सार्वजनिक नहीं होगी इंदौर के भागीरथपुरा कांड की जांच रिपोर्ट
इंदौर के भागीरथपुरा कांड की जांच पूरी हो चुकी है। जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में भी पेश कर दी गई है। इस मामले में 25 अगस्त को सुनवाई हुई, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की। वहीं सरकारी वकीलों ने इसका विरोध किया।
याचिकाकर्ता एडवोकेट रितेश इनानी ने कहा कि यह जनहित याचिका है, इसलिए रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। फिलहाल इंदौर हाईकोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यानी अभी भागीरथपुरा कांड की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होगी।
600 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट की थी पेश
बता दें कि भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई 36 मौतों के बाद इंदौर देशभर में चर्चा में आया था। इस मामले (bhagirathpura indore news) की जांच के लिए हाईकोर्ट ने 27 जनवरी 2026 को रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में आयोग बनाया था।
आयोग को दूषित पानी के कारणों, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका, प्रभावित लोगों को राहत और मुआवजे जैसे मुद्दों की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
जांच आयोग ने 600 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट एमपी हाईकोर्ट में पेश की थी। आयोग ने इंदौर नगर निगम, आईडीए, प्रशासन, इंदौर स्वास्थ्य विभाग सभी से दस्तावेज लेने और खुले तौर पर आमजन से लिखित बयान बुलाने के बाद यह रिपोर्ट बनाई है।
गोपनीय तरीके से कमेटी ने बनाई रिपोर्ट
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले की जांच को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था, क्योंकि मामला संवेदनशील है। जांच में आईएएस अधिकारियों से लेकर नगर निगम के कई अधिकारियों, स्थानीय पार्षद कमल वाघेला और निचले स्तर के कर्मचारियों की भूमिका की जांच की गई है।
वहीं, मप्र सरकार ने अभी तक इन मौतों को दूषित पानी (indore bhagirathpura ki news) से मानकर मुआवजा राशि नहीं दी है।। फिलहाल रेडक्रॉस की ओर से इलाज के लिए दो लाख रुपए की मदद दी गई है। अब मुआवजे की राशि तय होना बाकी है।
दो IAS की स्थिति भी जांच रिपोर्ट पर निर्भर
इस रिपोर्ट से ही दो आईएएस अफसरों (तत्कालीन निगमायुक्त और तत्कालीन अपर आयुक्त ) के आगे की स्थिति तय होगी। इसके साथ ही कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव, पार्षद वाघेला इन सभी पर रिपोर्ट में क्या है, इस पर नजरें रहेंगी।
जांच कमेटी ने इन मुद्दों पर की पड़ताल
- भागीरथपुरा (भागीरथपुरा इंदौर कांड) में सप्लाई किया गया पानी दूषित था या नहीं, इसकी जांच की गई।
- पानी दूषित होने की वजह पता की गई, जैसे सीवेज मिलना, फैक्ट्री का प्रदूषण, पाइपलाइन में खराबी या कोई दूसरी वजह।
- दूषित पानी से हुई मौतों की असल संख्या का पता लगाया गया।
- दूषित पानी पीने से कौन-कौन सी बीमारियां फैलीं, इसकी जांच की गई।
- घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों की पहचान कर उनकी जवाबदेही तय करने पर जांच की गई।
- प्रभावित लोगों को मिलने वाले मुआवजे की राशि को लेकर भी रिपोर्ट में जानकारी दी गई।
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