इंदौर का भागीरथपुरा एपिडेमिक क्षेत्र घोषित नहीं हुआ, CMHO के एक आदेश से हुआ था असमंजस
पांच प्वाइंट में समझें पूरा मामला
- दूषित पानी से इंदौर के भागीरथपुरा में अब तक 17 लोगों की मौत, 421 मरीज भर्ती, 15 ICU में।
- सीएमएचओ ने महामारी घोषित करने का आदेश दिया, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया।
- कलेक्टर ने सीएमएचओ को फटकार लगाई, महामारी घोषित करने का अधिकार उनके पास है।
- ICMR की टीम घर-घर जाकर सर्वे कर रही है, पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं।
- प्रशासन ने दावा किया कि स्थिति अब नियंत्रण में है, पानी के सैंपल बैक्टीरिया मुक्त पाए गए।
इंदौर भागीरथपुरा में दूषित पानी से 17 की मौत हो चुकी है। अस्पतालों में 421 मरीज भर्ती हुए हैं और इसमें से 311 डिस्चार्ज हो चुके हैं। अभी भी 110 मरीज भर्ती है और इसमें से 15 आईसीयू में है। लेकिन अब इस क्षेत्र के महामारी ग्रस्त (एपिडेमिक) घोषित होने या नहीं होने को लेकर असमंजस मचा है।
सीएमएचओ के इस आदेश से हुई उलझन
दरअसल इस असमंजस के पीछे वजह बनी ही सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी का एक आदेश। इस आदेश में डॉ. हसानी ने स्वास्थ्यकर्मियों की छुट्टियां निरस्त कर दी।
इसके लिए कारण बताया गया कि भागीरथपुरा में महामारी फैली है और उपचार के लिए अभी कर्मचारियों की जरूरत है। इसलिए छुट्टियां निरस्त की जाती है। इसके बाद बवाल मच गया।
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कलेक्टर ने लगाई फटकार
इस आदेश की कॉपी जैसे ही कलेक्टर शिवम वर्मा के पास पहुंची, उन्होंने सीएमएचओ को फटकार लगाई। कारण है कि महामारी घोषित करने का अधिकार कलेक्टर के पास होता है और कई रिपोर्ट, जानकारी के बाद ही किसी एरिया को एपिडेमिक क्षेत्र घोषित किया जाता है। भागीरथपुरा में दूषित पानी की सप्लाई | इंदौर सीएमएचओ
इसके लिए एक्ट में कलेक्टर के पास ही अधिकार है। उनके द्वारा इसे घोषित नहीं किया गया। फटकार के बाद सीएमएचओ ने आदेश संशोधित किया और सामान्य आदेश जारी करते हुए कर्मचारियों की छुट्टियां निरस्त की।
सर्वे का काम जारी
उधर ICMR की टीम आई है और मैदान पर सर्वे का काम जारी है। हर दिन घरों में जाकर जांच की जा रही है। यह सर्वे अभी दो-तीन दिन और चलेगा। साथ ही पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं। स्थिति में अब सुधार का दावा प्रशासन ने किया है और कहा है कि अब सैंपल की रिपोर्ट भी बैक्टिरीया मुक्त आने लगी है।