इंदौर BJP नेताओं में वर्चस्व की लड़ाई, एल्डरमैन से युवा मोर्चा, IDA तक सब होल्ड
मध्यप्रदेश बीजेपी युवा-मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने कई जिलों के जिलाध्यक्ष घोषित किए, लेकिन इंदौर होल्ड रहा। अब मध्यप्रदेश शासन ने प्रदेश की 16 नगर निगमों में से 13 में एल्डरमैन घोषित किए तो इसमें भी इंदौर होल्ड हो गया। इसी तरह इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के राजनीतिक बोर्ड गठन की फाइल होल्ड पर है। यह बताता है कि यहां के नेताओं के बीच में वर्चस्व की लड़ाई तेज है और हर कोई अपने-अपने समर्थकों को बैठाने में जुटा हुआ है। इसी पेंच के चलते मामला अटका है।
ये सभी नियुक्तियां होल्ड पर हैं:
- IDA राजनीतिक बोर्ड
- युवा-मोर्चा जिलाध्यक्ष
- महिला-मोर्चा जिलाध्यक्ष
- इंदौर निगम एल्डरमैन
- विविध सरकारी समितियों में नियुक्ति
ताई-भाई की राजनीति के बाद बदली करवट
इंदौर की राजनीति पहले मोटे तौर पर ताई (सुमित्रा महाजन) और भाई (मंत्री कैलाश विजयवर्गीय) गुट के बीच में चलती थी। लेकिन ताई के सक्रिय राजनीति से अलग होने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मामला होल्ड रखा। उनके केंद्र में जाने के बाद अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रभार वाला जिला होने से अब उनकी राय सबसे अहम हो चुकी है।
स्थानीय स्तर पर अलग-अलग गुट
वहीं स्थानीय स्तर पर भी राजनीति ने करवट ली है। सुमित मिश्रा के नगर अध्यक्ष बनने से उनके साथ विधायक गोलू शुक्ला, रमेश मेंदोला की तिकड़ी जमी हुई है। इस तिकड़ी को जब जरूरत होती है तो मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी मेंदोला के चलते समर्थन करते हैं। वहीं प्रदेश कार्यकारिणी में महामंत्री बनने के बाद गौरव रणदिवे का कद तेजी से बढ़ा है। उनका प्रताप करोसिया के साथ ही विधायक मालिनी गौड़ के पुत्र एकलव्य गौड़ के साथ खासा तालमेल है। इसी तिकड़ी में सावन सोनकर भी हैं।
यह गुट भी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के करीबी है और मुख्यमंत्री से भी बेहतर तालमेल है। वहीं विधायक उषा ठाकुर, विधायक मनोज पटेल की अपनी राजनीति है और ये मंत्री गुट के विरोध में ही हैं। विधायक मधु वर्मा और विधायक महेंद्र हार्डिया न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर वाली राजनीति कर रहे हैं और सभी जगह सक्रिय हैं। मंत्री तुलसी सिलावट को सांवेर में कोई दखल नहीं चाहिए और उनकी राजनीति मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर वाली है।
सभी को साधना बड़ी चुनौती
ऐसे में इन सभी गुटों की कोशिश है कि अपने समर्थकों को कैसे भी करके अहम पदों पर बैठाया जाए। नगर अध्यक्ष पद के लिए मंत्री गुट की चली और मिश्रा आ गए। ग्रामीण में मंत्री के समर्थक चिंटू वर्मा का विरोध हुआ, तो श्रवण चावड़ा आ गए। आईडीए में मंत्री गुट के समर्थकों के नाम दौड़ में हैं तो वहीं इसमें भोपाल से पेंच फंसा है।
युवा-मोर्चा की बात करें तो लगभग हर गुट से एक नाम आगे आया है। इसके चलते मामला उलझा पड़ा है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और विविध मोर्चों के प्रभारियों को इंदौर में नियुक्ति करने में पसीना आ रहा है। युवा-मोर्चा और आईडीए बोर्ड से असली ताकत सामने आएगी कि आखिर में नियुक्ति में किस नेता की कितनी चल रही है।
ये खबरें भी पढ़िए...
इंदौर में व्हिस्की, रम में मिलावट, 6 ब्रांड के सैंपल फेल, स्वाद-खुशबू के लिए मिला रहे फ्लेवर
इंदौर में रोड एक्सीडेंट: रात 9 से 12 के समय सबसे ज्यादा मौतें, युवा हो रहे शिकार
इंदौर में रात 1 बजे प्रशासन और किसानों में हुई सुलह, धरना-प्रदर्शन खत्म
इंदौर के बिजली इंजीनियर पर लोकायुक्त का छापा, जांच में मिली 6.50 करोड़ की संपत्ति