इंदौर में 129 करोड़ का पेट्रोल-डीजल घोटाला, 7 व्यापारियों पर FIR दर्ज

Amresh Kushwaha | Apr 02, 2026, 10:25 IST
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इंदौर के मांगलिया स्थित BPCL डिपो में 129 करोड़ 55 लाख रुपए की धोखाधड़ी सामने आई है। फ्लीट कार्ड और लॉयल्टी ऐप की तकनीकी खामी से 7 व्यापारियों ने मुफ्त पेट्रोल-डीजल भरवाया। पुलिस ने FIR दर्ज की है।

News In Short

  • इंदौर के मांगलिया BPCL डिपो में 129 करोड़ 55 लाख रुपए का घोटाला सामने आया है।
  • BPCL के लॉयल्टी ऐप और फ्लीट कार्ड में तकनीकी खामी का फायदा उठाया गया।
  • 1093 ग्राहकों के वॉलेट में फर्जी रिचार्ज दिखाया गया, बैंक खाते में पैसा नहीं गया।
  • सात व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों ने बिना भुगतान किए डीजल-पेट्रोल भरवाया।
  • मांगलिया पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया, जांच जारी है।

News In Detail

ऐप की खामी से 129 करोड़ का खेल

इंदौर के मांगलिया इलाके में स्थित भारत पेट्रोलियम के डिपो से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है। मामला 129 करोड़ 55 लाख रुपए की धोखाधड़ी का है। इसमें शहर के सात व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों ने कंपनी के लॉयल्टी ऐप और फ्लीट कार्ड सिस्टम की तकनीकी खामी का फायदा उठाया है। पैसा दिए बिना डीजल और पेट्रोल भरवाते रहे। पुलिस ने उनके खिलाफ साइबर धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है।



फ्लीट कार्ड क्या होता है और कैसे काम करता है?

फ्लीट कार्ड (Fleet Card) ट्रक, बस और अन्य व्यावसायिक वाहनों के लिए जारी किया जाने वाला एक खास कार्ड होता है। इससे ड्राइवर नकद पैसे रखे बिना पेट्रोल-डीजल भरवा सकते हैं। जब भी कार्ड से तेल भरवाया जाता है, पैसा सीधे कंपनी के बैंक खाते से कटता है।



BPCL (Bharat Petroleum Corporation Limited) ने 17 दिसंबर 2021 से फ्लीट, कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत ग्राहकों के लिए एक लॉयल्टी ऐप शुरू किया था। इस ऐप से ग्राहक नेट बैंकिंग, यूपीआई (UPI - Unified Payments Interface), क्रेडिट या डेबिट कार्ड से अपना वॉलेट रिचार्ज कर सकते हैं। रिचार्ज के बाद वॉलेट का पैसा देशभर के BPCL स्टेशनों पर ईंधन भरवाने में काम आता है।



कैसे हुई गड़बड़ी?

BPCL का लॉयल्टी ऐप रेजरपे (Razorpay) और पाइनलैब्स (Pinelabs) पेमेंट गेटवे से जुड़ा है। रेजरपे के जरिए रिचार्ज की राशि सीधे BPCL के बैंक खाते में जाती है। 31 मार्च 2023 को रेजरपे की जोखिम मूल्यांकन टीम ने BPCL को सूचित किया कि लॉयल्टी ऐप और गेटवे सिस्टम में संदिग्ध रिचार्ज हुए हैं।



कंपनी ने जब अपना डेटा खंगाला, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। 1093 ग्राहकों के वॉलेट में 129 करोड़ रुपए का रिचार्ज दर्ज था, लेकिन कंपनी के बैंक खाते में एक रुपया भी नहीं आया था। यानी वॉलेट में बैलेंस दिख रहा था, पर असल में कोई भुगतान हुआ ही नहीं था।



BPCL ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी संदिग्ध खाते ब्लॉक कर दिए और जितनी रकम वापस मिल सकती थी, उसे वापस लिया। बाकी आरोपियों से पैसे लौटाने को कहा गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।



इंदौर के 7 आरोपी कौन हैं?

मांगलिया पुलिस चौकी प्रभारी विश्वजीत सिंह तोमर के मुताबिक BPCL के प्रादेशिक प्रबंधक (रिटेल) विक्रांत हाठे की शिकायत पर यह केस दर्ज किया गया है। आरोपियों में विशाल सिंह, शशि सिंह, दलवीर सिंह, बलजिंदर सिंह, वाहिक खान, नरेंद्र सिंह वासू और बलबीर सिंह के नाम शामिल हैं। ये सभी इंदौर के व्यापारी और ट्रांसपोर्टर हैं।



पुलिस का कहना है कि इन आरोपियों को पूरी जानकारी थी कि उनके खातों से पैसा नहीं कट रहा है। फिर भी वे लगातार ईंधन भरवाते रहे। जब BPCL ने रकम वापस मांगी तब भी उन्होंने मना कर दिया।



क्या यह सिर्फ इंदौर तक सीमित है?

पुलिस की जांच में एक और बड़ी बात सामने आई है। यह घोटाला सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है। जांच अधिकारियों के मुताबिक इसके तार देश के कई शहरों से जुड़े हैं। BPCL के 1093 ग्राहकों में से इंदौर के 7 आरोपियों की पहचान हो चुकी है। बाकी आरोपियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।



कंपनी और पुलिस दोनों इस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही हैं। डिजिटल ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और ऐप लॉग्स के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है।



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