एमपी में डॉक्टरों की कमी पर HC सख्त, इंदौर CMHO डॉ. हसानी केस में रिटायरमेंट पर बड़ा फैसला

Sanjay Gupta | Jul 08, 2026, 11:01 IST
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इंदौर के चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (CMHO) डॉ. माधव हसानी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट इंदौर ने मध्य प्रदेश शासन के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उन्हें 62 साल की उम्र पूरी होने पर रिटायर करने के निर्देश दिए गए थे।

इंदौर के चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (CMHO) डॉ. माधव हसानी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अब डॉ. हसानी 65 साल की उम्र तक अपनी सेवाएं जारी रख सकेंगे।



हाईकोर्ट का यह फैसला सिर्फ एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश में डॉक्टरों की कमी और अनुभवी चिकित्सकों को सेवा में बनाए रखने की नीति से भी जुड़ा है। कोर्ट ने माना कि मध्य प्रदेश में डॉक्टरों की कमी एक गंभीर समस्या है और ऐसे समय में अनुभवी डॉक्टरों की सेवाएं महत्वपूर्ण हैं।



डॉक्टरों की कमी को हाईकोर्ट ने माना अहम मुद्दा

जस्टिस संदीप एन. भट्ट की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि प्रदेश में डॉक्टरों की कमी है। ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की सेवाएं उपलब्ध कराना भी एक बड़ी चुनौती है।



कोर्ट ने कहा कि डॉ. हसानी ने लंबे समय तक क्लीनिकल सेवाएं दी हैं। उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर मरीजों का इलाज किया है। ऐसे में उन्हें 65 साल तक सेवा करने से रोकने का कोई ठोस आधार नहीं है।



एमपी में डॉक्टरों की कमी पर HC सख्त, इंदौर CMHO डॉ. हसानी केस में रिटायरमेंट पर बड़ा फैसला


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शासन ने 2012 के आदेश का दिया था हवाला

मध्य प्रदेश शासन ने डॉ. हसानी को 31 जुलाई 2026 को 62 साल की उम्र पूरी होने पर रिटायर करने का आदेश दिया था। शासन का तर्क था कि 65 साल की सेवा अवधि का लाभ केवल उन्हीं डॉक्टरों को मिलेगा, जिन्होंने 20 साल की क्लीनिकल सेवा पूरी की हो।



डॉ. हसानी ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि वह 1999 में मेडिकल ऑफिसर के रूप में सेवा में आए थे। दिसंबर 2005 में वह नियमित हुए। साल 1999 से 2023 तक उन्होंने क्लीनिकल क्षेत्र में काम किया।



उन्होंने कहा कि फरवरी 2023 में वह प्रशासनिक पद पर आए और जून 2025 में उन्हें CMHO बनाया गया। इसलिए उनकी पूरी सेवा अवधि को देखते हुए वह 20 साल की क्लीनिकल सेवा की पात्रता पूरी करते हैं।



कोर्ट ने कहा- नियमों का सही पालन नहीं हुआ

हाईकोर्ट ने कहा कि शासन ने अपने ही अप्रैल 2012 के आदेश को सही तरीके से लागू नहीं किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि पहले भी कई डॉक्टरों को इसी तरह की राहत मिल चुकी है।



इसी आधार पर कोर्ट ने जनवरी 2026 के शासन आदेश को रद्द कर दिया और डॉ. हसानी को 65 साल तक सेवा जारी रखने की अनुमति दे दी।



फैसले से दूसरे डॉक्टरों को भी मिल सकती है राहत

हाईकोर्ट के इस फैसले को चिकित्सा विभाग के अन्य अधिकारियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहले बीएल सैल्या, गिरधारीलाल सोढ़ी, सुरेखा जामरे सहित कई डॉक्टरों को इसी तरह की राहत मिल चुकी है।



ऐसे में भविष्य में 65 साल की सेवा अवधि को लेकर अन्य डॉक्टर भी इस फैसले का आधार ले सकते हैं।



राहत के साथ विभागीय जांच भी जारी

डॉ. हसानी को हाईकोर्ट से सेवा जारी रखने की राहत जरूर मिली है, लेकिन दूसरी तरफ उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भी की गई है।



क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य, इंदौर संभाग ने स्वास्थ्य आयुक्त को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। आरोप है कि 35 अस्पतालों की जांच से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसके कारण जांच पूरी नहीं हो सकी।



विभाग ने इसे वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना और गंभीर कदाचरण बताया है।



क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

indore cmhoडॉ. हसानी का मामला प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था (Indore News) से जुड़े बड़े सवाल को सामने लाता है। एक तरफ सरकार को डॉक्टरों की कमी से जूझना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ अनुभवी डॉक्टरों की सेवा अवधि को लेकर नियमों की व्याख्या का विवाद सामने आ रहा है।



हाईकोर्ट का यह फैसला आने वाले समय में डॉक्टरों की रिटायरमेंट नीति और एमपी स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक फैसलों पर असर डाल सकता है।



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