इंदौर BJP में मूवी पॉलिटिक्स, मंत्री गुट ने शतक तो दूसरे गुट ने दिखाई द केरल स्टोरी-2, सभी अपने गुटों में जुटे
इंदौर बीजेपी नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा हो या फिर ग्रामीण जिलाध्यक्ष श्रवण चावड़ा, दोनों के लिए ही बीजेपी के सभी नेताओं को एकजुट करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। इसका सीधा असर फिलहाल आजीवन सहयोग निधि मिशन पर पड़ रहा है। इस बार टारगेट 5 करोड़ से ज्यादा है। अभी आधा टारगेट भी पूरा नहीं हो सका है।
इस तरह चल रही मूवी पॉलिटिक्स
इंदौर में अभी विधानसभा एक और दो यानी मंत्री गुट और विधानसभा चार यानी पूर्व महापौर व विधायक मालिनी गौड़ के बीच मूवी पॉलिटिक्स चल रही है। मंत्री गुट की ओर से संघ पर बनी शतक मूवी कार्यकर्ताओं व अन्य को थिएटर में लगातार दिखाई जा रही है।
उधर विधायक पुत्र एकलव्य गौड़ भी हिंदुत्व की ध्वजा संभाले हुए द केरल स्टोरी-2 दिखा रहे हैं। इसके लिए अपनी विधानसभा के थिएटर में लगातार विशेष शो कराए जा रहे हैं। कार्यकर्ता व अन्य को न्यौता दिया जा रहा है।
कोई भी नेता एकजुट होकर मूवी नहीं देख रहे हैं। एक के आयोजन में दूसरा नदारद रहता है। हाल ही में बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के यहां गमी हुई लेकिन वहां भी इंदौर के नेता अलग-अलग कर गुटों में पहुंचे।
हर विधायक अपने कामों में जुटा
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय- मंत्री विजयवर्गीय आजकल दिल्ली दौरे में अधिक व्यस्त हैं। साथ ही वह अपने प्रभार वाले जिलों व अन्य दौरों में लगे हुए हैं। संघ के पदाधिकारियों से मिलना हो या फिर संत-गुरुओं से वह लगातार अलग व्यस्त हैं।
विधायक मेंदोला और शुक्ला- विधानसभा दो के विधायक रमेश मेंदोला और विधानसभा तीन के विधायक गोलू शुक्ला के साथ सुमित मिश्रा नगराध्यक्ष की तिकड़ी बैठी हुई है। फिलहाल बीजेपी दफ्तर को यही तिकड़ी चला रही है। कुल मिलाकर बीजेपी दफ्तर विधानसभा दो व तीन के दफ्तर के रूप में ही चलता है। अन्य नेता दूर ही हैं।
विधायक मालिनी गौड़- विधानसभा चार की विधायक मालिनी गौड़ ने खुद को पार्टी दफ्तर से दूर रखा है। बहुत अहम मौके पर ही वह आती हैं। हाल ही में बीजेपी नगर की कोर समिति की बैठक में आई थीं। विधानसभा का भी मुख्य जिम्मा पुत्र एकलव्य ही संभाल रहे हैं।
विधायक महेंद्र हार्डिया- विधानसभा पांच के विधायक हार्डिया भी मुख्य तौर पर अपनी विधानसभा तक सीमित हैं। अभी विधानसभा में भी अपनी विधानसभा के अवैध निर्माण के सवाल को लेकर निगम को घेरा था।
विधायक मधु वर्मा- विधानसभा राउ से विधायक मधु वर्मा भी राउ तक ही सीमित हैं। ओवरऑल शहर के विकास, विजन व अन्य कामों को लेकर भूमिका सीमित है।
विधायक उषा ठाकुर- महू की विधायक ठाकुर की पहले से ही शहर के नेताओं से पटरी नहीं बैठ रही है। ऐसे में उन्होंने खुद को महू तक सिमटा लिया है।
विधायक मनोज पटेल- देपालपुर के विधायक मनोज पटेल वैसे ही फोन नहीं उठाए जाने के लिए जाने जाते हैं। वह भी यदा-कदा सक्रिय होते हैं। उन्हें भी शहर के नेताओं से कोई वास्ता नहीं है।
मंत्री तुलसी सिलावट- सांवेर से विधायक और मंत्री सिलावट ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर वाली राजनीति कर रहे हैं। वह सीएम मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया वाली राजनीति में हैं। साथ ही, शहरी गुटबाजी से परे हैं।
मिश्रा और चावड़ा की मुश्किलें
दरअसल सभी विधायकों को एकजुट करने का जिम्मा शहर में नगराध्यक्ष मिश्रा और ग्रामीण में जिलाध्यक्ष चावड़ा का है। लेकिन दोनों ही अभी यह करने में सफल नहीं हो पाए हैं। शहर के अलग-अलग गुट इन्हें अभी तक स्वीकार ही नहीं कर पाए हैं। इसके चलते पार्टी के कामों पर इसका असर हो रहा है।
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