर्ण कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- पटवारी भर्ती घोटाले की जांच रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक की जाए।
- छात्र संघ चुनाव बहाल किए जाएं।
- बार-बार लिए जाने वाले परीक्षा शुल्क को समाप्त किया जाए।
- कॉलेज एवं विश्वविद्यालयों में सभी नियुक्तियां पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से हों तथा साक्षात्कार एवं सीधी नियुक्तियों पर आधारित चयन प्रक्रिया को समाप्त किया जाए।
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