CAG की रिपोर्ट में 6 साल पहले चेतावनी, इंदौर के पानी में बैक्टिरिया, 5.33 लाख घरों में दूषित जल जा रहा

Sanjay Gupta | Jan 03, 2026, 14:29 IST
Indore Bhagirath pura News
इंदौर का भागीरथपुरा कांड कभी न कभी होना ही था। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं CAG ने 2019 में ही इंदौर-भोपाल के पानी को दूषित बताकर चेतावनी दी थी, जिसे नजरअंदाज किया गया।

पूरी बर को 5 पॉइंट में समझें...



  • CAG ने 2019 में ही इंदौर-भोपाल के पानी को दूषित बताकर बड़े खतरे की चेतावनी दे दी थी।
  • सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दूषित पानी से इंदौर में डायरिया के 40 हजार से ज्यादा मामले सामने आए।
  • जांच में 4 हजार 481 पानी के सैंपल पीने लायक नहीं पाए गए। इनमें बैक्टीरिया और गंदगी मिली थी।
  • पाइप लाइनों में लीकेज सुधारने में महीनों लगते हैं। 65% पानी घरों तक पहुंचने से पहले ही बर्बाद हो जाता है।
  • पानी सुधार के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक ने 906.4 करोड़ रुपए का कर्ज 25 साल के लिए दिया था।
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INDORE. इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई 16 मौतों का कांड, देर-सबेर होना तय था। Comptroller and Auditor General of India (सीएजी) ने इस संबंध में साल 2019 की रिपोर्ट में ही चेतावनी दे दी थी। यह रिपोर्ट मध्य प्रदेश के दो सबसे बड़े नगर निगम भोपाल व इंदौर नगर निगम को लेकर बनाई गई थी।



इस रिपोर्ट को जिम्मेदार डस्टबिन में डालकर चुप्पी साधे बैठे रहे। नेता प्रतिपक्ष विधानसभा उमंग सिंघार ने अब इसी रिपोर्ट को लेकर मप्र सरकार को घेरा है।



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सीएजी ने खुद कराए थे वाटर सैंपल

सीएजी ने अपने स्तर पर ही इसमें अलग-अलग सोर्स से 54 वाटर सैंपल लिए थे। इसमें से 10 प्रदूषित पाए गए थे। वहीं साल 2013 से 2018 के बीच में कुल 4 हजार 481 वाटर सैंपल में पाया गया कि भोपाल व इंदौर के पानी में मैलापन व बैक्टिरिया है। इससे पानी दूषित है। इसके चलते इंदौर में 5.33 लाख घरों में दूषित जल जा रहा है। चेताया गया था कि इसके चलते जनजनित बीमारियां हो सकती हैं।



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सेंपल रिपोर्ट में ये आया था



सैंपल रिपोर्ट में यह सामने आया कि 4,481 सैंपल दूषित पाए गए। उनमें से 3,074 सैंपल फिजिकली दूषित थे, 147 सैंपल केमिकल्ली दूषित थे, और 827 सैंपल वायरलॉजिकल्ली दूषित थे।



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40 हजार447 में आया था डायरिया

सीएजी द्वारा जुटाए गए डेटा से यह सामने आया था कि 2013 से 2018 के बीच इंदौर नगर निगम क्षेत्र में डायरिया के 40,447 केस सामने आए थे। इसके अलावा टायफाइड के 1,462 और 625 वायरल बीमारियां भी चिन्हित की गई थीं।



लीकेज, वाटर सप्लाई में कोई मॉनटरिंग नहीं

सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा है कि लीकेज और वाटर सप्लाई जैसे कामों पर कोई मॉनिटरिंग सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है। इसके लिए कोई अलग से सेल भी काम नहीं कर रही। लीकेज सुधारने में 22 से 182 दिन तक का वक्त लग रहा है। साथ ही, लीकेज के कारण 65 फीसदी तक पानी लॉस हो जाता है और घरों तक नहीं पहुंचता।



क्या जवाब था निगम आयुक्तों का

इस मामले में भोपाल नगर निगम ने तो सीएजी की आपत्ति सिरे से खारिज कर दी थी। कहा था कि जो वाटर सैंपल लिए गए वह सही तरह से नहीं लिए गए। वहीं इंदौर नगर निगमायुक्त द्वारा फरवरी 2019 में जवाब दिया गया कि- हम इसमें सुधार के लिए काम करेंगे। लेकिन अब इसका हाल समझ आ रहा है।



नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का हमला

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सीएजी रिपोर्ट (CAG report) पर उमंग सिंघार ने कहा है कि इंदौर में गंदा पानी पीने से अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है। इंदौर और भोपाल में सप्लाई किए जा रहे गंदे और दूषित पानी की बात CAG ने 2019 में ही कही थी। उसे ठीक करने के सुझाव भी दिए थे। मध्य प्रदेश सरकार ने 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से प्रदेश के चार बड़े शहरों: भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में पानी के प्रबंधन के लिए 200 मिलियन डॉलर (तब 906.4 करोड़ रुपए) का कर्ज 25 साल के लिए दिया था।



यह पैसा शहरों में पानी की आपूर्ति को बढ़ाने और उसकी गुणवत्ता सुधारने के लिए था। प्रोजेक्ट के अनुसार हर किसी को पर्याप्त और साफ पानी मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया था। रिपोर्ट में दोनों शहरों में गंभीर कमियां बताई और भ्रष्टाचार उजागर किया। प्रोजेक्ट का काम अपर्याप्त पाया गया। रिपोर्ट आने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। 2013 से 2018 के बीच 4,481 पानी के नमूने (भौतिक, रासायनिक और जीवाणु परीक्षण वाले) पीने लायक नहीं पाए गए।



रिकॉर्ड से पता नहीं चला कि नगर निगम ने क्या कार्रवाई की। स्वतंत्र जांच में 54 नमूनों में से 10 खराब पाए गए। स्वास्थय विभाग ने इस दौरान 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के मामले बताए। यह वह गंभीर सवाल है जो CAG ने भोपाल और इंदौर के जल आपूर्ति पर उठाए थे। मगर सरकार तो बिना त्रासदी के जागती ही नहीं है।



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